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आधे सबूतों पर ही मिल जाएगी रिहाई: रेबेका

 मंगलवार, 26 नवंबर, 2013 को 11:32 IST तक के समाचार
नूपुर और राजेश तलवार

आरुषि हत्याकांड में दोषी पाए गए राजेश और नूपुर तलवार की वकील का मानना है कि अगर क्लिक करें हाईकोर्ट में मामले की ठीक से सुनवाई हो, तो मौजूदा सबूतों में से आधे सबूतों के आधार पर ही उनके मुवक्किल रिहा हो सकते हैं.

यह बात रेबेका जॉन ने मंगलवार को मामले में अदालत के सज़ा सुनाने से पहले बीबीसी से एक बातचीत में कही.

सोमवार, 25 नवंबर को सीबीआई की एक विशेष अदालत ने राजेश तलवार और क्लिक करें नूपुर तलवार को अपनी बेटी आरुषि की हत्या का दोषी पाया था जिसके बाद तलवार दंपति को हिरासत में लेकर डासना जेल भेज दिया गया था.

तलवार दंपति ने विशेष अदालत के फ़ैसले के ख़िलाफ़ हाईकोर्ट में अपील करने की बात कही है.

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'सीबीआई ने घपला किया'

मंगलवार को रेबेका जॉन ने सज़ा के बारे में अदालत में बहस से पहले कुछ भी कहने से इनकार कर दिया.

फ़ैसले के खिलाफ़ हाईकोर्ट जाने के बारे में उन्होंने कहा, "हमें पूरा विश्वास है और सबूत हैं. किसी ने भी सबूतों की फ़ाइल नहीं पढ़ी है, हमें पता है कि सबूत क्या हैं, हमने फ़ाइल पढ़ी है. हमें पता कि इस मामले में सबूत किस ओर इशारा करते हैं. हमें पता है कि सीबीआई ने कितना घपला किया है."

"अगर कोई सुनने को तैयार हो तो जो सबूत हैं, उससे आधे सबूतों के आधार पर ही हमें (राजेश और नूपुर तलवार को) रिहाई मिल जाएगी."

रेबेका जॉन, तलवार दंपति की वकील

रेबेका जॉन ने आगे कहा, "हम जो सबूत विशेष अदालत में लाना चाहते थे वो सीबीआई ने मना करवा दिया तो इसके बाद कोई नया सबूत हमारे पास नहीं है. लेकिन जो सबूत अदालत में दर्ज हैं वो सिर्फ़ और सिर्फ़ सीबीआई की कल्पेबिलिटी या दोष दिखाते हैं. अगर कोई सुनने को तैयार हो, तो जो सबूत हैं, उससे आधे सबूतों के आधार पर ही हमें (राजेश और नूपुर तलवार को) रिहाई मिल जाएगी."

लेकिन सीबीआई के वकील आरके सैनी मानते हैं कि सीबीआई का केस काफ़ी मज़बूत है हालांकि जांच संस्था का मामला क्लिक करें सर्कमस्टेंशियल एविडेंस यानी परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर आधारित है.

सवालों के घेरे में

सोमवार को फ़ैसले के बाद आर के सैनी ने बताया था, "अदालत ने कहा कि परिस्थितियों के मुताबिक़ इस अपराध को अंजाम देने के लिए वहां कोई दूसरा मौजूद नहीं था."

आरुषि तलवार और उनकी दोस्त

आरुषि और हेमराज की हत्या 15-16 मई 2008 को की गई थी.

ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि हाईकोर्ट में यह फ़ैसला कितना टिक पाएगा.

इस बारे में सीबीआई सैनी आरके सैनी ने कहा, "अभियोजन के हिसाब से बहुत अच्छा केस है. उसके बाद भी ये लोग (तलवार दंपति) हर छोटी-मोटी चीज़ के लिए हाईकोर्ट-सुप्रीम कोर्ट तक गए हैं लेकिन इन्हें कहीं कोई राहत नहीं मिली. अब सभी हालात इस ओर इशारा करते हैं कि इनके अलावा और कोई हत्या नहीं कर सकता था इसलिए मेरे हिसाब से हाईकोर्ट में हमारा केस मज़बूत है."

इस मामले में शुरू में डॉक्टर तलवार के एक सहायक और उनके जानने वालों के घर काम करने वाले दो नौकरों समेत तीन्य अन्य लोगों को गिरफ़्तार किया था हालांकि उन्हें बाद में छोड़ दिया गया.

मुआवज़े की मांग

फ़ैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए इन तीनों -कृष्णा, राजकुमार और विजयमंडल-और मृतक हेमराज की पत्नी की ओर से केस लड़ने वाले वकील नरेश यादव ने कहा, "मैं तो यह चाहूंगा कि इन लोगों को फांसी की सज़ा हो क्योंकि इन्होंने सिर्फ़ दो लोगों की हत्या ही नहीं की बल्कि तीन और लोगों को फांसी पर चढ़वाने के भरसक प्रयास किए."

"वह (हेमराज की पत्नी) न्याय चाहती हैं और न्याय तब मिलेगा जब हेमराज के परिवार को मुआवज़ा मिले क्योंकि उनकी मौत हुई है. केवल दोषियों को सज़ा हो जाने से ही मात्र न्याय नहीं होता."

नरेश यादव, हेमराज के वकील

नरेश यादव के मुताबिक़ फ़िलहाल राजकुमार, कृष्णा और हेमराज की पत्नी नेपाल में हैं जबकि विजयमंडल बिहार में हैं और उनका इन लोगों के साथ फ़ोन पर संपर्क रहता है.

नरेश यादव ने यह भी कहा कि हेमराज की पत्नी मुआवज़ा चाहती हैं. उन्होंने बताया, "वे न्याय चाहती हैं और न्याय तब मिलेगा जब हेमराज के परिवार को मुआवज़ा मिले क्योंकि उनकी मौत हुई है. केवल दोषियों को सज़ा हो जाने से मात्र से न्याय नहीं होता."

16 मई, 2008 को 14 साल की आरुषि की हत्या तलवार दंपति के नोएडा स्थित घर में हो गई थी. शुरुआत में सबका शक नौकर हेमराज पर गया, लेकिन बाद में हेमराज का शव भी घर की छत पर मिला था.

आरुषि की हत्या का आरोप सबसे पहले पिता राजेश तलवार पर लगा था और हत्या के एक हफ़्ते बाद ही उत्तर प्रदेश पुलिस ने पहले उन्हें गिरफ्तार किया और फिर रिहा कर दिया. इस मामले में डॉक्टर तलवार के एक सहायक और उनके जाननेवालों के घर काम करने वाले दो नौकरों समेत तीन अन्य लोगों को भी हिरासत में लिया गया था और फिर छोड़ दिया गया.

बाद में उत्तर प्रदेश पुलिस के काम के तरीक़े पर काफी हंगामा मचा और फिर प्रदेश की तत्कालीन मायावती सरकार ने यह मामला सीबीआई को सौंप दिया. पांच साल से ज़्यादा समय चले इस मामले में आखिर विशेष अदालत ने सोमवार 25 नवंबर को तलवार दंपति को दोषी क़रार दिया.

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