नरेंद्र मोदी को अदालत से राहत, ज़किया की अपील ख़ारिज

  • 26 दिसंबर 2013
ज़किया जाफ़री ने इस मामले में नरेंद्र मोदी के खिलाफ मामला दर्ज करने की अपील की थी

गुजरात में 2002 के दंगों में मारे गए कांग्रेस के पूर्व सांसद एहसान जाफ़री की विधवा ज़किया जाफ़री की याचिका अहमदाबाद के मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट की अदालत में ख़ारिज हो गई है.

इसका मतलब ये हुआ कि इस मामले में एसआईटी की ओर से गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को दी गई क्लीन चिट को मंज़ूरी मिल गई है.

दरअसल इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर गठित विशेष जाँच टीम (एसआईटी) ने मोदी को क्लीन चिट देते हुए मामला बंद करने की रिपोर्ट सौंपी थी.

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अहमदाबाद से स्थानीय पत्रकार अंकुर जैन के मुतबिक अदालत का कहना था कि ऐसे कोई प्रमाण नहीं हैं जिनके आधार पर नरेंद्र मोदी समेत 63 अन्य लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की अपील की गई थी.

बीबीसी के साथ ख़ास बातचीत में एसआईटी के प्रमुख आर के राघवन ने इस फ़ैसले पर खुशी जताई और इसके लिए उन्होंने सुप्रीम कोर्ट को धन्यवाद दिया. उन्होंने कहा, "बिना सुप्रीम कोर्ट के सहयोग हम लोग ये मुकदमा नहीं लड़ सकते थे."

चुनौती

वहीं ज़किया जाफ़री के बेटे तनवीर जाफ़री ने फ़ैसले के तुरंत बाद एक पत्रकार वार्ता में कहा कि वे इस मामले को ऊपरी अदालत में चुनौती देंगे. उन्होंने कहा, "हम हारे नहीं हैं. फ़ैसला देखने के बाद हम इसे ऊपरी अदालत में चुनौती देंगे."

एसीआईटी ने नरेंद्र मोदी को क्लीन चिट दी थी लेकिन दंगों में मारे गए कांग्रेस के पूर्व सांसद एहसान जाफरी की विधवा ज़किया जाफ़री ने क्लोज़र रिपोर्ट को चुनौती दी थी.

ज़किया जाफ़री की याचिका पर उनके वकीलों और एसआईटी के वकील की जिरह मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट बीजे गणात्रा के सामने पांच महीने तक चली.

जिरह पूरी होने के बाद जाफरी के वकील ने 18 सितंबर को अदालत को लिखित हलफ़नामा दिया था जबकि एसआईटी ने अपना लिखित हलफनामा 30 सितंबर को दिया था.

पहले मजिस्ट्रेट 28 अक्टूबर को फैसला सुनाने वाले थे लेकिन बाद में इसके लिए दो दिसंबर की तारीख़ रखी गई.

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