कोयला घोटाला: क्या हो सकती हैं पीएम की मुश्किलें?

  • 25 अक्तूबर 2013
कोयला ढोती महिलाएं.

कोयला ब्लॉक आवंटन घोटाले में पूछताछ के लिए प्रधानमंत्री की सीबीआई के सामने पेश होने की पेशकश मुख्य विपक्षी दल भाजपा और कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ इंडिया (माकपा) ने ठुकरा दी है.

इन विपक्षी दलों ने प्रधानमंत्री की पेशकश को दिखावा बताया है. इन पार्टियों ने सभी कोयला ब्लॉकों के आवंटन की जांच की मांग की है.

कोयला ब्लॉक आवंटन मामले में सवालों से घिरे प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का कहना है कि उनके पास छिपाने के लिए कुछ नहीं है.

रूस और चीन की यात्रा से वापस लौटते समय मनमोहन सिंह ने ‌अपने विशेष विमान में पत्रकारों से कहा कि देश में कोई भी व्यक्ति क़ानून से ऊपर नहीं है.

उन्होंने कहा, "मेरे पास छिपाने को कुछ भी नहीं है. मैं सीबीआई और किसी भी अन्‍य जांच के लिए तैयार हूं."

इस्तीफ़े पर संशय

उद्योगपति कुमार मंगलम बिड़ला और पूर्व कोयला सचिव पीसी पारख के खिलाफ सीबीआई की ओर से दर्ज कराई गई एफआईआर के बाद से मनमोहन सिंह विपक्ष के निशाने पर आ गए हैं.

अंग्रेजी अख़बार हिंदुस्तान टाइम्स के राजनीतिक संपादक पंकज वोहरा के मुताबिक़ प्रधानमंत्री की इस पेशकश को सीबीआई को उस समय गंभीरता से लेना होगा, जब सुप्रीम कोर्ट के आदेश उसे मिलेंगे क्योंकि इस मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में हो रही है.

पंकज वोहरा कहते हैं इसके सियासी परिणाम हो सकते हैं, "अगर सुप्रीम कोर्ट सीबीआई से कहती है कि प्रधानमंत्री की भी जांच करो तो प्रधानमंत्री का अपने पद पर बने रहना मुश्किल हो जाएगा".

सीबीआई कार्मिक विभाग के तहत काम करती है जिसकी बागडोर प्रधानमंत्री के हाथ में है.

वोहरा कहते हैं, ''प्रधानमंत्री खुद अभियुक्त और जांचकर्ता एक साथ नहीं हो सकते. इस सूरत में कांग्रेस के लिए बड़ी मुश्किल खड़ी हो जाएगी.''

लेकिन अब तक कोई ऐसे संकेत नहीं मिले हैं कि प्रधानमंत्री अपना पद छोड़ने वाले हैं. पंकज वोहरा कहते हैं, ''मनमोहन सिंह इतनी आसानी से इस्तीफा देने वाले नहीं हैं, हाँ अगर सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया कि उनकी जांच होनी चाहिए तो फिर मामला बिलकुल अलग होगा."

सुप्रीम कोर्ट की निगरानी

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह

मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में इस मामले में स्टेटस रिपोर्ट सौंपने के बाद सीबीआई ने प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) से बिड़ला की कंपनी हिंडाल्को को कोल ब्लॉक आवंटित करने संबंधी दस्तावेज उपलब्ध कराने को कहा था.

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई 29 अक्तूबर तय की है.

सीबीआई के इस रुख़ से प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह नए सिरे से विपक्ष के निशाने पर आ गए हैं.

प्रधानमंत्री कार्यालय ने आदित्य बिड़ला समूह की कंपनी हिंडाल्को को कोयला ब्लॉक देने के फैसले का बचाव किया है.

पीएमओ ने कुछ ही दिन पहले हिंडाल्को को कोयला ब्लॉक के आवंटन को सही ठहराते हुए कहा था कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने उनके समक्ष पेश किए गए मामले के गुण-दोष के आधार पर कोयला ब्लॉक के आवंटन को मंजूरी दी थी.

सीबीआई ने 15 अक्तूबर को 2005 में ओडिशा में कोल ब्लॉक आवंटन के मामले में आदित्य बिड़ला समूह के प्रमुख कुमार मंगलम बिड़ला और पूर्व कोयला सचिव पीसी पारख के खिलाफ एफ़आईआर दर्ज की थी.

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