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ऐसे बढ़ी कहानी
काश! पटेल देश के पहले प्रधानमंत्री होते: मोदी

 मंगलवार, 29 अक्तूबर, 2013 को 19:40 IST तक के समाचार
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  1. प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी सरदार वल्लभ भाई पटेल की याद में अहमदाबाद में बनाए गए एक संग्रहालय के उद्घाटन समारोह में हिस्सा लेंगे. लेकिन सरदार पटेल की विरासत को लेकर दोनों पार्टियों में ज़ुबानी जंग शुरू हो गई है. हम आपके लिए लेकर आए हैं विशेष पेशकश. आपके साथ मैं हूँ पंकज प्रियदर्शी और मेरा साथ देंगे नितिन श्रीवास्तव और वंदना.

  2. अहमदाबाद में मनमोहन-मोदी होंगे एक मंच पर

    तेज़ी से गर्म होते चुनावी पारे के बीच प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और भारतीय जनता पार्टी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी मंगलवार को अहमदाबाद में एक मंच पर दिखेंगे.

  3. गुजरात के मुख्यमंत्री होने के नाते या उनके भीतर जो स्वयंसेवक जो है उसे संज्ञान में लेते हुए, नवंबर 1948 में सरदार पटेल ने गोलवलकर जी को पत्र लिखा था और कहा कि जो जहर आरएसएस ने फैलाया वह महात्मा गाधी के बलिदान के लिए जिम्मेदार है. मुझे नरेंद्र मोदी से पूछना है कि क्या वे सरदार पटेल के विचारों से सहमत हैं? जिनका इतिहास नहीं होता वो दूसरे का इतिहास हथियाने की कोशिश करते हैं: मनीष तिवारी, सूचना और प्रसारण मंत्री

  4. सरदार पटेल पर छपे एक बयान को लेकर नरेंद्र मोदी ने ट्वीट किया है कि ये बयान ग़लत तरीके से छापा गया था. एक अख़बार में छपा था कि मोदी ने कहा है कि सरदार पटेल के अंतिम संस्कार में नेहरू शामिल नहीं हुए थे. इसे लेकर काफ़ी विवाद हुआ था.

  5. इसी गुरुवार को गुजरात में सरदार पटेल की विशाल प्रतिमा का भी अनावरण होना है.

  6. अहमदाबाद में अंकुर जैन के मुताबिक आयोजन स्थल पर इस समय कांग्रेसी और भाजपा कार्यकर्ता मिलीजुली संख्या में हैं और मीडिया का भी भारी जमावड़ा है. यहाँ करीब 1500 लोग आ सकते हैं और समारोह स्थल पर आने के लिए लोगों की कतारे लगी हुई हैं. यहाँ मौजूद पत्रकार मान रहे हैं कि आज के मंच से राजनीतिक तीरअंदाज़ी नहीं होगी और नरेंद्र मोदी और प्रधानमंत्री टिप्पणियों से बचेंगे.

  7. प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह अहमदाबाद पहुँच चुके हैं.

  8. इसी वर्ष स्वतंत्रता दिवस के मौके पर नरेंद्र मोदी ने भी अपने राज्य को संबोधित किया था. परंपरा यही रही है की इस मौके पर भारतीय प्रधानमंत्री दिल्ली में लाल किले से देश को संबोधित करते हैं. मोदी ने एक दिन पहले ही अपने भाषण कि बात बताते हुए कहा था कि इस बार लोग दो भाषण सुनेंगे और उनकी तुलना करेंगे.

  9. हालांकि इस परंपरा को कथित रूप से तोड़ने के लिए मोदी की कुछ लोगों ने आलोचना भी की थी, लेकिन उनके और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के भाषणों की ख़ूब तुलना भी की गई.

  10. भाजपा की ओर से प्रधानमंत्री पद की दावेदारी के नाम पर मोदी की चर्चा पहले भी होती रही थी. लेकिन स्वतंत्रता दिवस के मौके पर गुजरात के भुज में दिए गए उनके भाषण के बाद से विश्लेषकों के अनुसार उनकी दावेदारी लगभग पक्की सी हो गई थी.

  11. महात्मा गाँधी के पड़पोते राजमोहन गाँधी ने बीबीसी संवाददाता रेहान फ़ज़ल से बातचीत में कहा, 'सरदार पटेल ने सबसे बड़ा काम राजा-महाराजों और नवाबों को भारत गणराज्य में मिलाने का किया. 1947 से 1950 तक वे भारत को मजबूत और एक बनाने में जुटे रहे.'

