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'ठंड से मौत होती तो साइबेरिया में ज़िंदा कैसे?'

 शुक्रवार, 27 दिसंबर, 2013 को 12:51 IST तक के समाचार
राहत शिविर में रह रही महिला अपने बच्चे के साथ

उत्तर प्रदेश के प्रमुख गृह सचिव अतुल गुप्त ने कहा है कि ठंड से किसी व्यक्ति की मौत नहीं होती है.

अतुल गुप्त शुक्रवार को मुज़फ़्फ़रनगर राहत शिविरों में बच्चों की मौत की जाँच के लिए प्रदेश सरकार की ओर से बनाई गई समिति के नतीजों को मीडिया के सामने रख रहे थे.

उन्होंने कहा, ''बच्चों की मौत निमोनिया से हुई है, ठंड से नहीं. ठंड से किसी की मौत नहीं हो सकती है. अगर ठंड से लोगों की मौत होती तो साइबेरिया में कोई जिंदा नहीं रहता.''

अतुल गुप्त के इस बयान की काफ़ी आलोचना हो रही है. वहीं राज्य के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने गुप्त के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अधिकारियों को बयान देते समय सावधानी बरतने की सलाह दी. उन्होंने कहा, "शब्दों का चयन ऐसा होना चाहिए जिससे किसी की भावना को चोट न पहुँचे."

बच्चों की मौत

जांच समिति की रिपोर्ट आने के बाद प्रदेश सरकार ने पहली बार यह स्वीकार किया है, दंगों के बाद 15 साल तक की आयु के 34 बच्चों की मौत हुई है.

"बच्चों की मौत न्यूमोनिया से हुई है, ठंड से नहीं. ठंस से किसी की मौत नहीं हो सकती है. अगर ठंड से लोगों की मौत होती तो साइबेरिया में कोई जिंदा नहीं रहता"

अतुल गुप्त, प्रमुख सचिव, गृह

जांच समिति ने कहा है कि इनमें से केवल 10-12 बच्चों की ही मौत सात सितंबर से लेकर 20 दिसंबर के बीच राहत शिविरों में निमोनिया की वजह से हुई है. समिति ने कहा है कि बाकी के बच्चों की मौत सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों में हुई , जहाँ उनके माता-पिता उन्हें इलाज के लिए ले गए थे.

प्रमुख सचिव ने कहा कि कुल चार हजार सात सौ 83 लोग पाँच राहत शिविरों में रह रहे हैं. इनमें से एक शिविर मुज़फ़्फ़रनगर ज़िले के लोई और मदरसा तैमुल शाह, मलककुर, बरनावी औरक ईदगाह शामली ज़िले में चल रहे हैं.

उन्होंने कहा कि मरने वाले बच्चों में अधिकांश वे बच्चे थे जिनते माता-पिता उन्हें इलाज़ के लिए कैंप से बाहर ले गए या जिन्हें सरकारी अस्पतालों में भेजा गया. उन्होंने कहा कि सभी बच्चे अलग-अलग कारणों से मरे. इनमें से चार बच्चों की मौत निमोनिया हुई तो कुछ की मौत पेचिश की वजह से और एक नवजात की मौत समय से पहले पैदा होने की वजह से हुई.

अतुल गुप्त के इस बयान के बाद जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने माइक्रो ब्लागिंग वेबसाइट ट्विटर पर लिखा, ''ठंड से कोई नहीं मरता'', उनको कम कपड़ों में ठंड में भेज दीजिए, फिर देखिेए कि उनके सुर कैसे बदलते हैं.

वहीं पत्रकार ने शाहीद सिद्दीकी ने ट्विटर पर लिखा, ''अखिलेश और उनकी सरकार को साइबेरिया भेज देना चाहिए, जो ठंड से मरते बच्चों को छोड़कर सैफई महोत्सव पर सैकड़ों करोड़ रुपए बहा रही है.''

सरकार का हलफ़नामा

एक राहत शिविर में लोगों की समस्याएं सुनते कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी

उत्तर प्रदेश सरकार ने इससे पहले मुज़फ़्फरनगर के किसी भी राहत शिविर में किसी बच्चे की मौत से इनकार किया था. उसने इसी तरह का एक हलफ़नामा सुप्रीम कोर्ट में दायर किया था.

मीडिया में आई ख़बरों के आधार पर देश की सर्वोच्च अदालत ने उत्तर प्रदेश सरकार से इन तथ्यों की पुष्टि करने को कहा था.

इसके बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने 13 दिसंबर को इस जांच समिति को गठित किया था. मेरठ मंडल के आयुक्त मनजीत सिंह का इसका प्रमुख बनाया गया था. मुज़फ़्फ़रनगर और शामली ज़िले के जिलाधिकारी और मुख्य स्वास्थ्य अधिकारी इसके सदस्य थे.

इस समितो ने पहले 11 बच्चों की मौत की पुष्टि की थी. समिति ने अब राहत शिविरों में 34 बच्चों की मौत की पुष्टि की है.

हालांकि उत्तर प्रदेश में सत्तारूढ़ समाजवादी पार्टी (सपा) के प्रमुख मुलायम सिंह यादव ने कहा था कि इन राहत शिविर में कोई दंगा पीड़ित नहीं रह रहा, वहाँ जो लोग रह रहे हैं वे कांग्रेस और भाजपा के लोग है. उनका कहना था कि कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी चुनान में वोट बटोरने के लिए इस मुद्दे को ज़िंदा रखना चाहते हैं.

उनका यह बयान राहुल गांधी के इन राहत शिविरों के दौरे के ठीक एक दिन बाद आया था.

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने बच्चों की मौत के मामले प्रदेश के प्रमुख सचिव और मुज़फ़्फ़रनगर व शामली के ज़िलाधिकारियों को नोटिस भेजा है.

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