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साधु के सपने का 'स्वर्ण भंडार', तलाश जारी

 शुक्रवार, 18 अक्तूबर, 2013 को 18:24 IST तक के समाचार

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (एएसआई) ने उत्तर प्रदेश में उन्नाव जिले के डौंडिया खेड़ा गाँव में कंटीले जंगलों के बीच एक खंडहरनुमा किले में 1,000 टन सोना ढूंढने के लिए शुक्रवार को खुदाई शुरू की.

इस खुदाई को देखने के लिए बड़ी तादाद में स्थानीय लोग किले के आसपास जमा थे. भीड़ को काबू में रखने के लिए वहां पुलिस भी तैनात थी जिसे काफी मशक्कत करनी पडी.

एएसआई ने खुदाई के लिए 11 बजे का वक्त तय किया था, लेकिन उन्नाव के जिलाधिकारी विजय किरण आनंद और एएसआई के अधिकारियों के बीच सुबह हुई बैठक की वजह से खुदाई तय वक्त पर शुरू नहीं हो सकी.

इस बीच संभावित स्वर्ण भंडार से संबंधित सपना देखने वाले शोभन सरकार ने किले में जाकर भूमि पूजन किया. उसके बाद जिलाधिकारी और पुरातत्व विभाग के प्रवीण कुमार मिश्र की निगरानी में खुदाई का काम शुरू हुआ.

हालांकि भारतीय पुरातत्व विभाग के निदेशक (खोज) सैयद जमाल हसन ने बीबीसी से कहा कि देश की सांस्कृतिक विरासतों को पहचानना और उन्हें सहेजने की दिशा में कदम उठाना भारतीय पुरातत्व विभाग का प्रमुख काम है, न कि खज़ाने की खोज करना.

कब पता चलेगी सच्चाई?

जिलाधिकारी विजय किरण आनंद ने पत्रकारों को बताया की खुदाई कम से कम एक महीने तक चलेगी और उसके बाद ही पता चल पाएगा कि जमीन के अन्दर सोना है या नहीं.

एएसआई की टीम की अगुवाई कर रहे प्रवीण कुमार मिश्र ने कहा कि पुरातत्व विभाग का 10 लोगों का दल खुदाई कर रहा है. उन्होंने बताया, "हमारे लोग हल्के औज़ार जैसे कि फावड़ा, कुदाल और खुरपी का इस्तेमाल कर रहे हैं."

हल्के औज़ारों के इस्तेमाल के कारण खुदाई की रफ्तार धीमी रहेगी और ऐसे में शोभन सरकार के दावों की सच्चाई का पता लगने में समय लगेगा.

बाबा का सपना

शोभन सरकार कानपुर के शिवली स्थित आश्रम में रहते हैं और उनका वास्तविक नाम विरक्ता महाराज है.

शोभन सरकार ने जिस किले में सोने का अकूत भंडार होने का दावा किया है वह करीब 156 साल पहले राजा राव रामबक्श सिंह का हुआ करता था.

शोभन सरकार का दावा है कि करीब तीन माह पूर्व राम बक्श सिंह उन्हें सपने में दिखे और उन्होंने बाबा को किले के नीचे सोना दबा होने की बात बताई.

स्थानीय लोगों का कहना है कि 1857 में हुए गदर के दौरान राम बक्श सिंह ने अंग्रजों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था, लेकिन आखिरकार उनकी हार हुई और उन्हें फांसी दे दी गई.

सक्रिय हुई सरकार

शोभन सरकार के भक्तों में कई मंत्री और नेता शामिल हैं. बाबा के एक शिष्य ने इस सपने के बारे में केंद्रीय मंत्री चरण दस महंत को बताया था.

इसके बाद चरण दास महंत ने इस कथित खजाने की बात कथित तौर से कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को बताई.

पिछले करीब एक सप्ताह से पुरातत्व विभाग के अधिकारियों का डौंडिया खेड़ा में आना-जाना लगा है और तभी से यह खंडहरनुमा किला स्थानीय निवासियों के बीच उत्सुकता का विषय बन गया है.

जो किला कुछ दिनों पहले तक सन्नाटे में डूबा रहता था, वहां मेले जैसा माहौल है. गाँव में लोगों का तांता लगा हुआ है. चाय और मिठाइयों की छोटी-मोटी दुकानें लग गई हैं.

डौंडिया खेड़ा की मांग

डौंडिया खेड़ा गांव के प्रधान अजय पाल सिंह का कहना है कि "शोभन सरकार की कोई बात खाली नहीं जाती है. अगर उन्होंने कहा है कि सोना है तो सोना ज़रूर मिलेगा."

उन्होंने कहा कि इस सोने से उनके गांव का विकास होना चाहिए. डौंडिया खेड़ा के लोगों ने प्रशासन से अपनी मांगों की सूची भी तैयार कर ली है, जिसमें गांव के प्रत्येक परिवार के एक व्यक्ति को सरकारी नौकरी की मांग शामिल है.

किले के एक तरफ गंगा नदी बहती है और बाकी तीन तरफ कंटीले पेड़ों का जंगल है. पुलिस और पुरातत्व विभाग वालों ने वहां टेंट में डेरा डाल दिया है.

सोने का इंतजार

सुरक्षा के लिहाज से जिला प्रशासन ने किले के तीनों ओर रस्सियाँ बाँध दी थीं और खुदाई वाले स्थल पर पुलिस, प्रशासन और पुरातत्व विभाग के अधिकारियों के अलावा किसी को जाने की अनुमति नहीं थी.

इसके बावजूद चिलचिलाती धूम में लोग रस्सी के पीछे छोटे-छोटे झुण्ड में खड़े होकर सोने के अकूत भंडार की एक झलक देखने के लिए उतावले नज़र आए.

डौंडिया खेड़ा के निवासी सोम पाल सिंह ने बताया, 'अभी तो सोना निकला भी नहीं है और हमारा गाँव पूरे देश में प्रसिद्ध हो गया है. अगर सोना निकल आता है तो न जाने क्या हो जाएगा. हमें उम्मीद है कि सोना निकलेगा.'

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