टेस्को को भारत में 11 करोड़ डॉलर निवेश की मंजूरी

  • 31 दिसंबर 2013
रिटेल स्टोर, भारत
रिटेल स्टोर, भारत

ब्रितानी रिटेल कंपनी टेस्को के भारत में विस्तार की योजना को भारत सरकार की मंज़ूरी मिल गई है.

खुदरा बिक्री क्षेत्र की अगुआ ब्रितानी कंपनी ने भारत के खुदरा बाज़ार में 11 करोड़ डॉलर निवेश की इच्छा जताई थी.

टेस्को भारतीय टाटा समूह के साथ मिलकर भारत में सुपरमार्केट स्टोरों की शृंखला शुरू करेगी.

भारत सरकार के सुपरमार्केट क्षेत्र में विदेशी निवेश की मंज़ूरी देने के बाद टेस्को भारत में निवेश करने की अनुमति मांगने वाली पहली वैश्विक खाद्य आपूर्ति कंपनी है.

शत प्रतिशत विदेशी निवेश से किसका फायदा?

टेस्को के निवेश को सरकारी मंज़ूरी मिलने को भारत के धीमी पड़ती अर्थव्यवस्था में भरोसा लौटने के रूप में देखा जा रहा है. इसके पहले भारत में जटिल बाबूशाही और राजनीतिक विरोध के कारण विदेशी निवेश को आकर्षित करने के लिए काफी संघर्ष करना पड़ा है.

टेस्को के प्रवक्ता ने कहा है कि अब कंपनी टाटा से साथ अपने साझा उद्यम को शुरू करने की "व्यावहारिकता" पर काम कर सकती है.

इस समझौते के अनुसार टेस्को टाटा समूह के सुपरमार्केट 'ट्रेंट हाइपरमार्केट' में 50 फ़ीसदी हिस्सेदारी खरीदेगी.

लौटता भरोसा

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भारत में खुदरा बाज़ार में निवेश उम्मीद के अनुरूप नहीं रहा है.

टेस्को पहले से ही टाटा के स्टार बाज़ार शॉप के लिए उत्पादों की आपूर्ति करती रही है. टेस्को साल 2008 से टाटा की साझीदार है.

हालाँकि टेस्को के आवेदन को मंज़ूरी मिलने को भारत के खुदरा बाज़ार के नियमों के उदारीकरण के रूप में देखा जा रहा है.

जबकि इसी साल अक्तूबर में खुदरा बाज़ार क्षेत्र की दुनिया की सबसे बड़ी कंपनी वाल-मार्ट ने भारत की कंपनी भारती एंटरप्राइजेज के संग अपना साझा उपक्रम ख़त्म कर दिया था.

स्वीडेन की खुदरा बाज़ार की कंपनी हेंनेज एंड मॉरिट्ज (एच एंड एम) को भी भारत में स्टोर खोलने की इजाज़त दी जा रही है.

'एच एंड एम' ने दिसंबर में भारत में सात अरब बीस करोड़ रुपए निवेश करने की बात कही थी. कंपनी भारत में पूरे देश में 50 स्टोर खोलना चाहती है.

' निवेश के लिए चीन और अमरीका से बेहतर भारत'

मार्क्स एंड स्पेंसर भारत के खुदरा बाज़ार में निवेश करने में इच्छुक है. यह कंपनी पहले से ही भारत में मौजूद है और इसकी योजना स्टोरों की दुकानों की संख्या दुगुना 80 करने की योजना है.

भारत सरकार ने प्रत्यक्ष विदेशी निवेश(एफडीआई) को नियंत्रित करने वाली नीतियों में अगस्त, 2013 में छूट दी थी. इसके पहले विदेशी कंपनियों के लिए यह आवश्यक था कि वो 30 प्रतिशत उत्पाद भारतीय उद्यमों से खरीदेंगी. अब भारत सरकार ने इस सीमा को पाँच साल में पूरा करने की छूट दे दी है.

नए नियमों के तहत विदेशी रिटेल कंपनियाँ उन शहरों में भी अपने स्टोर खोल सकेंगी जिनकी जनसंख्या 10 लाख से कम हो. पहले इस पर रोक थी.

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