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अख़बारों में मोदी बनाम राहुल के साथ फॉर्मूला वन का तड़का

 सोमवार, 28 अक्तूबर, 2013 को 16:17 IST तक के समाचार

बिहार की राजधानी पटना में ‘हुंकार’ भरने के लिए भारतीय जनता पार्टी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी रविवार दोपहर पहुंचने ही वाले थे कि पटना बम धमाकों से दहल गई.

लेकिन इसके बाद भी नरेंद्र मोदी रुके नहीं बल्कि उसी तेवर के साथ उन्होंने नीतीश कुमार और केंद्र के सरकार की आलोचना की जिसके लिए वो जाने जाते हैं.

पटना में धमाका और रैली, यही सुर्खियां सोमवार के अखबारों में भी प्रमुखता से छापी गई. हालांकि रविवार को एक और बड़े नेता ने दिल्ली में एक रैली को संबोधित किया था, जिसको कम ही कवरेज मिल पायी. वो नेता थे राहुल गांधी, जो दिल्ली सरकार की सफलताओं की रिपोर्ट जनता को दे रहे थे.

खबरों के लिहाज़ से बीता रविवार खासा सक्रिय दिन रहा और राजनीतिक गतिविधियों के अलावा भारत में हुए फॉर्मूला वन ने भी सुर्खियां बटोरी. पंजाब केसरी और अमर उजाला ने बैनर फोटो के साथ बिहार ब्लास्ट और मोदी की रैली की खबर छापा. आइए एक नज़र डालते हैं आज के प्रमुख समाचार पत्रों पर और देखते है किसने किस खबर को कितनी जगह देकर छापा.

द हिंदू

समाचार पत्र द हिंदू ने पटना में हुए ब्लास्ट की खबर को प्रमुखता से छापा है और उसके साथ ही नीतीश कुमार के बयान को भी प्रमुखता दी गई है, जिसमें उन्होंने कहा था कि ‘ये समय राजनीति करने का नहीं है’.

पहले पन्ने पर ही द हिंदू ने मोदी के भाषण की भी खबर छापी. हेडलाइन के लिए मोदी के भाषण का वो अंश लिया गया जिसमें उन्होंने कहा था कि, ‘नीतीश कुमार ने लोगों को धोखा दिया’.

राहुल गाधी की खबर को पहले पन्ने पर जगह तो नहीं मिली लेकिन उनकी एक तस्वीर ज़रूर छपी जिसमें वो अपनी रैली के दौरान दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित को गले से लगाते दिख रहे हैं.

भारत में हुई फॉर्मूला वन ग्रां प्री में सेबास्टियन वेटल की जीत पर भी एक खबर छापी गई.

जनसत्ता

अख़बार की सुर्ख़ियां बिहार ब्लास्टों से संबंधित है, लेकिन पहले पन्ने पर सिर्फ राहुल गांधी और नरेंद्र मोदी का ज़िक्र है. इसके अलावा सिर्फ एक ख़बर ऐसी है जो राहुल-मोदी से इतर है, और वो ये है कि भारत और पाकिस्तान सीमा पर गोलीबारी के बारे में बातचीत करने के लिए फ्लैग बैठक कर सकते हैं.

जनसत्ता के संपादकीय पन्ने पर ‘आयोग की नज़र’ शीर्षक के साथ एक संपादकीय लेख छापा गया है जो चुनावी माहौल में सोशल मीडिया से लेकर विभिन्न संचार तकनीकों पर चर्चा की गई है.

द टाइम्स ऑफ़ इंडिया

इस अख़बार ने भी बिहार बम धमाकों को अपनी सुर्खिया बनाई है. लेकिन एक अन्य ख़बर को भी पहले पन्ने पर जगह मिली है वो है रिटेल ग्रुप वॉलमार्ट से संबंधित. अख़बार का दावा है कि वॉलमार्ट अब भी भारतीय बाज़ार में घुसने के लिए लॉबिंग कर रहा है.

गड़े खज़ाने की ख़बरों ने बीते दिनों काफ़ी सुर्खियां बटोरी थी लेकिन ‘सपनों के खजाने’ का अब तक नामोनिशान नहीं दिखा है.

इस बीच वैज्ञानिकों ने बुंदेलखंड की धरती में धातुओं और खनिजों का प्राकृतिक खज़ाना होने का दावा किया है, जिसकी कीमत लगभग 4000 करोड़ की हो सकती है.

अख़बार ने क्रिकेट में राजनीति की घुसपैठ पर भी एक ख़बर छापी है जिसके अनुसार हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला में हिमाचल प्रदेश और गोवा के बीच होने वाले रणजी टूर्नामेंट से पहले एक गंभीर विवाद ने जन्म ले लिया था.

हिंदुस्तान

इस अखबार ने भी बिहार में धमाकों की खबर को सुर्खियां बनाई लेकिन फॉर्मूला वन को भी खासा तवज्जों दिया. हिंदुस्तान ने भीतर का एक पन्ना भी फॉर्मूला वन से जुड़ी कहानियों के साथ प्रकाशित किया.

अख़बार ने संपादकीय पन्ने में वरिष्ठ टीवी पत्रकार आशुतोष का एक लेख भी छापा है जिसमें उन्होंने दावा किया है कि ‘राजनेताओं को ये बात मालूल है कि मुस्लिम असुरक्षित है, वे वोट बैंक हैं. जब वे असुरक्षित नहीं महसूस करेंगे तो वो वोट बैंक नहीं रहेंगे.’

द इंडियन एक्सप्रेस

अख़बार ने बड़ी तस्वीर के साथ बिहार में हुए ब्लास्ट की ख़बर को ही अपनी सुर्ख़ियां बनाई है.

अपने-अपने भाषणों के साथ राहुल-मोदी भी पन्ने पर मौजूद है, लेकिन एक खबर जो बिल्कुल अलग है, वो है अगरतला के उस पूर्व सीपीएम सदस्य के बारे में जिन्होंने नोटों की गद्दी पर लेटकर विजयी मुस्कान के साथ तस्वीर खिंचवाई थी और उन्हें सीपीएम सदस्यता से हाथ धोना पड़ा था.

अखबार ने विशेष रिपोर्ट में कहा है कि समर आचार्जी का दावा है कि नोटों का बिस्तर उनका नहीं था और वो केवल उस पर लेटे थे. अखबार के अनुसार उन्होंने अपने दल के नेताओं से माफ़ी भी मांगी है.

दैनिक जागरण

इस अख़बार ने अपने पहले पन्ने पर पुलिस के एक जवान को एक धमाकों में घायल व्यक्ति को ले जाते हुए तस्वीर को छापा है.

पहले पन्ने के ही अंत में अखबार ने नरेंद्र मोदी की गांधी मैदान पर रैली और उनके भाषण पर टिप्पणी छापी है.

प्रशांत मिश्रा के इस लेख में कहा गया है कि ‘नरेंद्र मोदी ने नीतीश के गढ़ में घुसकर अपने राजनीतिक अपमान का बदला लिया है’.

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