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मेहनत और मोबाइल ने चमकाई इनकी क़िस्मत

 सोमवार, 6 जनवरी, 2014 को 10:22 IST तक के समाचार
mobile indian, मोबाइल इंडियन

भारत में आईटी क्रांति ने ऐसे कई लोगों को मौक़ा दिया जो इनोवेटिव आइडिया और तकनीक के बल पर अपना उद्यम खड़ा करना चाहते थे.

कुछ नहीं से बहुत कुछ बनने वाले इन उद्यमियों के बीच सबसे ख़ास बात ये थी कि इन्होंने अपने बिज़नेस आइडिया में सबसे ज़्यादा तवज्जो मोबाइल फ़ोन को दिया.

आइए जानते हैं ऐसे ही कुछ उद्यमियों के बारे में जिनकी क़िस्मत चमकाने में मोबाइल का बड़ा योगदान रहा.

नीरज रॉय, हंगामा डिजिटल

नीरज रॉय दक्षिण एशिया के जाने माने मोबाइल इनोवेटर्स में से एक हैं.

मोबाइल एंटरटेनमेंट और वैल्यू ऐडेड सर्विसेज़ के क्षेत्र में दक्षिण एशिया की सबसे बड़ी कंपनियों में से एक ‘हंगामा डिजिटल’ के संस्थापक नीरज रॉय ने अपने करियर की शुरूआत एक होटल समूह में नौकरी के साथ शुरू की थी, लेकिन उनके मन में हमेशा ये बात थी कि वो एक दिन उद्यमी बनेंगे और वो बने भी.

आज उनकी कंपनी मोबाइल के लिए ऑडियो-वीडियो और टेक्स्ट कंटेंट से लेकर फ़िल्मों पर आधारित गेम्स तक बना रही है.

मोबाइल मीडिया क्षेत्र में बड़ा नाम कमा चुके नीरज रॉय ने हंगामा की शुरूआत साल 1999 में एक वेबसाइट के तौर पर की थी. अब उनकी कंपनी के पास पांच लाख से ज़्यादा देसी-विदेशी गानों के अधिकार हैं.

“हंगामा कंपनी को हमने साल 1999 में शुरू किया और पहले कुछ साल इसे एक पारंपरिक इंटरनेट कंपनी के तौर पर चलाया. साल 2005 के क़रीब हम मोबाइल क्षेत्र में घुसे और इसे ध्यान में रखते हुए कई प्रयोग किए जिससे हमें काफ़ी फ़ायदा पहुंचा. आज हम मोबाइल एंटरटेनमेंट के क्षेत्र में एक मज़बूत रूप से स्थापित कंपनी बन चुके हैं.”

विजय शेखर शर्मा, वन97 कम्युनिकेशंस

विजय शेखर शर्मा

विजय शेखर शर्मा वन97 कम्युनिकेशंस के संस्थापक और प्रबंध निदेशक हैं.

विजय शेखर शर्मा तेज़ी से विकसित हो रही मोबाइल इंटरनेट कंपनियों में से एक वन97 कम्युनिकेशंस के संस्थापक और प्रबंध निदेशक हैं.

आन्या गुप्ता की किताब ‘दी कैप्टनशिप’ में साझा किए अपने अनुभवों में विजय शेखर शर्मा ने कहा है कि वो गणित पढ़ना चाहते थे, लेकिन उनके पिता की इच्छा थी कि वो डॉक्टर बने. बाद में उनके घर में इसी बात ने वाद-विवाद की स्थिति उत्पन्न की.

कैपटनशिप में उन्होंने कहा, “मेरी यथास्थिति को स्वीकार न करने की आदत की शुरुआत इन्ही विवादों के बीच हुई. मैंने अपने आसपास मौजूद चीज़ों को नकारना शुरू कर दिया और ख़ुद को उन लोगों से अलग कर दिया जो परिस्थितियों को जैसे का तैसा स्वीकार कर लेते हैं. मैंने तुरंत ही नौकरी करने की संभावना के ख़्याल को दिमाग़ से निकाल बाहर फेंक दिया.”

“एक नौकरी भला मुझे क्या दे सकती थी? मैंने तय किया कि मैं नौकरी नहीं करूँगा. मैं ऐसा आदमी बनूंगा जो दूसरों को नौकरी देता हो. उस वक़्त मैं 17 साल का था.”

शर्मा ने अपने कॉलेज के दोस्त के साथ मिलकर अपनी इंटरनेट कंपनी बनाई और अचानक एक दिन उनके पास न्यू जर्सी की एक कंपनी से उनकी कंपनी को ख़रीदने का प्रस्ताव आया.

वन97 बिज़नेस की शुरुआती दिनों में ज्योतिषी कंपनी के दफ्तर में बैठते थे और अपना भविष्य जानने के इच्छुक लोग 901 नंबर डायल करके उनसे बात कर सकते थे.

इसी तरह कई अलग-अलग प्रोजेक्टों के ज़रिए कंपनी आगे बढ़ी और कंपनी के अनुसार हाल ही में हुए मूल्यांकन में वन97 की क़ीमत 30 करोड़ डॉलर आंकी गई.

संजीव बिखचंदानी, इंडिया इंफ़ो

संजीव बिखचंदानी

संजीव बिखचंदानी नौकरी डॉट कॉम के संस्थापक हैं.

इंटरनेट पर नौकरी का बाज़ार लगाने वाले नौकरी डॉट कॉम के संस्थापक और एग्ज़ीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट संजीव बिखचंदानी को साल 2008 में “अर्नस्ट एंड यंग आंत्रप्रैन्योर” संयुक्त अवार्ड मिला.

पहली पीढ़ी के उद्यमी संजीव बिखचंदानी ने इंफ़ोएज कंपनी की शुरूआत 1990 में एक गैराज से की.

उस वक़्त उनकी कंपनी जॉब सर्वे और ऑनलाइन डेटाबेस बनाने में लगी थी. ये उस वक़्त उनके लिए एक बड़ी उपलब्धि थी.

बाद मे नौकरी डॉट कॉम एक बड़ी जॉब पोर्टल के रूप में उभरी और आज उसके ट्रैफ़िक का एक बड़ा हिस्सा मोबाइल से आता है.

कंपनी ने हाल ही में अपना नया एंड्रॉएड ऐप लॉन्च किया है और रिपोर्टों के मुताबिक़ पहले ही महीने में क़रीब तीन लाख लोगों ने इसे डाउनलोड भी किया है.

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