ज्योतिरादित्य सिंधिया: 'कांग्रेस के आखिरी मोहरे'

  • 20 नवंबर 2013
ज्योतिरादित्य सिंधिया कांग्रेस मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव

केंद्रीय राज्य मंत्री और मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में कांग्रेस प्रचार अभियान समिति के अध्यक्ष ज्योतिरादित्य सिंधिया के मंगलवार को ग्वालियर में हुए रोड शो में भीड़ तो जुटी, लेकिन यह सवाल भी उठा कि क्या वे इस भीड़ को वोट में तब्दील करा पाएंगे.

रोड शो के दौरान गलियों के दोनों तरफ़ घरों की छतों से उन पर फूल बरस रहे थे और क्या बच्चे-क्या बुज़ुर्ग सभी ज्योतिरादित्य सिंधिया को देखने के लिए बेताब थे.

ग्वालियर में ज्योतिरादित्य सिंधिया के प्रभाव को शायद उनके राजनीतिक विरोधी भी नहीं नकारेंगे.

इसका एक कारण उनका सिंधिया राजघराने से जुड़ा होना है. सवाल है कि क्या ज्योतिरादित्य केवल अपने प्रभाव से इस बार कुछ ऐसा कर पाएंगे कि पिछले दो बार से राज्य में सत्ता पर काबिज़ भारतीय जनता पार्टी को हटा सकें.

चेहरों की जंग

मध्यप्रदेश से निकलने वाले सांध्य दैनिक प्रदेश टुडे के संपादक राकेश पाठक कहते हैं कि ज्योतिरादित्य सिंधिया के आने का असर पूरे प्रदेश पर पड़ेगा.

पाठक के मुताबिक़ तीन महीने पहले तक लग रहा था कि कांग्रेस ने भाजपा को वॉक ओवर दे दिया है लेकिन ज्योतिरादित्य के आने के बाद कांग्रेस एक बार फिर लड़ाई में शामिल हो गई है.

उनका कहना है, "केवल ज्योतिरादित्य के कारण कांग्रेस के वोट शेयर में दो-ढाई फ़ीसदी की बढ़ोत्तरी होगी. यह चुनाव मुद्दाविहीन चुनाव है और मूलत: व्यक्तित्वों का चुनाव है."

वे कहते हैं, ''वह एक आकर्षक चेहरा हैं, बहुत अच्छे वक्ता हैं और उनकी बेदाग़ छवि है.''

पाठक के मुताबिक़ सिंधिया के अलावा कांग्रेस के पास कोई विकल्प था नहीं. इसीलिए कांग्रेस उन्हें आख़िरी मोहरे के रूप में सामने रखकर लड़ाई लड़ने जा रही है.

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पाठक कहते हैं, "सिंधिया राजघराने का असर ग्वालियर से लेकर मालवा तक सीधा दिखता है. उज्जैन, इंदौर, मंदसौर तक भी इनके समर्थक चुनावों में विजयी होते रहे हैं."

उनके अनुसार ज्योतिरादित्य की निजी छवि के कारण भोपाल के इलाक़े में भी उन्हें कुछ वोट मिल सकते हैं.

जीवाजी यूनिवर्सिटी में राजनीतिशास्त्र पढ़ाने वाले प्रोफ़ेसर एपीएस चौहान भी इस बात को मानते हैं. उनके मुताबिक़ ज्योतिरादित्य की चुनावी सभाओं में जो भीड़ जुट रही है, वह कांग्रेस के लिए काफ़ी उत्साहवर्धक है.

ग्वालियर के वरिष्ठ पत्रकार और साहित्यकार राकेश अचल की भी राय क़रीब यही है कि ज्योतिरादित्य के सामने आने से कांग्रेस को लाभ मिल रहा है.

कांग्रेस के हमले तेज़

अचल के अनुसार शिवराज सरकार के दौरान जो घोटाले और भ्रष्टाचार हुए, उन पर हमले करने और चुनावों में उसका राजनीतिक लाभ उठाने में कांग्रेस अब तक असफल रही थी.

मगर ज्योतिरादित्य के प्रचार अभियान समिति का अध्यक्ष बनाए जाने के बाद शिवराज सरकार पर कांग्रेस की तरफ़ से हमले तेज़ हुए हैं.

राकेश अचल कहते हैं, "सबसे बड़ा फ़ायदा कांग्रेस को यह मिल रहा है कि युवाओं का बड़ा हिस्सा ज्योतिरादित्य के कारण कांग्रेस से जुड़ रहा है.''

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वह कहते हैं कि शिवराज सरकार ने ढेरों योजनाओं की घोषणा की थी लेकिन उनके लागू होने में विफलता के कारण लोगों में असंतोष है. कांग्रेस अब उस असंतोष को चुनावी मुद्दा बनाकर उसका लाभ लेने की कोशिश में है.

हालांकि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान कहते हैं कि पहले कांग्रेस यह तो तय कर ले कि उनका मुख्यमंत्री कौन होगा. ख़ुद को मुख्यमंत्री का दावेदार बताते हुए कई लोग इलाक़ों में घूम रहे हैं.

ज्योतिरादित्य के बढ़ते असर पर ग्वालियर के एक भाजपा कार्यकर्ता का कहना था कि ज्योतिरादित्य के आने से प्रभाव तो पड़ा है, लेकिन उतना नहीं, जितना पड़ना चाहिए था. वह कहते हैं कि माधवराव सिंधिया की बात अलग थी, उतना दम ज्योतिरादित्य में नज़र नहीं आता.

सीटें बढ़ने की उम्मीद

ग्वालियर-चंबल संभाग में विधानसभा की 34 सीटें हैं. मौजूदा विधानसभा में कांग्रेस के पास 13 और भाजपा के पास 17 सीटें हैं.

ज़्यादातर राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि इस बार कांग्रेस की सीटों में निश्चित तौर पर इज़ाफ़ा होगा.

लेकिन गुटबाज़ी के लिए मशहूर मध्य प्रदेश कांग्रेस के कार्यकर्ताओं में ज्योतिरादित्य कितना जोश भर पाएंगे, यह 25 नवंबर को ही पता चलेगा और आठ दिसंबर को नतीजे सबके सामने होंगे.

राकेश पाठक के मुताबिक़, ''कांग्रेस की स्थिति इस पर निर्भर करेगी कि स्थानीय स्तर पर कांग्रेसी प्रत्याशी कितनी मेहनत करते हैं और कांग्रेस के सात बड़े नेताओं की अभी नज़र आ रही एकता आगे कितने दिन टिक पाती है.''

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