कौन डरता है आम आदमी पार्टी से?

  • 13 दिसंबर 2013

दिल्ली में आम आदमी पार्टी के ज़ोरदार चुनानी प्रदर्शन के बाद, उसकी इस घोषणा ने राजनीतिक दलों में खलबली मचा दी कि वह न किसी पार्टी को समर्थन देगी और न लेगी.

चुनावोपरांत जो हल-चल, खींचतान और दल-बदल आम तौर पर त्रिशंकु विधानसभा में नज़र आता है, वो मानो बीते दिनों की बात हो गया हो.

भारतीय जनता पार्टी, जिसे इससे पहले इन गतिविधियों से परहेज़ नहीं रहा, ने भी घोषणा कर डाली कि चुनावों में सबसे बड़ी पार्टी होने के बावजूद वह सरकार इसलिए नहीं बनाएगी क्योंकि उसे स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है.

जहाँ कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार संसद में लोकपाल बिल को पारित कराने के प्रयासों में लगी हुई है वहीं आम आदमी पार्टी ने कहा है कि जनलोकपाल बिल ही पारित होना चाहिए और कोई ऐसा बिल स्वीकार्य नहीं हो जिसके प्रावधान जनलोकपाल बिल से मेल न खाते हों.

उधर रालेगण सिद्धि में जनलोगपाल बिल के समर्थन में बैठे गांधीवादी समाजसेवी अन्ना हज़ारे के मंच से पूर्व सेनाध्यक्ष जनरल वीके सिंह और 'आप' के एक नेता के बीच तूतू-मैं मैं भी हुई. इसके बाद जनरल वीके सिंह ने कहा कि सरकार जो लोकपाल बिल पारित कराने की बात कर रही है वह एक सकारात्मक कदम और इसे स्वीकार किया जाना चाहिए.

इस संदर्भ में क्या केंद्र में सत्ताधारी कांग्रेस पार्टी जिसे 'आप' ने दिल्ली विधानसभा चुनावों में सत्ता से हटाने का काम किया और उसके नेता सोनिया और राहुल गांधी 'आप' से डरे हुए हैं?

क्या भाजपा डरी हुई है, जिसे 'आप' ने दिल्ली में सत्ता में आने से रोक दिया और जो अपने प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी के दौरों के बावजूद दिल्ली में पर्याप्त सीटें न पा सकी?

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