अलीगढ़ से छुड़ाए बदहाल 49 घोड़े

  • 6 दिसंबर 2013
घोड़ा, घोड़े

देश में पशुओं के अधिकारों के लिए लड़ने वाले समूह ने उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले स्थित प्रजनन केंद्र से 49 घोड़ों को बदहाल हालत में छुड़ाया है.

दिल्ली स्थित एक गैर सरकारी संगठन फ्रैंडीकोएस के प्रवक्ता ने बीबीसी को बताया, "पिछले सप्ताह अलीगढ़ से छुड़ाए गए छह घोड़ों की पहले ही मौत हो चुकी है और चार की हालत काफी नाजुक है."

उन्होंने कहा, "बाकी घोड़े यदि जीवित बचते हैं तो उनकी कई महीनों तक देखभाल करने की जरूरत पड़ेगी. इस फॉर्म का मालिक अभी फरार है और वहां मौजूद चार कर्मचारियों ने बताया कि उन्हें पिछले एक वर्ष से वेतन नहीं मिला है."

कर्मचारियों ने बताया, "दूसरे सारे कर्मचारी छोड़कर चले गए हैं और इस फॉर्म का इस्तेमाल रेस के घोड़ों के प्रजनन के लिए होता है. उन्होंने कहा कि यहां अधिकांश घोड़े अच्छी नस्ल के थे."

दुर्बल और घायल

फ्रैंडीकोएस की उपाध्यक्ष गीता शेषमणि ने बीबीसी को बताया, "जानवरों के बहुत कमजोर होने की वजह से इन घोड़ों को बहुत लम्बे समय से बेहद खराब हालात में रखा गया था."

उन्होंने कहा, "इस बारे में पहले से प्राप्त सूचना के आधार पर उनके एनजीओ ने एक 16 सदस्यीय राहत दल अलीगढ़ भेजा था, जिसमें दो पशु चिकित्सक शामिल थे. उन्होंने कहा कि दल को वहां के हालात बहुत ही खराब लगे."

शेषमणि के अनुसार, "फॉर्म में मौजूद जानवर उनके शरीर पर लगे घावों की वजह से काफी कमजोर हो चुके थे और बहुत से तो कमजोरी और पानी की कमी के कारण खड़े भी नहीं हो पा रहे थे."

शेषमणि ने कहा, "हर जानवर बहुत कमजोर था. हमें उन्हें पानी-भोजन देना था और 24 घंटों के बाद हम उन्हें दो वाहनों में डालकर दिल्ली ला सकते थे. इनमें से पांच घोड़े बिल्कुल मरणासन्न स्थिति में थे, हमें मालूम था कि वे खड़े नहीं हो पाएंगे, लेकिन हमारा दिल उन्हें वहां छोड़कर आने को नहीं माना. बाद में एक घोड़ा शरीर में पानी की कमी के चलते मर गया."

खाने के लिए कुछ नहीं

शेषमणि ने कहा, "फॉर्म में मौजूद कर्मचारियों ने राहत दल को बताया कि इन जानवरों को पिछले कई महीनों से ऐसी ही हालत में छोड़ा हुआ है. कर्मचारियों ने कहा कि शुरुआत में घोड़े घास-फूस खाकर गुजारा करते थे और इसके बाद उन्होंने अपना मल ही खाना शुरू कर दिया. लेकिन पिछले कुछ सप्ताह से उनके पास खाने के लिए कुछ नहीं है."

शेषमणि के अनुसार, "बाकी बचे हुए घोड़ों के लिए यह एक लंबी लड़ाई होने जा रही है. उन्हें लगातार देखभाल की जरूरत है, ठीक होने के लिए कम से कम तीन से छह महीनों का समय चाहिए. यह सुखद है कि वे जीवित हैं. अभी इन घोड़ों को दिल्ली से सटे गुड़गांव स्थित फ्रैंडीकोएस फॉर्म में रखा गया है, जहां उनकी देखभाल की जा रही है."

शेषमणि ने बताया कि देश का रेसिंग समुदाय और घोड़ों से प्रेम करने वाले कई लोगों ने मदद की पहल की है, लेकिन एनजीओ का कहना है कि इसके लिए काफी मदद की गुरेज है. उन्होंने कहा कि हमें और अधिक पैसे की जरूरत है. हमें उनके लिए भोजन खरीदना है. एक बड़ी जगह किराए पर चाहिए, ताकि वे कुछ अभ्यास भी कर सकें.

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