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इस बार नहीं माने हाथी और ले ही गए जान

 गुरुवार, 14 नवंबर, 2013 को 01:12 IST तक के समाचार
निर्मला अपने पिता मारिनस के साथ

उत्पाती हाथियों से बात करके उन्हें शांत करने में माहिर समझी जाने वाली किशोरी निर्मला टोप्पो के पिता को हाथियों ने अपने पैरों तले कुचलकर जान से मार दिया है. ये घटना ओडिशा के सुंदरगढ़ ज़िले की है.

सुंदरगढ़ ज़िले के बिरमित्रापुर इलाके में बुधवार देर शाम हाथियों के झुंड ने निर्मला और उसके पिता मारिनस टोप्पो पर हमला किया.

निर्मला और मारिनस को गांव वालों ने ऊधम मचा रहे हाथियों को खदेड़ने के लिए बुलाया था.

लेकिन इस बार दांव उल्टा पड़ा और हाथियों ने दोनों की एक नहीं सुनी. हिंसक हाथियों ने मारिनस को अपने पैरों के नीचे कुचल दिया. मारिनस ने घटनास्थल पर ही दम तोड़ दिया.

सुंदरगढ़ में रहने वाले सामाजिक कार्यकर्ता रवि प्रधान ने इस घटना पर अफ़सोस ज़ाहिर करते हुए कहा, ''क़ाश हाथी इंसानों की ज़ुबान वाकई समझ पाते.''

हाथी भगाने का मेहनताना

ओडिशा का वन विभाग हाथियों को भगाने के लिए निर्मला की सेवाएं लेता है.

इस साल जब राऊरकेला स्टेडियम में हाथी उत्पात मचा रहे थे, तब वन विभाग ने उन्हें खदेड़ने के लिए निर्मला को उसके दलबल के साथ बुलाया था.

निर्मला के दल में उसके पिता मारिनस सहित दस लोग थे जो बिरमित्रापुर इलाके से हाथियों को भगा रहे थे. लेकिन इस बार हाथी मानों बदला लेने के इरादे से आए थे.

निर्मला की आयु 14 वर्ष है जिसे ओडिशा और झारखंड में तब याद किया जाता है जब हाथी गांवों में घुसकर हिंसक हो जाते हैं.

कई लोग निर्मला की हाथियों से बात करने के हुनर पर यकीन करते हैं. लेकिन ऐसे भी लोग हैं जो इस पर सवाल उठाते हैं.

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