BBC navigation

'आप' ने कहा, लोग सरकार बनाने के पक्ष में

 रविवार, 22 दिसंबर, 2013 को 13:50 IST तक के समाचार
अरविंद केजरीवाल

दिल्ली विधानसभा की 70 सीटों में से 28 सीटें जीतकर राज्य में सरकार बनाने की जुगत में जुटी आम आदमी पार्टी ने सौ से ज्यादा जगहों पर सार्वजनिक सभाएं करके लोगों से ये जानने का प्रयास किया है कि उसे सरकार बनाना चाहिए या नहीं.

विधानसभा की आठ सीटें जीतने वाली कांग्रेस ने आम आदमी पार्टी को सरकार बनाने के लिए बिना शर्त समर्थन की घोषणा की है.

आम आदमी पार्टी के नेता मनीष सिसोदिया ने बीबीसी संवाददाता वर्तिका को बताया कि इन सभाओं में ज़्यादातर लोगों ने यही कहा है कि मौजूदा हालात में पार्टी को सरकार बना लेनी चाहिए.

मनीष सिसोदिया का ये भी कहना है कि अभी कई और जगहों पर इसी तरह की सभाएं होना बाकी हैं और इन सभाओं के बाद ही सरकार बनाने या नहीं बनाने के बारे में कोई अंतिम निर्णय लिया जाएगा.

उनका कहना है कि दिल्ली की हर विधानसभा में ऐसी कम से कम चार बैठकें की जा रही हैं.

निर्णय लेने की प्रक्रिया के बारे में मनीष सिसोदिया ने बताया कि इन बैठकों में आए लोगों को सरकार बनाने से होने वाले नफ़ा-नुकसान के बारे में बताया जाता है जिसके बाद यही लोग ध्वनिमत के ज़रिए इस पर अपनी राय रखते हैं.

सड़क और साइबर संसार

अरविंद केजरीवाल

आम आदमी पार्टी सरकार बनाने के मुद्दे पर साइबर मीडिया के ज़रिए भी लोगों की राय ले रही है. इस बारे में मनीष सिसोदिया का कहना है कि साइबर मीडिया के ज़रिए लगभग साढ़े छह लाख लोगों ने अपनी बात कही है.

उनका दावा है कि इनमें से 75 से 80 प्रतिशत लोगों ने भी कहा है कि आम आदमी पार्टी को दिल्ली में सरकार बनानी चाहिए.

सरकार बनाने की स्थिति में पहले तीन महीने में आम आदमी पार्टी का क्या एजेंडा होगा, ये पूछे जाने पर मनीष सिसोदिया ने बीबीसी से कहा, ''सबसे पहले तो लोकपाल क़ानून बनाना है जिसके लिए हमने दिल्ली में बात की है. संसद में पारित क़ानून में लोकायुक्त का मुद्दा राज्यों पर छोड़ा गया है. हम दिल्ली में एक मज़बूत लोकायुक्त कानून लाएंगे.''

अन्य मुद्दों की बात करते हुए उन्होंने कहा, ''दिल्ली में बिजली और पानी में भी भ्रष्टाचार है. हर घर को रोज़ाना 700 लीटर साफ़ पानी मिलना चाहिए. बिजली घोटाले की जांच की जाएगी ताकि बिजली के दाम आधे किए जा सकें. महिलाओं की सुरक्षा भी सुनिश्चित करनी है.''

दिल्ली की राजनीति

दिल्ली

आम आदमी पार्टी को दिल्ली में सरकार बनाने के मुद्दे पर लोगों की राय जानने के लिए तब मजबूर होना पड़ा जब उस पर विरोधी दलों ने ये आरोप लगाया कि वह सरकार बनाने की अपनी ज़िम्मेदारी से भाग रही है.

पार्टी के पास सरकार बनाने के लिए ज़रूरी बहुमत नहीं है, लेकिन कांग्रेस ने बिना शर्त समर्थन की बात कहकर गेंद को एक बार अरविंद केजरीवाल के पाले में डाल दिया था.

पार्टी विधायक दल के नेता अरविंद केजरीवाल को दिल्ली के लेफ़्टिनेंट गवर्नर ने सरकार गठन के लिए तब बुलाया था जब राज्य में सबसे ज्यादा 31 सीटें जीतने वाली भारतीय जनता पार्टी ने बहुमत नहीं मिलने की बात कहकर सरकार बनाने से इंकार कर दिया था.

लेफ़्टिनेंट गवर्नर से मुलाक़ात के बाद अरविंद केजरीवाल ने भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के नाम 18 शर्तों के साथ चिट्ठी लिखी थी जिस पर भारतीय जनता पार्टी ने कोई जबाव नहीं दिया था जबकि कांग्रेस ने पत्र का जबाव देकर आम आदमी पार्टी पर सरकार बनाने के लिए दबाव बना दिया था.

मुख्यमंत्री पद

दिल्ली विधानसभा का गठन 17 मार्च 1952 को हुआ था और कांग्रेस नेता चौधरी ब्रह्म प्रकाश पहले मुख्यमंत्री थे. वे 1952 से 1955 तक इस पद पर रहे. उनके बाद कांग्रेस के ही जीएन सिंह इस मुख्यमंत्री बने और 1956 तक रहे.

एक अक्तूबर 1956 को दिल्ली में राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया, जो 1993 तक रहा. साल 1993 में दिल्ली में हुए विधानसभा चुनाव के बाद भाजपा के मदन लाल खुराना मुख्यमंत्री बने. वे 1996 तक इस पद पर रहे. उनके बाद भाजपा के ही साहब सिंह वर्मा दिल्ली के मुख्यमंत्री बनाए गए, जो 1998 तक इस पद पर रहे. भाजपा की ही सुषमा स्वराज भी कुछ समय के लिए मुख्यमंत्री रहीं.

साल 1998 में हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस एक बार फिर दिल्ली की सत्ता में लौटी और शीला दीक्षित दिल्ली की छठवीं मुख्यमंत्री बनीं, जो 2013 तक इस पद पर रहीं. अब दिल्ली को अपने नए मुख्यमंत्री का इंतजार है.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए क्लिक करें यहां क्लिक करें. आप हमें क्लिक करें फ़ेसबुक और क्लिक करें ट्विटर पर भी फ़ॉलो कर सकते हैं.)

इसे भी पढ़ें

टॉपिक

BBC © 2014 बाहरी वेबसाइटों की विषय सामग्री के लिए बीबीसी ज़िम्मेदार नहीं है.

यदि आप अपने वेब ब्राउज़र को अपडेट करते हुए इसे स्टाइल शीट (सीएसएस) के अनुरूप कर लें तो आप इस पेज को ठीक तरह से देख सकेंगे. अपने मौजूदा ब्राउज़र की मदद से यदि आप इस पेज की सामग्री देख भी पा रहे हैं तो भी इस पेज को पूरा नहीं देख सकेंगे. कृपया अपने वेब ब्राउज़र को अपडेट करने या फिर संभव हो तो इसे स्टाइल शीट (सीएसएस) के अनुरुप बनाने पर विचार करें.