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बंगलौर में भी 'आप'

 शुक्रवार, 3 जनवरी, 2014 को 17:59 IST तक के समाचार

बीते महीने दिल्ली विधानसभा चुनावों में आम आदमी पार्टी (आप) के मिली शानदार कामयाबी के बाद एक बड़ी तादात में सूचना प्रौद्योगिकी सहित अलग-अलग क्षेत्रों के पेशेवर इस पार्टी में शामिल होने के लिए आगे आ रहे हैं.

इस सूची की चोटी पर आईटी क्षेत्र के दिग्गज और इंफ़ोसिस के पूर्व मुख्य वित्तीय अधिकारी (सीएफओ) वी बालाकृष्णन तो मौजूद हैं ही, साथ ही इसमें आम आदमी के लिए सस्ती हवाई सेवाओं की शुरुआत करने वाले एयर डेक्कन के कैप्टन जी आर गोपीनाथ, शहरी विकास के मसले पर गहरा अनुभव रखने वाले पूर्व नौकरशाह डा. ए रविंद्रन भी शामिल हैं.

आप की राष्ट्रीय कार्यसमिति के सदस्य पृथ्वी रेड्डी ने बीबीसी हिंदी को बताया, "आठ दिसंबर को दिल्ली के परिणाम घोषित होने के बाद से हमारे पास सदस्यता के लिए ऑनलाईन पंजीकरण की बाढ़ सी आ गई है. हमारा अनुमान है कि इनमें से क़रीब एक लाख पंजीकरण मोटेतौर पर आईटी क्षेत्र से हैं."

'आप' ने बदला नज़रिया

वी बालाकृष्णन ने बताया, "मैं दिल्ली चुनावों के बाद से इस बारे में सोच रहा था. अधिक से अधिक युवा आप में शामिल हो रहे हैं. वो बदलाव चाहते हैं. आम आदमी पार्टी भी बदलाव चाहती है. इसलिए मैंने सोचा कि ये एक बेहतरीन मंच है. 'आप' ने शहरी भारत की आकांक्षाओं को समझा है और ये एक ख़ामोश क्रांति है."

आम आदमी पार्टी

आम आदमी पार्टी

रेड्डी ने कहा, "मीडिया में ख़बर आने से पहले हम नहीं जानते थे कि वो हमारी पार्टी में शामिल हो गए हैं. परंपरागत दलों के विपरीत हमारी पार्टी में कोई स्वागत समारोह नहीं होता है."

देश की आईटी राजधानी में एक दूसरी प्रमुख आईटी कंपनी के प्रवक्ता ने कहा, "आप को लेकर 25 से 35 साल आयु वर्ग के आईटी पेशेवरों के बीच काफ़ी चर्चा है."

इसका समर्थन करते हुए स्ट्रैंड साइंसेज के उपाध्यक्ष (सॉफ्टवेयर) आनंद जानकीरामन ने कहा "ये सही है." जानकीरामन ने अपनी कंपनी से एक साल के लिए कार्यअवकाश लिया है.

उन्होंने बताया, "यह बात मेरे दिमाग़ में काफ़ी समय से थी. देश को लेकर आप की चिंताएं बिल्कुल मेरे विचारों से मिलती हैं. हमें देश के लिए कुछ तो करने की ज़रूरत है. सबकुछ इसी तरह नहीं चल सकता है."

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व्यवस्था से मोहभंग

मनीपाल ग्लोबल एडूकेशन के अध्यक्ष और इंफ़ोसिस के पूर्व निदेशक एम जी पाई ने कहा, "अचानक हुए इस उभार की एक वजह यह है कि लोग जीवन स्तर में आई गिरावट और भ्रष्टाचार से परेशान हैं. इस क्षेत्र के लोगों की प्रतिक्रिया मोहभंग से उपजी है. याद रखिए ये वो लोग हैं जो काफी अधिक यात्राएं करते हैं. वो बदलाव चाहते हैं."

लेकिन दिल्ली में सत्ता हासिल करने के बाद ही लोग आम आदमी पार्टी में क्यों शामिल हो रहे हैं?

आम आदमी पार्टी

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इस बारे में गोपीनाथ कहते हैं, "दिल्ली के चुनाव परिणामों ने आप पर भरोसे को दर्शाया है. मैं शायद उन चुनिंदा कॉरपोरेट व्यक्तियों में था, जो भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन में शामिल हुए. लेकिन आप के गठन के बाद कई तरह के भ्रम थे. चुनाव परिणामों से साबित कर दिया कि आप के लक्ष्य को हासिल करना संभव है."

2008 में स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में कर्नाटक विधानसभा का चुनाव लड़ने वाले सिविल इंजीनियर और जल विशेषज्ञ विवेक मेनन ने कहा, "यह काम काफ़ी कठिन है. यह एक मुद्दा आधारित चुनाव था, और इसमें लोग जाति या नस्ल या धर्म के नाम पर विभाजित नहीं हुआ, जैसा कि कांग्रेस और भाजपा करते हैं."

भारत में शुरुआती दौर में बीपीओ की स्थापना करने वाले प्रकाश गुरुबक्शानी बताते हैं, "चंदा जमा करने में अपनाई गई पारदर्शिता महत्वपूर्ण है. परंपरागत दलों के विपरीत यहां कम से कम मैं यह जानता हूं कि मेरा पैसा कहां ख़र्च होगा. साफ़ है कि जिस तरह से चीज़ें हो रहीं थी, उससे हर कोई कुंठित और निराश था. आप ने खेल के नियम बदल दिए हैं. और, मैं आप में शामिल होऊंगा." प्रकाश गुरुबक्शानी इस समय एक रियल्टी कंपनी के सीईओ हैं.

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बदलाव कहां तक?

आम आदमी पार्टी

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भारत में हीमोफ़ीलिया के क्षेत्र में काम कर रही कलाकार रंजना रामचंदर कहती हैं कि इस पार्टी ने देश की प्रशासनिक व्यवस्था को नई जान दी है.

रेड्डे कहते हैं, "दिल्ली के चुनाव से यह उम्मीद पैदा की है कि ये संभव है. लोग अब महसूस कर रहे हैं कि लोकतंत्र क्या है."

ऐसे में क्या बालाकृष्णन के आगमन का मतलब है कि वो कांग्रेस के संभावित उम्मीदवार और अपने पूर्व सीईओ और इंफ़ोसिस के संस्थापक नंदन नीलेकणि के ख़िलाफ़ बेंगलूरू दक्षिण लोकसभा सीट से चुनाव लड़ेंगे?

रेड्डी कहते हैं, "इस सीट पर उनके लिए उतनी ही संभावनाएं हैं, जितनी एक-एक छात्र के लिए... हर सीट का अलग-अलग मूल्यांकन किया जाएगा."

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