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देवयानी मुद्दे का 'समाधान' तलाश रहा है भारत

 शनिवार, 21 दिसंबर, 2013 को 04:48 IST तक के समाचार
देवयानी खोबरागड़े

अमरीका में भारतीय राजनयिक क्लिक करें देवयानी खोबरागड़े की गिरफ़्तारी और उनके साथ कथित दुर्व्यहार का मामला तूल पकड़ने के बाद अब कुछ शांत होता प्रतीत हो रहा है.

मामला सामने आने के बाद भारत ने एकदम अप्रत्याशित और बहुत हद तक आक्रामक रुख़ अपनाया था, लेकिन शुक्रवार को भारत ने कहा कि अमरीका ने देवयानी के ख़िलाफ़ लगाए गए आरोपों को ख़ारिज़ करने की भारत की मांग भले ही ठुकरा दी है, इसके बावजूद, दोनों दोनों देशों के बीच 'बहुमूल्य' द्विपक्षीय संबंधों को 'बचाकर रखना' महत्वपूर्ण है.

इस मामले में भारत के नरम पड़ते रुख़ का ये संकेत तब मिला जब विदेश मंत्री सलमान ख़ुर्शीद ने मुद्दे का 'समाधान' तलाशने की बात कही.

उन्होंने भारतीय राजनयिक के साथ किए गए बर्ताव को 'पीड़ादायक' और 'अस्वीकार्य' ज़रूर बताया, लेकिन ये भी कहा कि मुद्दे के समाधान में इस बात का भी ध्यान रखा जाएगा कि 'भारत और अमरीका के संबंध मूल्यवान हैं.'

'बड़े पैमाने पर निवेश'

सलमान ख़ुर्शीद ने कहा, ''ये मेरा कर्तत्व है कि मैं इस मुद्दे पर अमरीकी विदेश मंत्री जॉन कैरी से बात करुं. दोनों देशों के विदेश मंत्रालय स्तर और विदेश सचिव स्तर पर भी बातचीत हो रही है. मेरा मानना है कि हमारे बीच अभी तक जो बातचीत हुई है, वो सार्थक रही है.''

उन्होंने अमरीका के साथ संबंधों का महत्व बताते हुए कहा कि इसके लिए 'बड़े पैमाने पर निवेश' किया गया है और ''हमें तमाम बातों को ध्यान में रखना ज़रूरी है.''

'आत्मचिंतन' और 'पश्चाताप'

"ये मेरा कर्तत्व है कि मैं इस मुद्दे पर अमरीकी विदेश मंत्री जॉन कैरी से बात करुं. दोनों देशों के विदेश मंत्रालय स्तर और विदेश सचिव स्तर पर भी बातचीत हो रही है. मेरा मानना है कि हमारे बीच अभी तक जो बातचीत हुई है, वो सार्थक रही है."

सलमान ख़ुर्शीद, विदेश मंत्री

एक ओर जहां विदेश मंत्री अमरीका के साथ संबंधों का हवाला दे रहे थे, वहीं दूसरी ओर सूचना और प्रसारण मंत्री मनीष तिवारी का कहना है कि अमरीका को इस मामले में 'आत्मचिंतन' और 'पश्चाताप' करना चाहिए.

उन्होंने कहा, ''देवयानी जी के साथ जो हुआ, वो बदसलूकी से भी ज़्यादा था. इसीलिए अमरीका को चाहिए कि वो इस पर आत्मचिंतन करे, पश्चाताप करे, क्योंकि अपने राजनयिकों के साथ इस तरह का बर्ताव कोई भी मुल्क बर्दाश्त नहीं करेगा.''

लेकिन विदेश मंत्री सलमान ख़ुर्शीद अब जिस नपे-तुले अंदाज़ में बयान दे रहे हैं और बयान के लिए जिस तरह के शब्दों का चयन कर रहे हैं, उससे ऐसा प्रतीत हो रहा है कि भारत इस मुद्दे पर थोड़ा नरम ज़रूर पड़ा है.

"देवयानी जी के साथ जो हुआ, वो बदसलूकी से भी ज़्यादा था. इसीलिए अमरीका को चाहिए कि वो इस पर आत्मचिंतन करे, पश्चाताप करे, क्योंकि अपने राजनयिकों के साथ इस तरह का बर्ताव कोई भी मुल्क बर्दाश्त नहीं करेगा."

मनीष तिवारी, सूचना एवं प्रसारण मंत्री

मसलन, विदेश मंत्री ने भारत और अमरीका के संबंधों के लिए 'मूल्यवान' शब्द का इस्तेमाल किया और ये भी कहा कि इसके लिए 'बड़े पैमाने पर निवेश' किया गया है.

एक दिन पहले, अमरीका ने ये कहकर इस मामले में नया पेंच डाल दिया था कि देवयानी का तबादला संयुक्त राष्ट्र स्थित भारतीय दूतावास में होने पर भी उन पर चल रहे आपराधिक मुकदमे में कोई बदलाव नहीं आएगा.

वहीं भारत लगातार ये दोहरा रहा था कि अमरीका को देवयानी पर लगाए गए अभियोग 'बिना शर्त वापस' लेने चाहिए.

लेकिन अब संबंधों का हवाला देते हुए विदेश मंत्री सलमान ख़ुर्शीद ने कहा है कि संबंधों को लेकर भारत जितना 'संवेदनशील' है, अमरीका को भी उतना ही 'सचेत' होना चाहिए.

उन्होंने कहा है कि भारत इस मुद्दे का 'समाधान तलाश रहा है' और 'उम्मीद है कि जल्द ही कोई समाधान तलाश लिया जाएगा.'

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