BBC navigation

शंकररमण हत्याकांड में कांची के शंकराचार्य बरी

 बुधवार, 27 नवंबर, 2013 को 13:08 IST तक के समाचार
जयेंद्र सरस्वती

पुडुचेरी की एक अदालत ने 2004 के चर्चित शंकररमण क़त्ल मामले में कांची मठ के शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती को आज बरी कर दिया गया.

जयेंद्र सरस्वती और और विजयेंद्र समेत इस मामले में कुल 23 आरोपी थे.

अदालत ने सभी आरोपियों को बरी कर दिया है. अभियुक्तों के अधिवक्ता ने बताया कि सबूत और हत्या का उद्देश्य साबित न होने के आधार पर आरोपियों को बाइज़्ज़त बरी किया है.

शंकराचार्य के वकील सेंथिल नारायणन ने कहा, "जज ने अपने फ़ैसले में कहा कि हत्या का उद्देश्य साबित नहीं किया जा सका. आपराधिक प्रक्रिया संहिता की धारा 120 बी के तहत शंकराचार्य के चेंबर में विजयेंद्र की उपस्थिति में जिस साज़िश का आरोप लगाया है वह भी साबित नहीं हो सका."

नारायणन ने कहा, "शंकराचार्य के चेंबर के नज़दीक मौज़ूद कुछ प्रत्यक्षदर्शी अपनी गवाही से पलट गए और जो अभियोजकों के पक्ष में बोले वे भी अभियोजन का समर्थन नहीं कर सके. इसी आधार पर जज ने सभी आरोपियों को बरी कर दिया."

वकील के मुताबिक़ मृतक की पत्नी पद्मा मुक़दमे की सुनवाई के दौरान अभियुक्तों को पहचानने में असफल रहीं.

नौ साल चले मुक़दमे के बाद पुडुचेरी के प्रधान ज़िला एवं सत्र न्यायाधीश सीएस मुरुगन अपना फ़ैसला सुनाया.

क्लिक करें कांची शंकराचार्य हुए गिरफ़्तार

2005 में विजयेंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि तमिलनाडु का माहौल मामले की निष्पक्ष सुनवाई के लिए अनुकूल नहीं है.

प्रमाण

वरिष्ठ पत्रकार इमरान क़ुरैशी ने बीबीसी को बताया कि शंकररमण की पत्नी, पुत्र और पुत्री आरोपियों की पहचान करने में नाकाम रहे. 20 गवाह ऐसा कोई साक्ष्य नहीं दे पाए कि आरोपी कौन था. 189 में से 89 गवाह आरोपियों के बारे में संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए.

अदालत ने कहा कि जयेंद्र सरस्वती और विजयेंद्र सरस्वती के ख़िलाफ़ कोई पुख्ता प्रमाण नहीं है.

काञ्चीमठ

काञ्ची मठ के प्रबंधक शंकररमन की 2004 में मंदिर में ही हत्या कर दी गई थी.

फ़ैसला सुनाते समय अदालत ने सुप्रीम कोर्ट की उस टिप्पणी का भी ज़िक्र किया जो सर्वोच्च न्यायालय ने शंकराचार्य को ज़मानत देते समय की थी.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि मामले की जांच कर रहे पुलिस अधीक्षक इस मामले में अपने अधिकार क्षेत्र से कहीं अधिक दिलचस्पी ले रहे हैं.

विजयेंद्र की याचिका के बाद सुप्रीम कोर्ट ने मामले का तबादला तमिलनाडु के चेंगलपेट से पुडुचेरी की अदालत में कर दिया था.

मामला

कांचीपुरम के वरदराजापेरुमल मंदिर के प्रबंधक ए शंकररमण की तीन सितंबर 2004 को मंदिर में ही हत्या कर दी गई थी.

इस मामले में कुल 24 लोगों को भारतीय दंड संहिता की विभन्न धाराओं के तहत आरोपी बनाया गया था, जिनमें से जयेंद्र सरस्वती और विजयेंद्र प्रमुख आरोपी थे.

कांची मठ के अन्य प्रबंधक सुंद्रेशन और जयेंद्र सरस्वती के भाई रघु को भी साजिशकर्ता के रूप में आरोपी बनाया गया था.

क्लिक करें कांची शकराचार्य की गिरफ़्तारी से दलित ख़ुश

विजयेंद्र सरस्वती

हत्याकांड में विजयेंद्र सरस्वती को भी मुख्य आरोपी बनाया गया था.

आरोपियों में सह छह लोगों को क़त्ल का आरोपी बनाया गया था जबकि बाक़ियों को अन्य धाराओं के तहत आरोपी बनाया गया था.

एक आरोपी काथीरवन की इसी साल मार्च में चैन्ने के केके नगर में हत्या कर दी गई थी.

गवाही

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़ शंकररमण के बेटे आनंद शर्मा ने हलफ़नामा दायर कर कहा था कि उन्हें फ़ैसला सुनाए जाने से कोई आपत्ति नहीं है.

इसी साल उन्होंने सुनवाई की ऑडियो और वीडियो रिकॉर्डिंग उपलब्ध करवाए जाने की अपनी माँग को भी वापस ले लिया था.

पुडुचेरी के प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश के निर्देशों के बाद विशेष सरकारी अभियोजक ने अदालत में याचिका दायर कर कहा था कि अभियोजन पक्ष और बचाव पक्ष को फ़ैसले से कोई आपत्ति नहीं है.

सुनवाई के दौरान 2009 से 2012 के बीच में 189 गवाहों की गवाही हुई जिनमें से 83 गवाह पलट गए थे.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए क्लिक करें यहां क्लिक करें. आप हमें क्लिक करें फ़ेसबुक और क्लिक करें ट्विटर पर भी फ़ॉलो कर सकते हैं.)

इसे भी पढ़ें

BBC © 2014 बाहरी वेबसाइटों की विषय सामग्री के लिए बीबीसी ज़िम्मेदार नहीं है.

यदि आप अपने वेब ब्राउज़र को अपडेट करते हुए इसे स्टाइल शीट (सीएसएस) के अनुरूप कर लें तो आप इस पेज को ठीक तरह से देख सकेंगे. अपने मौजूदा ब्राउज़र की मदद से यदि आप इस पेज की सामग्री देख भी पा रहे हैं तो भी इस पेज को पूरा नहीं देख सकेंगे. कृपया अपने वेब ब्राउज़र को अपडेट करने या फिर संभव हो तो इसे स्टाइल शीट (सीएसएस) के अनुरुप बनाने पर विचार करें.