छत्तीसगढ़: 67 फ़ीसदी मतदान, लैंडमाइन ब्लास्ट

  • 11 नवंबर 2013
छत्तीसगढ़, बारूदी सुरंग

छत्तीसगढ़ में पहले चरण में 18 सीटों पर मतदान ख़त्म हो गया है.

मुख्य चुनाव अधिकारी संजय कुजूर ने बताया है कि राज्य में हुए पहले चरण के चुनाव में 67 फ़ीसदी मतदान हुआ. सबसे कम मतदान नक्सल प्रभावित इलाक़े बीजापुर में 24 फीसदी हुआ है.

दंतेवाड़ा में कथित नक्सलियों के साथ गोलीबारी में एक सीआरपीएफ़ जवान की मौत हो गई. इसी घटना में दो और जवानों के ज़ख़्मी होने की ख़बर है जिन्हें जगदलपुर के अस्पताल ले जाया गया है.

इसके अलावा चुनाव के दौरान दंतेवाड़ा के इलाक़ों से 4-5 बारूदी सुरंगों के विस्फोट की ख़बर है. हालांकि अभी किसी के हताहत होने का पता नहीं चला है.

एक अन्य बीएसएफ़ जवान के घायल होने की भी ख़बर है. कई जगहों पर माओवादियों ने मतदान केंद्रों पर गोलियां भी चलाईं.

हिंसा की घटनाएँ

छत्तीसगढ़ में सोमवार को 18 सीटों पर मतदान हुआ है. पहले चरण के चुनाव में जिन 18 सीटों पर मतदान हुआ, उनमें से 12 बस्तर और छह राजनांदगांव की हैं. ये सभी सीटें बेहद संवेदनशील हैं.

इन पर 145 उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं. इनमें से कोंटा सीट पर सबसे कम चार और राजनांदगांव और जगदलपुर सीटों पर 14-14 उम्मीदवार हैं.

13 सीटों पर मतदान सुबह सात बजे से दोपहर तीन बजे हुआ. वहीं पांच सीटों पर सुबह आठ बजे से शाम चार बजे तक मतदान हुआ है.

सुरक्षाबलों और चुनाव में जुटे सरकारी अधिकारियों के मुताबिक सबसे बड़ी चुनौती वोटिंग मशीनों को सुरक्षित मतगणना केंद्रों तक पहुंचाना है. अधिकारियों के मुताबिक़ मशीनें लूटने की सबसे अधिक घटनाएं इसी वक़्त होने की आशंका रहती है.

इस चुनाव में पहली बार लोगों को ये विकल्प मिला कि वे किसी भी उम्मीदवार को वोट न दें.

अधिकारियों का कहना है कि माओवादियों ने मतदानकर्मियों और सुरक्षाबलों पर हमला करने की नीयत से ऐसा किया है, ताकि चुनाव कराने में बाधा पहुंचे.

जहां नहीं चलती सरकार की हुकूमत

माओवादियों ने चुनाव बहिष्कार का आह्वान किया था, जिस वजह से बस्तर और राजनांदगांव के सुदूर जंगली इलाकों में चुनाव प्रचार भी नहीं हो पाया.

राज्य के सबसे संवेदनशील सुकमा ज़िले के दोरनापाल में तैनात पुलिस अधिकारी विनय सिंह बघेल ने बीबीसी को बताया कि बारूदी सुरंगों के अलावा माओवादियों ने पूरे इलाके में कई जगहों पर 'बूबी ट्रैप' भी लगा रखे हैं ताकि मतदान केंद्रों तक जाने वाले जवानों और अन्य सरकारी कर्मचारियों पर हमला किया जा सके.

विनय सिंह बघेल का कहना है, "कई स्थानों पर हमने 'बूबी ट्रैप' नष्ट किए हैं. इस इलाक़े में इससे पहले इतनी तादाद में इस तरह के जाल पहले कभी नहीं बिछाए गए थे. इनकी वजह से हमारा काम और ज़्यादा जोख़िम भरा हो गया है."

