रेणु के मैला आँचल की 'कमली' नहीं रहीं

  • 28 नवंबर 2013

मैला आँचल को हिंदी का पहला आंचलिक उपन्यास होने का गौरव प्राप्त है. इस उपन्यास के कई पात्रों के बारे में कहा जाता है वे ऐसे व्यक्तियों के जीवन से प्रभावित थे जो कालजयी साहित्यकार और ‘मैला आँचल’ के उपन्यासकार फ़णीश्वरनाथ रेणु के जीवन के बहुत क़रीब रहे.

इस उपन्यास की एक ऐसी ही पात्र है कमली. कई आलोचकों का मानना रहा है कि मैला आँचल में ममता का किरदार लतिका और कमली का पद्मा रेणु के जीवन पर आधारित है. ग़ौरतलब है कि लतिका फ़णीश्वरनाथ रेणु की तीसरी और पद्मा दूसरी पत्नी थीं. साथ ही पद्मा शब्द पद्म से निकला है जिसका एक अर्थ होता है कमल.

मैला आँचल की उसी ‘कमली’ यानी कि पद्मा रेणु का मंगलवार की शाम निधन हो गया. वह 82 वर्ष की थीं. उन्होंने अंतिम सांस रेणु के पैतृक गांव बिहार के अररिया ज़िला स्थित औराही हिंगना में ली.

रेणु के जीवन में पद्मा के योगदान को रेखांकित करते हुए हिंदी के आलोचक रामवचन राय ने कहा कि वह बहुत कर्मठ महिला थीं और एक संगिनी और सहधर्मी के रूप में उन्होंने रेणु की ग्रामीण चेतना को समृद्ध करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.

बाल-विधवा थीं पद्मा

रेणु एक कृषक परिवार से आते थे और उनका परिवार भी बहुत बड़ा था. उनको आठ संतानें थीं. पद्मा ने न सिर्फ़ सभी बच्चों के लालन-पालन से रेणु को मुक्त कर दिया था बल्कि खेती-गृहस्थी भी संभाल ली थी.

पद्मा बाल-विधवा थीं. रेणु से विवाह के बाद उन्हें बहुत प्रेम और सम्मान मिला. इतना कि उन्होंने तब भी कोई शिकायत नहीं कि जब रेणु ने पटना में लतिका से चुपचाप शादी कर ली थी. पद्मा ने कभी कोई शिकायत नहीं की, झगड़ा नहीं किया. वह जीवनपर्यंत रेणु की सहयोगी रहीं. लतिका रेणु का निधन 15 जनवरी, 2011 को हो गया था.

फणीश्वर नाथ की दूसरी पत्नी पद्मा रेणु और तीसरी पत्नी लतिका रेणु में हमेशा प्रेम बना रहा.

पद्मा की इस ख़ूबी का महत्व कवि आलोक धन्वा ने इस रूप में रेखांकित किया कि पारिवारिक चिंताओं और कलह से मुक्त हुए बग़ैर रचनाकर्म संभव ही नहीं है और पद्मा ने रेणु को ऐसी हर उलझन से दूर रखा.

धन्वा के अनुसार पद्मा से प्रेम के कारण ही रेणु का ग्रामीण परिवेश से जीवंत रिश्ता बना रहा और परिणाम यह हुआ कि उनकी रचनाओं में देशज संवेदनाएं गहराई से उभरीं.

ग़ौरतलब है कि रेणु ने तीन शादियां की थीं. पद्मा उनकी दूसरी पत्नी थी. 1950 के आस-पास रेणु और पद्मा का विवाह हुआ था. जानकार बताते हैं कि पहली पत्नी रेखा जब शादी के कुछ सालों बाद ही लकवाग्रस्त होकर मृत्युशैय्या पर चली गईं थीं तो उन्होंने पद्मा से विवाह किया था.

रेणु ने तीसरी शादी लतिका से 1954 में की थी. लतिका तब रेणु की संपर्क में आई थीं जब वे पीएमसीएच में फेफड़े की गंभीर बीमारी का इलाज करा रहे थे.

रेणु का ख्याल

पद्मा और रेणु के पुत्र पद्म पराग राय वेणु ने अपनी मां की यादों को संजाते हुए कहा, "गांव में बिजली नहीं थी. पिताजी जब गांव में रहते थे तो मां इस बात का ख़ास ख़्याल रखती थीं कि वे पर्याप्त रोशनी में निश्चिंत होकर लिखें. इसके लिए शाम होते ही मां पेट्रोमैक्स जलवा देती थीं और पिताजी के बिस्तर पर मच्छरदानी लगाना नहीं भूलती थीं."

इस तरह देखा जाए तो पद्मा जिन भौतिक साधनों के सहारे रेणु का ख़्याल रखती थीं उनका संबंध कहीं-कहीं से रेणु के रचनाकर्म से भी दिखता है. ग़ौरतलब है कि रेणु की एक प्रसिद्ध कहानी ‘पंचलैट’ है जिसका हिंदी तर्जुमा होता है पेट्रोमैक्स और उपन्यास ‘मैला आँचल‘ एक मलेरिया पीड़ित क्षेत्र को आधार बना कर लिखा गया उपन्यास है.

पद्मा को रेणु के साहित्य के ख़ज़ाने में क्या सबसे पसंद था, इस के जवाब में वेणु ने बताया कि वह चूंकि निरक्षर थीं इसलिए हम ही उन्हें रचनाएं पढ़कर सुनाते थे. उन्हें कहानी ‘समदिया’ अपने दिल के बहुत क़रीब लगती थीं.

रेणु के पुत्र वेणु वर्तमान में फ़ॉरबिसगंज के विधायक हैं. 2010 में उन्होंने भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ा था.

चेतना से लैस

रेणु के साहित्यिक अवदान में पद्मा की अहमियत को फ़णीश्वरनाथरेणु.कॉम के मोडरेटर अनंत ने कुछ इस तरह रेखांकित किया, "पद्मा रेणु के जीवन की अचर्चित पात्र रहीं. उन्होंने रेणु को संघर्ष के लिए प्रेरित करते हुए पारिवारिक ज़िम्मेवारियों से मुक्त रखा. उन्होंने सांसारिक जवाबदेही को गृहस्थ रेणु के रचना और राजनीतिक कर्म के पावों की ज़ंजीर नहीं बनने दिया."

रेणु रचनावली के संपादक अैर हिंदी साहित्यकार भरत यायावर के शब्दों में, "पद्मा साध्वी महिला और कुशल गृहिणी थीं. पढ़ी-लिखीं नहीं होने के बावजूद चेतना से लैस थीं."

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