तरूण तेजपाल के पास अब क़ानूनी विकल्प क्या हैं?

  • 28 नवंबर 2013
tejpal

तहलका के पूर्व संपादक तरुण तेजपाल को अपनी सहकर्मी के यौन शोषण के मामले में गुरूवार को भारतीय समयानुसार दोपहर तीन बजे गोवा पुलिस के समक्ष पेश होना है.

तरुण तेजपाल ने दिल्ली हाईकोर्ट में अग्रिम ज़मानत के लिए याचिका दायर की थी. याचिका पर बुधवार को सुनवाई के बाद दिल्ली हाईकोर्ट ने फ़ैसला सुरक्षित रख लिया. हाई कोर्ट शुक्रवार को अपना फ़ैसला देगा.

गिरफ़्तारी?

उनकी ज़मानत याचिका पर वरिष्ठ अधिवक्ता माजिद मेनन कहते हैं, "गिरफ़्तारी से बचने के लिए तरुण तेजपाल ने अपने पास मौजूद सभी विकल्पों को अपनाया है. उनकी अग्रिम ज़मानत अदालत के सामने है. ऐसे में यदि तेजपाल गोवा पुलिस के सामने पेश होकर उनके सवालों के जवाब देते हैं तो गोवा पुलिस को उन्हें गिरफ़्तार नहीं करना चाहिए क्योंकि उनकी याचिका हाई कोर्ट के सामने अभी लंबित है."

पत्रकारिता, स्टिंग और सेक्स

तहलका
तहलका की प्रबंध संपादक शोमा चौधरी ने गुरुवार को इस्तीफ़ा दे दिया.

माजिद कहते हैं, "लेकिन हमारा सिस्टम ऐसे काम नहीं करता है. बहुत संभावना है कि गोवा पुलिस उन्हें गिरफ़्तार कर ले. यदि गोवा पुलिस ने उन्हें गिरफ़्तार कर लिया तो फिर उन्हें ज़मानत के लिए गोवा में ही अपील करनी होगी. ऐसे में उनके वकील उन्हें गोवा पुलिस के सामने पेश न होने की सलाह दे सकते हैं."

लेकिन यदि तेजपाल पुलिस के समक्ष पेश नहीं होते हैं तो फिर क्या? माजिद मेनन कहते हैं, "यदि तेजपाल पुलिस के सामने पेश नहीं होते हैं तो पुलिस यह दलील दे सकती है कि वे जाँच में सहयोग नहीं कर रहे हैं. सरकारी वकील यह भी कह सकते हैं कि तेजपाल सहयोग नहीं कर रहे हैं और इसलिए उन्हें ज़मानत न दी जाए. ऐसे में उनके लिए परेशानी और बढ़ सकती है."

तेजपाल यदि गोवा पुलिस के समक्ष पेश हुए और उन्हें गिरफ़्तार नहीं किया गया तो उन्हें थोड़ी राहत ज़रूर मिल सकती है. हालाँकि माजिद मेनन इसकी संभावना कम ही मानते हैं. माजिद के मुताबिक़, "यदि उन्हें आज गोवा पुलिस ने गिरफ़्तार नहीं किया तो कल उनके वकील अदालत के सामने ये दलील दे सकते हैं कि वे पुलिस का पूरा सहयोग कर रहे हैं और उन्हें अग्रिम ज़मानत दे दी जाए."

तरुण तेजपाल ने मामले की जाँच को गोवा पुलिस से हस्तांतरित करने की बात भी कही थी. क्या मौजूदा परिस्थिति में ऐसा मुमकिन है.

माजिद मेनन इसे मुश्किल बताते हुए कहते हैं, "यह इतना आसान नहीं है. जब तक अदालत को इस बात से संतुष्ट नहीं कर दिया जाए कि यहाँ पक्षपात हो रहा है और राजनीतिक कारणों से इंसाफ़ नहीं हो पाएगा तब तक जाँच हस्तांतरित होनी मुश्किल है. जाँच अभी शुरुआती दौर में ही है इसलिए यह होता मुमकिन नहीं दिख रहा है."

शोमा चौधरी का तहलका से इस्तीफ़ा

ईमेल

तरुण तेजपाल इस समय क़ानूनी शिकंजे में फँसे नज़र आ रहे हैं. माजिद मेनन इसकी सबसे बड़ी वजह उस ई-मेल को कहते हैं जिसमें उन्होंने घटना में अपनी संलिप्तता स्वीकार की है. वे कहते हैं, "उन्होंने ई-मेल किया है. यह कोई पुलिस के सामने दिया गया बयान नहीं है जिसे बाद में झुठला दिया जाए. यह बयान उन्होंने स्वेच्छा से दिया है इसलिए अब वे इसे झुठला भी नहीं सकते हैं. यह सवाल उठेगा कि यदि उन्होंने गुनाह नहीं किया तो फिर स्वीकारा क्यों?"

लेकिन क्या क़ानूनी तौर पर वे उस ई-मेल में दिए गए अपने बयान को वापस ले सकते हैं? माजिद कहते हैं, "उन्हें क़ानून और देश को समझाना पड़ेगा कि उन्होंने यह बयान क्यों दिया था, जो इतना आसान नहीं है."

तेजपाल अब पीड़ित से अपने पूर्व वार्तालापों का हवाला देकर इसे मर्ज़ी से हुई घटना बताने की कोशिश कर रहे हैं. उन्होंने पीड़िता को कुछ ई-मेल भी भेजे हैं जिनका पीड़िता ने जवाब भी दिया है. क्या क़ानूनी तौर पर यह तेजपाल को मदद कर सकता है.

माजिद मानते हैं कि तेजपाल अपने बचाव में ऐसा कर रहे हैं लेकिन ताज़ा हालात में बचाव के ऐसे तर्कों और तरीक़ों का अदालत में टिक पाना मुश्किल है.

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