'बूबी ट्रैप'

चुनावकी घोषणा के बाद से ही पुलिस ने बारूदी सुरंगों को निष्क्रिय करने का अभियान चलाया हुआ है.

विनय सिंह बघेल, पुलिस
बघेल का कहना है कि जवानों और वोटरों को मतदान केंद्र तक जाने से रोकने के लिए बूबी ट्रैप लगाए गए हैं

इस अभियान के दौरान सिर्फ़ बस्तर के अलग अलग इलाकों से कई क्विंटल बारूदी सुरंगें बरामद की गईं हैं.

अब तक जिन इलाकों से बड़ी संख्या में इस तरह की सुरंगें बरामद की गई हैं, उनमें सुकमा, दंतेवाड़ा और एजापुर के इलाक़े शामिल हैं.

'पहले चरण में 15 उम्मीदवार दाग़ी'

नक्सल प्रभावित इलाकों में चुनाव कराने के लिए सीआरपीएफ़ की 507 कंपनियों और राज्य पुलिस की तैनाती की गई. इसके अलावा अलग-अलग जगहों पर 15 हेलिकॉप्टर तैनात किए गए थे.

बम बरामद

मतदान कर्मियों के दल की रवानगी से पहले रविवार शाम दंतेवाड़ा और मंगनार की सड़क पर से अर्ध सैनिक बलों और ज़िला पुलिस के जवानों ने 20-20 किलो के दो ताकतवर बम बरामद किए.

इन बमों को सड़क के नीचे छुपा कर रखा गया था ताकि वहां से गुजरने वाले वाहनों को उड़ाया जा सके. देर रात सुकमा के मरतोंडा गाँव की तरफ जाने वाले मतदान कर्मियों को बारूदी सुरंगों और 'बूबी ट्रैप' की वजह से लौटना पड़ा.

बस्तर में नक्सल विरोधी अभियान का नेतृत्व कर रहे अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सुरजीत अत्री के अनुसार माओवादियों ने विस्फोटक लगाने की अपनी तकनीक को काफी बदला है जिस कारण बारूदी सुरंग निरोधक वाहन भी अब ज्यादा कारगर साबित नहीं हो पा रहे हैं.

नुकसान

बस्तर में बारूदी सुरंगों के विस्फोट की वजह से सुरक्षा बलों को सबसे ज्यादा नुकसान उठाना पड़ा है.

सुरजीत अत्री का कहना था, "हम लगातार इन सुरंगों को निष्क्रिय करने का अभियान चलाते हैं. सभी जवानों को ये हिदायत दी गई है कि वो संवेदनशील इलाकों में पैदल ही सफ़र करें और जहां तक हो सके वाहन पर न चलें."

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि अलग-अलग स्थानों पर माओवादियों ने अलग अलग तरह के विस्फोटक लगाए हैं. कहीं पर 'प्रेशर माइन' भी हैं जो ज्यादा खतरनाक हैं.

पुलिस महकमे के सामने परेशानी यह है कि उनके पास कोई ऐसा उपकरण नहीं है जिससे बारूदी सुरंगों का पता लगाया जा सके यही वजह है कि इसमें कभी-कभी बड़ी चूक भी हो जाती है.

नारायणपुर के पाखनजूर इलाके में एक प्रेशर माइन फटने से एक बीएसएफ़ जवान के घायल होने की ख़बर है. पाखनजूर के कोलीबेड़ा में माओवादियों ने एक मतदान केंद्र पर बूथ लेवल ऑफ़िसर से मारपीट की और मतदान सामग्री लूट कर ले गए.

वहीं माओवादियों ने मतदान में व्यवधान पहुंचाने के लिए इंद्रावती नदी में छह नावों को डुबो दिया.

चुनाव आयोग ने दूरदराज़ के इलाकों में होने की वजह से 167 मतदान केंद्रों को बदल दिया है.

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