सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले का व्यापक विरोध

  • 11 दिसंबर 2013
ट्विटर
ट्विटर के ज़रिए लोगों ने रखी अपनी बात

समलैंगिक यौन संबंधों को ग़ैर कानूनी बताने वाले सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर सोशल मीडिया पर ज़बरदस्त प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है.

बहुत से लोगों ने माइक्रोब्लॉगिंग वेबसाइट ट्विटर पर अपना विरोध जताया है.

फ़ैसला आने के बाद बीबीसी मॉनिटरिंग सर्विस ने क्रिमसन हेक्सागन टूल की मदद से पहले चार घंटे में ट्विटर पर आ रही करीब 20 हज़ार भारतीय प्रतिक्रियाओं को आंकने के बाद पाया है कि 90 फ़ीसदी से ज्यादा ट्वीट फ़ैसले के विरोध में आए हैं, जबकि अदालत के फ़ैसले का महज तीन फ़ीसदी लोग समर्थन कर रहे हैं.

इन ट्विट में निराशा, अंधा युग, शर्मनाक, पिछड़ा फ़ैसला जैसे शब्दों का इस्तेमाल हुआ है.

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को समलैंगिक यौन संबंधों पर प्रतिबंध को बरकरार रखते हुए 2009 में दिए गए दिल्ली हाई कोर्ट के उस फैसले को पलट दिया जिसमें समलैंगिक सेक्स को अपराध के दायरे से बाहर कर दिया गया था.

धारा 377 के अनुसार समलैंगिक संबंध एक अप्राकृतिक अपराध है और इसके लिए दस साल कैद की सजा का प्रावधान है.

#sec377, #scrap377, #section377 जैसे हैशटेग ट्विटर पर सबसे ज्यादा ट्रेंड कर रहे हैं जिनके जरिए लोग सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले अपनी नाराज़गी को जता रहे हैं.

आक्रोश

सीएनएन-आईबीएम से जुड़ी पत्रकार सागरिका घोष ने ट्वीट किया है, "धारा 377 पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला एक बड़ा झटका है. दिल्ली हाई कोर्ट के एक दूरगामी फैसले को दरकिनार कर दिया गया है. एलजीबीटी का अपराधीकरण, भारतीय नागरिकों को स्वतंत्रता के अधिकार से वंचित किया गया."

प्रसिद्ध लेखक चेतन भगत ने पोस्ट किया है, "इस फैसले से हम समलैंगिक जोड़े के पीछे पुलिस तैनात कर रहे हैं. क्या यही वो भारत है, जिसका निर्माण हम 21वीं सदी में करना चाहते हैं."

प्रख्यात पत्रकार बरखा दत्त ने ट्वीट किया है, "प्रिय सर्वोच्च न्यायालय, आप संसद के बुरे कामों से हमारा संरक्षण करते है, जबकि वो आपकी दायरे से परे है, लेकिन आज आपने उदार मूल्यों को कुचलने के लिए इस प्रक्रिया का इस्तेमाल किया है.#खत्म करो377."

अभिनेत्री अनुष्का शर्मा ने लिखा है, "सुप्रीम कोर्ट के फैसले से बेहद निराश हूं. आज़ादी एक छलावा भरा शब्द है, जबकि अधिकार अस्पष्ट रहस्य है."

जानी-मानी लेखिका तसलीमा नसरीन का कहना है, "भारत में प्रेम प्रतिबंधित है. शर्मनाक, शर्मनाक! #377."

लेखक रमेश श्रीवत्स ने पोस्ट किया है, "यदि हम अब भी ब्रिटिश शासन के हर बेकार कानून को बरक़रार रखते हैं, तो हमने आज़ादी किस लिए हासिल की है? अपने लिए और बुरे कानून बनाने के लिए?#377."

हास्य अभिनेता वीर दास ने ट्वीट किया है, "आज 11.12.13 है. अगर आप हमारे सुप्रीम कोर्ट में काम हैं, तो अभी वर्ष 1826 है."

फैसले के समर्थन में

कुछ यूज़र्स ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले के प्रति समर्थन भी जताया है.

तैयब शेख़ ने ट्वीट किया है. "#377 मैं सुप्रीम कोर्ट के फैसले से खुश हूं जिसमें समलैंगिक सेक्स को अपराध करार दिया गया है. अब इस कानून को लागू भी करना है."

@सीजीमागिया ने पोस्ट किया है, "मैं सुप्रीम कोर्ट का फैसला सुन कर खुश हूं जिसमें समलैंगिकों पर रोक लगाई है.#धारा 377 अब हमें सभी समलैंगिक समर्थकों का विरोध करना होगा."

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