गुलबर्ग सोसाइटी दंगा, पर्याप्त सबूत नहीं:अदालत

  • 27 दिसंबर 2013
नरेंद्र मोदी

एसआईटी की रिपोर्ट में गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को क्लीन चिट देने के ख़िलाफ़ अदालत गईं ज़किया जाफ़री की याचिका को अदालत ने गुरुवार को ख़ारिज कर दिया.

अहमदाबाद के मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट ने अपने 440 पन्नों के आदेश में कहा कि ऐसे कोई प्रमाण नहीं हैं जिनके आधार पर नरेंद्र मोदी समेत 63 अन्य लोगों के खिलाफ़ एफ़आईआर दर्ज़ करने की अपील को जायज़ ठहरा सकें.

अपने आदेश में मजिस्ट्रेट ने कहा कि आपराधिक षडंयंत्र एक अलग घटना है और जो रिकॉर्ड पेश किए गए हैं उससे अदालत इस निर्णय पर पहुंची है कि जिन लोगों पर आरोप लगाए गए हैं उनके ख़िलाफ़ पर्याप्त सबूत नहीं है.

इस आदेश में कहा गया है कि ट्रेन में जो आग लगी थी वो सरकारी पदाधिकारियों का सुनियोजित पड़यंत्र नहीं थी इसलिए इस नतीजे पर नहीं पहुंचा जा सकता है कि यह घटना उनके उकसाने पर हुई थी.

एसीआईटी ने नरेंद्र मोदी को क्लीन चिट दी थी लेकिन दंगों में मारे गए कांग्रेस के पूर्व सांसद एहसान जाफ़री की विधवा ज़किया जाफ़री ने क्लोज़र रिपोर्ट को अदालत में चुनौती दी थी.

कांग्रेस के पूर्व सांसद एहसान जाफ़री की विधवा ज़किया जाफ़री की याचिका उनके वकीलों और एसआईटी के वकील की जिरह मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट बीजे गणात्रा के सामने पांच महीने तक चली.

षडयंत्र और उकसावा

गुलबर्ग सोसायटी
28 फ़रवरी 2002 को गुलबर्ग सोसायटी में हुए दंगे में कांग्रेस के पूर्व सांसद एहसान जाफ़री समेत 69 मारे गए थे.

मजिस्ट्रेट ने कहा, "इस घटना को नरसंहार और नस्लीय सफाया नहीं कहा जा सकता है."

उनका कहना था, "नरेंद्र मोदी ने घटना के बाद दूरदर्शन पर दोनों समुदाय के लोगों को संबोधित करते हुए शांति बनाए रखने की अपील भी की थी. जो ये दर्शाता है कि पुलिस और सुरक्षाबलों को राज्य में क़ानून- व्यवस्था बनाए रखने के लिए तैनात किया गया था. साथ ही सेना भेजने के लिए अपील समय से की गई थी ऐसे में ये नहीं समझा जा सकता कि ये षड़यंत्र या इसे उकसाने वाला था."

अदालत ने अपने आदेश में कहा कि वो इस बात से सहमत नहीं है कि मोदी ने दंगों को रोकने के लिए सकारात्मक कदम नहीं उठाए. जहां जरूरत पड़ी वहां कर्फ्यू भी लगाया गया था.

एसआईटी की क्लोज़र रिपोर्ट पर सहमति जताते हुए कोर्ट ने कहा ज़ाकिया ज़ाफरी ने अपनी शिकायत में इसे भयानक हादसा बताया है लेकिन यह अदालत इसे उनके निजी नजरिए के रूप में ही ले सकती है और अदालत इस घटना का मूल्यांकन केवल क़ानून के आधार पर कर सकती है.

अदालत के फ़ैसले के बाद जाफ़री के बेटे तनवीर जाफ़री ने एक पत्रकार वार्ता में कहा कि वे इस आदेश को ऊपरी अदालत में चुनौती देंगे.

याचिका

ज़किया जाफ़री
ज़किया जाफ़री अब इस फ़ैसले को ऊपरी अदालत में चुनौती देंगी.

गुजरात की अदालत के साल 2002 में हुए दंगों के सिलसिले में नरेंद्र मोदी के खिलाफ़ दायर की गई ज़किया जाफ़री की याचिका को ख़ारिज किए जाने पर भारतीय जनता पार्टी ने इसे पार्टी और मोदी की नैतिक जीत बताया है.

इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर विशेष जांच टीम (एसआईटी) का गठन किया गया था जिसमें मोदी को क्लीन चिट देते हुए मामले को बंद करने की रिपोर्ट सौंपी गई थी. अब एसआईटी की मोदी को दी गई क्लीन चिट की मंजूरी मिल गई है.

अदालत के फैसले का स्वागत करते हुए भाजपा ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी क्योंकि राजनीतिक तौर पर नहीं लड़ सकती है इसलिए मोदी को आपराधिक मामले में फंसाना चाहती है.

फ़ैसला आऩे के बाद नरेंद्र मोदी ने ट्विट किया, ''सत्यमेव जयते'' (सत्य की जीत होती है).

राज्यसभा में विपक्ष के नेता अरुण जेटली का कहना था कि अदालत के आदेश से इस बात की पुष्टि हो गई है ये आरोप प्रचार और राजनीतिक कारणों से लगाए गए थे और इसमें कोई तथ्य नहीं है. उनका कहना, ''फ़र्जी बयानबाजी सबूत नहीं बन सकते हैं. सत्य और असत्य के बीच फर्क ये होता है कि सत्य के साथ तथ्य एकसाथ रहते है तो वहीं असत्य बिखर जाता है.''

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