  12. नेहरू और गाँधी की विचारधारा और व्यक्तित्व में विरोधाभासों के सवाल पर राजमोहन गाँधी ने कहा, 'ये ख़्याल ग़लत है. उनके व्यक्तित्व और स्वभाव अलग-अलग थे. कई मुद्दों पर उनके विचार भी अलग थे लेकिन सबसे बड़ी खूबी यह थी कि उनका टीमवर्क बिलकुल कायम रहा. 1947 से दिसंबर 1950 में सरदार पटेल के देहांत तक दोनों का टीमवर्क कायम रहा. हाँ, दोनों के बीच मतभेद थे. बातचीत में, टिप्पणियों में और पत्रों में दोनों ने कई बार सख़्त शब्दों का इस्तेमाल किया लेकिन इनका साथ कभी नहीं टूटा. एक बार जवाहर लाल नेहरू ने कहा था कि मैं जाता हूँ, आप ही प्रधानमंत्री बन जाइये. दोनों ने कई साल साथ जेल में भी बिताए और गाँधी जी के साथ काम किया. जब गाँधी जी गए तब उससे कुछ ही मिनट पहले सरदार पटेल और नेहरू ने वायदा दिया कि हम हमेशा साथ ही रहेंगे और इन दोनों ने तमाम मतभेदों के बाद उस वायदे को निभाया और हमेशा साथ रहे.'

  13. सरदार पटेल को मुसलमान विरोधी और हिंदू कट्टरपंथी माने जाने के सवाल पर राजमोहन गाँधी ने कहा, 'मैं इससे सहमत नहीं हूँ, वे मुसलमान विरोधी बिल्कुल भी नहीं थे. ये ज़रूर कह सकते हैं कि जवाहर लाल नेहरू के सामाजिक रिश्ते और संबंध कई मुसलमानों के साथ थे. ये सरदार पटेल के साथ नहीं हुआ. उन्हें मुसलमानों के जीवन की उतनी जानकारी नहीं थी जितनी नेहरू को थी. ये भी कहा जा सकता है कि उनका दिल हिंदू था. जब मुसलिम लीग और जिन्ना की ओर से पाकिस्तान की माँग की गई तब सरदार पटेल ने उसका बहुत विरोध किया. उनके विरोध के तरीके से कुछ लोगों को लग सकता है कि शायद वे मुसलमान विरोधी थे लेकिन यह ग़लत है. मैं ये कह सकता हूँ कि उनका दिल हिंदू था लेकिन सरकार का काम करने का उनका हाथ बिलकुल निष्पक्ष था और क़ानून के दायरे में वे काम करते थे. वे अपने दिल के बजाए क़ानून की सुनते थे.'

  14. सरदार पटेल के नाम पर नरेंद्र मोदी के अभियान पर राजमोहन गाँधी ने बीबीसी से कहा, 'इससे मुझे दुख ही होता है क्योंकि सरदार पटेल को लेकर भारत में एक विवाद शुरू करना या एक पार्टी को या आज की सरकार को ग़लत बताना या उसके ख़िलाफ़ कुछ कहना मुझे सही नहीं लगता है. सरदार पटेल का इस तरह से इस्तेमाल किया जाना बेहद खेद की बात है. मैं स्वीकार करता हूँ कि ये हो रहा है और यह बिलकुल ग़लत है.'

  15. प्रकाश एन शाह, गांधीवादी और निरीक्षक पत्रिका के संपादक: हालांकि इतिहास में इस बात पर बहस चलती रही है कि नेहरू के चलते सरदार पटेल के साथ कथित अन्याय हुआ, लेकिन आज की तारीख में इस पर बहस करने का कोई मतलब नहीं है. मेरे हिसाब से स्वाधीन भारत की लड़ाई के इतिहास को नेहरू, गांधी और पटेल से अलग करके नहीं देखा और समझा जा सकता है.

  16. प्रकाश एन शाह, गांधीवादी और निरीक्षक पत्रिका के संपादक: अपने समय में गांधी, नेहरू और पटेल में काफ़ी मतभेद रहे होंगे, लेकिन तीनों ने एकमत होकर एक अखंड भारत के लिए ज़ोर दिया और उसके लिए लड़े भी. अहम बात यही है कि गांधी की राजनीतिक गोद में ही नेहरू और पटेल की परवरिश हुई थी.

