'तरुण का तहलका' उर्दू अख़बारों की सुर्खियों में

  • 24 नवंबर 2013
तरुण तेजपाल

पाकिस्तान के उर्दू अखबारों ने जहां लगातार जारी ड्रोन हमले, रावलपिंडी में दंगे और देश के सामने मौजूद सुरक्षा चुनौतियों का जिक्र किया गया है, वहीं कई भारतीय उर्दू अखबारों ने तहलका पत्रिका के संपादक पर लगे यौन उत्पीड़न के आरोपों पर बेबाकी से लिखा है.

दैनिक इंक़लाब का संपादकीय है 'तरुण का तहलका.'

अखबार के मुताबिक तहलका का कहना है कि तेजपाल ने पीड़ित महिला पत्रकार से माफी मांग ली है और प्रायश्चित के तौर पर संपादक का पद भी छोड़ दिया है, लेकिन जो बातें सामने आ रही हैं उनसे लगता है कि ये सिर्फ लीपापोती थी ताकि यौन उत्पीड़न का ये मामला दफ्तर की चारदीवारी से निकल दुनिया और देश की जनता तक न पहुंचे.

'भारत ने क्यों वीज़ा दिया?'

लेकिन अखबार ने लिखा है जिन दीवारों के पहले कान होते थे अब उनके हाथ भी होने लगे हैं और उन्हीं हाथों से लिखी ईमेल ने दफ्तर तक सीमित नही रह गई और देखते ही देखते ये मुद्दा मीडिया और सोशल मीडिया की सबसे बड़ी हलचल बन गया.

मोदी की मुश्किलें

नरेंद्र मोदी, अमित शाह

दैनिक अखबार-ए-मशरिक ने लिखा है कि तहलका मचाने वाले संपादक खुद अपने जाल में फंस गए हैं. उन्हें देश के कानून के मुताबिक सजा मिलनी चाहिए.

अखबार ने राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष ममता शर्मा के इस बयान का भी जिक्र किया है कि तरुण तेजपाल कोई देवता नहीं हैं कि उन्होंने अपनी सजा खुद तय करते हुए संपादक का पद छोड़ दिया है. वहीं एडिटर्स गिल्ड ने भी आरोपों को गंभीर मानते हुए इनकी पूरी जांच की मांग की है.

90 फीसदी परमाणु हथियार अलर्ट

दैनिक सहाफत ने अपने संपादकीय में कहा है कि गुजरात के जासूसी कांड ने मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. बीजेपी ने मोदी का बचाव करते हुए कहा कि मोदी की लोकप्रितया और प्रधानमंत्री पद पर दावेदारी की वजह से उन्हें नाहक इस मामले में घसीटा जा रहा है जबकि कांग्रेस इस मुद्दे को मोदी को घेरने का शानदार मौका मान रही है.

अखबार कहता है कि एक युवती की निगरानी करने से जुड़े इस पूरे मामले से सवाल उठता है कि क्या सत्ता में बैठे लोग इसी तरह ताकत का इस्तेमाल करेंगे जैसे वो उनकी जागीर हो. इन सवालों का जवाब देकर राज्य सरकार शक और संदेहों को दूर कर सकती है. कांग्रेस पर जबावी हमाला करने से ये शक दूर नहीं होगा.

क्षेत्रीय सुपर पावर

पाकिस्तान

जिक्र पाकिस्तानी अखबारों का करें तो दैनिक औसाफ ने अपने संपादकीय में लिखा है कि अमरीका दक्षिण एशिया में भारत को सुपरपावर बनाना चाहता है. अमरीका समझता है कि भारत की सैन्य ताकत अमरीकी हितों की रखवाली करेगी.

अखबार के मुताबिक भारत को क्षेत्रीय सुपर पावर बनाने की राह में जो भी चुनौतियां हैं, अमरीका उन्हें दूर करने में लगा है.