  17. प्रकाश एन शाह, गांधीवादी और निरीक्षक पत्रिका के संपादक: अगर कांग्रेस सिर्फ़ महात्मा गांधी व नेहरू की और भाजपा सिर्फ़ सरदार पटेल के योगदान की बात करना चाहती है तब वो भी गलत है. क्योंकि स्वतंत्रता मिलने के अहम मौके के पहले और बाद का इनका योगदान स्वर्णिम अक्षरों में लिखा है.

  18. हाल ही में पटना में हुई रैली में नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस पर जमकर निशाना साधा था.

  19. प्रकाश एन शाह, गांधीवादी और निरीक्षक पत्रिका के संपादक: ये सही बात है कि सरदार पटेल ने सोमनाथ मंदिर को बनवाने का बीड़ा उठाया था. लेकिन कम लोग इस बात को जानते हैं कि इससे पहले उन्होंने खुद महात्मा गांधी से मामले पर सलाह ली थी. सरदार का मानना था कि क्योंकि ये एक समुदाय की धार्मिक भावनाओं का मामला था इसलिए इसके लिए एक अलग ट्रस्ट बने जिसमे सरकारी दखल नहीं हो.

  20. मंच पर साथ-साथ बैठे हैं नरेंद्र मोदी और मनमोहन सिंह.

  21. प्रकाश एन शाह, गांधीवादी और निरीक्षक पत्रिका के संपादक: जब अयोध्या में रामलला के प्रकट होने की बात हुई तब सरदार पटेल गृह मंत्री थे. उन्होंने दोनों समुदायों की धार्मिक भावनाओं को ध्यान में रखते हुए निरपेक्ष फैसले ही लिए थे.

  22. नितिन श्रीवास्तव, बीबीसी संवाददाता : 2009 के आम चुनावों में मैं अहमदाबाद में मनमोहन सिंह की एक चुनावी रैली में मौजूद था. भीड़ में से एक व्यक्ति ने मंच की ओर जूता फेंका था जो मंच से करीब बीस फिट की दूरी तक ही जा सका था. मनमोहन सिंह ने इस सबके बीच अपना संबोधन जारी रखा था.

  23. अहमदाबाद में मंच पर आज मोदी और मनमोहन सिंह अगल-बगल बैठे दिख रहे हैं. मोदी ने मुस्कुरा कर मनमोहन से कुछ बातचीत भी की. 

  24. अब नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री की मौजूदगी में भाषण दे रहे हैं.

  25. नितिन श्रीवास्तव, बीबीसी संवाददाता : नरेंद्र मोदी ने संबोधन शुरू किया और कहा समय की कमी है क्योंकि प्रधानमंत्री का सरदार पटेल के कार्यक्रम में आने से पहले राजीव गांधी भवन भी जाना ज़रूरी था. कहीं एक चुटकी लेने का अंदाज़ तो नहीं था ये मोदी का?

  26. गुजरात की धरती पर प्रधानमंत्री जी आपका स्वागत है, मैं आपका अभिनंदन और धन्यवाद करता हूँ- नरेंद्र मोदी

  27. नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री गुजरात -

    प्रधानमंत्री जी गुजरात का धरती पर आपका अभिनंदन करता हूं. आपका धन्यवाद भी करता हूं. प्रधानमंत्री जी हम आपके आभारी हैं क्योंकि आप ही के कार्यकाल में गुड गवर्नेंस के लिए राज्यों को ईनाम दिए जाना शुरु हुए हैं. इनमें में से कई पुरस्कार गुजरात को मिले हैं.

  28. नितिन श्रीवास्तव, बीबीसी संवाददाता : नरेंद्र मोदी ने अपने छोटे से भाषण में भी गुजरात को उत्तम चीज़ों के लिए मिलने वाले पुरस्कारों का ज़िक्र किया है. साथ ही मोदी ने प्रधानमंत्री को भी इस बात के लिए उनकी सरकार को सम्मानित करने का धन्यवाद दिया है. मनमोहन सिंह एक दम शांत भाव से गंभीरता से मोदी की बातों को सुन रहे हैं जिसमे माओवाद और चरमपंथ तक की बातों का ज़िक्र हो रहा है. 

  29. अब मोदी गुजरात से आगे बढ़ कर पूरे भारत, समास्याएं और दूसरे राज्यों का भी हवाला दे रहे हैं और सरदार पटेल के आदर्शों का ज़िक्र कर रहे है.

  30. नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री गुजरात

    1919 में सरदार पटेल अहमदाबाद नगर पालिका के पार्षद थे. तब वे महिला आरक्षण का प्रस्ताव लाए थे और प्रस्ताव पास भी करवाया था.

  31. नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री गुजरात

    कई लोगों ये गिला रहेगा कि सरदार पटेल भारत पहले प्रधानमंत्री नहीं हुए.

  32. चाहे माओवाद हो या आतंकवाद हो....देश के लिए बड़ी चुनौती है. ये गांधी और पटेल की भूमि है और यहाँ बंदूक का रास्ता सफल नहीं हो सकता.....समय की मांग है कि बंदूक का रास्ता छोड़कर ये नौजवान मुख्यधारा में शामिल हों...पंजाब का उदाहरण हमारे सामने है....1919 में सरदार पटेल काउंसिलर थे...दुनिया में लोगों को पता नहीं है...1919 में वे प्रस्ताव लाए थे और लोकल सेल्फ गर्वनमेंट में महिला आरक्षण का प्रस्ताव लाए और पारित कराया....

    नरेंद्र मोदी

  33. अहमदाबाद में सरदार पटेल की प्रतिमा के अनावरण के मौके पर नरेंद्र मोदी ने अपने भाषण में कहा है कि काश सरदार पटेल देश के पहले प्रधानमंत्री होते तो देश की तस्वीर ही कुछ और होती. उस समय मंच पर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह भी मौजूद थे.

  34. नितिन श्रीवास्तव, बीबीसी संवाददाता: ऐसा शायद पहली बार हुआ हो कि किसी भारतीय प्रधानमंत्री के मंच पर आसीन रहते ही उसकी पार्टी के पहले प्रधानमंत्री के सत्ता में रहने का एक दूसरे राजनेता ने अफ़सोस जता दिया हो!

  35. मोदी ने अपने भाषण के अंत में कहा-इस देश को हमेशा एक गिला शिकवा रहेगा, एक दर्द रहेगा. हर हिंदुस्तानी के दिल में ये दर्द रहेगा कि काश सरदार साहब हमारे पहले प्रधानमंत्री होते तो आज देश की तस्वीर भी अलग होती, तक़दीर भी अलग होती. सरदार साहब की कमी यह देश सदा सर्वदा महसूस करेगा. सरदार साहब के जीवन को उनके कार्य को स्मरण करते हुए देश की एकता के लिए अपने जीवन में काम करे, इसी अपेक्षा के साथ आपका बहुत-बहुत आभार.

  36. मनमोहन सिंह जैसे ही भाषण देने पहुँचे, नारेबाज़ी शुरू हो गई. कुछ लोगों ने नारे लगाए- मनमोहन सिंह आगे बढ़ो, हम तुम्हारे साथ हैं.

  37. अहमदाबाद में प्रधानमंत्री का भाषण : यह कहना ग़लत नहीं होगा कि आज दुनिया जिस अखंड भारत को जानती है उसकी बुनियाद रखने में सरदार पटेल का बहुत बड़ा योगदान था.

  38. अपने भाषण में प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने कहा, 'सरदार पटले का नज़रिया पूरी तरह से सेक्युलर था. उन्होंने कहा था कि पूरा भारत उनका गाँव हैं और सभी संप्रदाय के लोग उनके दोस्त और रिश्तेदार हैं. वे एक ज़मीन से जुड़े हुए नेता थे. उनका जन्म गुजरात के एक एक ग्रामीण इलाक़े में हुआ. वे हमेशा आर्थिक रूप से पिछड़े लोगों, खासतौर पर किसानों की भलाई के लिए काम करते रहे.'

  39. अहमदाबाद में प्रधानमंत्री: मुझे इस बात का गर्व है कि सरदार पटेल का संबंध जिस पार्टी से था, मैं भी उसी राजनीतिक दल का सदस्य हूँ.

  40. मनमोहन सिंह अहमदाबाद में: सरदार पटेल ने ज़िंदगी भर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस को मज़बूत बनाने के लिए काम किया. वह कराची में पार्टी के अध्यक्ष भी चुने गए. हमारा कर्तव्य बनता है कि हम अपने देश की जनता को और ख़ासकर नौजवानों को सरदार पटेल के जीवन और उपलब्धियों से और बेहतर तरीके से वाकिफ़ कराएं.

  41. नितिन श्रीवास्तव, बीबीसी संवाददाता : मेरे हिसाब से देश में चुनावी माहौल बनने से ठीक पहले मनमोहन सिंह का नरेंद्र मोदी के साथ एक ही मंच पर सरदार पटेल जैसे नेता पर बात करने का फ़ैसला बेहद साहसिक है. ये ऐतिहासिक इसलिए भी है क्योंकि इसके बाद प्रधानमंत्री पद के दावेदारों में चुनाव के पहले आपसी बहस होने की मुहिम को भी बल मिलेगा. भारतीय राजनीति के लिए मेरे हिसाब से ये अच्छा संकेत है!