तरुण तेजपाल के खिलाफ एफआईआर

इन्हीं कोशिशों के तहत अमरीका एक तरफ पाकिस्तान में अशांति पैदा कर रहा है ताकि उसके परमाणु हथियारों को संयुक्त राष्ट्र या किसी अन्य संस्था के हाथों में देने की हालात पैदा किए जा सकें. दूसरा, पाकिस्तान के नीति निर्माता भी अमरीका से गुपचुप डील कर राष्ट्र पर थोप देते हैं, जिससे हालात और खराब होते हैं.

कुछ इसी तरह की बातें दैनिक आजकल में छपे कार्टून से उभरती है जिसमें आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई को एक अजगर के तौर पर दिखाया गया है जो अफगानिस्तान से पाकिस्तान की तरफ बढ़ रहा है.

और कोई वादा

पाकिस्तान में ड्रोन हमलों का विरोध

जंग ने अपने संपादकीय में लिखा है कि तालिबान से बातचीत की प्रक्रिया के दौरान ड्रोन हमले न करने के अमरीकी वादे के बारे में विदेश मामलों के सलाहकार सरताज अजीज के बयान की स्याही अभी सूखी भी नहीं थी कि अमरीका ने गुरुवार की सुबह एक मदरसे को ड्रोन हमले में निशाना बना दिया.

एक बार फिर पाकिस्तान ने इसे अपनी संप्रभुता का उल्लंघन बताते हुए इन्हें तुरंत बंद करने की मांग कर दी.

अखबार लिखता है कि ब्रिटेन और फ्रांस समेत अंतरराष्ट्रीय समुदाय इन हमलों के खिलाफ है. लेकिन अमरीका अपने रुख से टस से मस नहीं होता है.

दैनिक औसाफ ने इसी मुद्दे पर कार्टून बनाया है जिसमें सरताज अजीज के हाथों में फोन लगा है और वो कह रहे हैं कि ओबामा साहब पूछ रहे हैं कि कोई और वादा तो नहीं करना है.

दैनिक इंसाफ ने पिछले दिनों रावलपिंडी में हुए दंगों पर लिखा है कि पंजाब पुलिस के आईजी ने माना कि सूबाई पुलिस की नाकामी की वजह से ये दंगा फैला जिसमें 11 लोग मारे गए और 56 घायल हो गए.

प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने कहा कि लापरवाही बरतने वाले पुलिस अफसरों के सिर्फ तबादलने नहीं होने चाहिए बल्कि उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई भी होनी चाहिए.

अखबार के मुताबिक इस दौरान लाउडस्पीकरों के जरिए भड़काऊ भाषण और सोशल मीडिया के जरिए नफरत फैलाने को मामले भी देखने को मिले जिन पर सभी प्रांतीय सरकारों को काबू करने की जरूरत है.

निवेश

पाकिस्तान कराची

दैनिक खबरें ने निवेशकों को आकर्षित करने की पाकिस्तान की सरकार की कोशिशों पर लिखा है कि बेशक पाकिस्तान में निवेश के भरपूर मौके हैं और विदेश निवेशक यहां पैसा लगाने की इच्छा भी रखते हैं लेकिन वो कानून व्यवस्था की खराब हालत को देखते हुए यहां आने से कतराते हैं.

अखबार लिखता है कि देश की व्यापारिक राजधानी कराची में आए दिन होने वाले खून खराबे की वजह से ही देशी और विदेशी निवेशक अपना कारोबा समेट कर दुबई और बांग्लादेश शिफ्ट हो चुके हैं.

इसलिए जब तक सरकार निवेशकों को सुरक्षा देने के जुबानी जमा खर्च करने के बजाय ठोस कदम नहीं उठाएगी, उस वक्त तक निवेशकों को लुभाने की कोशिशों का कोई नतीजा नहीं निकलेगा.

दैनिक दुनिया ने अपने पहले पन्ने पर खबर दी है- "नरेंद्र को वीजा न देने का प्रस्ताव अमरीकी प्रतिनिधि सभा में पेश."

खबर के अनुसार डेमोक्रेटिक और रिपब्लिकन दोनों ही पार्टियों के सांसदों ने कहा है कि भारतीय जनता पार्टी की तरफ से प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी ने धार्मिक स्वतंत्रता का उल्लंघन किया है, इसलिए उन्हें अमरीका आने की अनुमति न दी जाए.

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