  42. सरदार पटेल के गुण थे - सहनशीलता, संवेदनशीलता...... मैं समझता हूँ जो लोग उपस्थित हैं हम समय-समय पर रुक कर  विचार करेंगे कि वो कौन सी सोच है जिसेसे देश का निर्माण हुआ है....

    प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह

     

  43. मनमोहन सिंह: सरदार पटेल का नज़रिया पूरी तरह से सेकुलर था. उन्हें भारत की अखंडता में गहरा विश्वास था. उन्होंने कहा था कि पूरा भारत उनका गांव है और सभी संप्रदाय के लोग उनके दोस्त और रिश्तेदार हैं.

  44. मनमोहन सिंह ने अपने भाषण में नेहरू-पटेल रिश्तों पर भी बात की. नेहरू से संबंधों पर सरदार पटेल का हवाला देते हुए मनमोहन सिंह ने कहा, “हमने हमेशा एक दूसरे की सलाह का सम्मान किया है और ऐसा वह लोग ही कर सकते हैं जिन्हें एक दूसरे के ऊपर भरोसा हो.”

  45. राजनीतिक विश्लेषक प्रमोद जोशी-

    कुछ महीनों और सालों से भाजपा और कांग्रेस के बीच धर्मनिरपेक्षता, राष्ट्रीय एकीकरण और राष्ट्रवाद की बहस रोचक और निर्णायक मोड़ पर है. इसका कारण ये है कि नरेंद्र मोदी और भाजपा ने सरदार पटेल की विरासत को संभालने की स्वयं जिम्मेदारी ले ली है, उससे कांग्रेस के कुछ अंतर्विरोध और परेशानियाँ सामने आई हैं.

  46. प्रमोद जोशी, विश्लेषक

    नेहरू को भारत रत्न 1955 में और गोविंद वल्लभ पंत को 1957 में दिया गया. लेकिन सरदार पटेल को 1991 में राजीव गांधी के ही साथ दिया गया. एक ही साल पहले अंबेडकर को भारत रत्न दिया गया था. आज प्रधानमंत्री ने कहा कि सरदार पटेल कांग्रेसी थे, धर्मनिरपेक्ष थे और आरएसएस पर प्रतिबंध उनके कार्यकाल में लगा. यदि कांग्रेस मानती है कि सरदार पटेल उसके नेता थे तो फिर ये अंतर्विरोध कैसा....? भाजपा इस रोचक तथ्य पर ध्यान दिलाना चाह रही है के ये तो 1969 की कांग्रेस इंदिरा है.....न कि सरदार पटेल वाली कांग्रेस....ये भावनात्क भँवर है और कांग्रेस को कुरेदने, छेड़ने की भाजपा की कोशिश है.....कांग्रेस का अब प्रयास है ये जताने का कि सरदार पटेल कांग्रेसी नेता थे जबकि नरेंद्र मोदी सरदार पटेल को राष्ट्रीय नेता को रूप में प्रस्तुत कर रहे हैं.

  47. इसके साथ ही बीबीसी हिंदी की ये विशेष प्रस्तुति समाप्त होती है. पंकज प्रियदर्शी को वंदना और नितिन श्रीवास्तव के साथ अनुमति दीजिए. नमस्कार. आप अपनी राय hindi.desk@bbc.co.uk पर भेज सकते हैं.

मोदी-मनमोहन और पटेल

29 अक्तूबर, 2013
  • गर्म होते चुनावी पारे के बीच प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और भारतीय जनता पार्टी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी मंगलवार को अहमदाबाद में एक मंच पर दिखेंगे.
  • दोनों नेता सरदार वल्लभ भाई पटेल की याद में अहमदाबाद में बनाए गए एक संग्रहालय के उद्घाटन समारोह में हिस्सा लेंगे.
  • इस संग्रहालय को सरदार वल्लभ भाई पटेल मेमोरियल सोसाइटी ने बनवाया है.
  • नरेंद्र मोदी गुरुवार को देश के पहले गृहमंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल की जयंती के मौक़े पर सरदार सरोवर बांध के पास पटेल की विशाल प्रतिमा की भी नींव रखेंगे.
  • पीटीआई के अनुसार सरदार वल्लभ भाई पटेल मेमोरियल सोसाइटी के प्रमुख और केंद्रीय मंत्री दिंशा पटेल ने नरेंद्र मोदी से मिलकर समारोह का न्योता दिया

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