सोने की खोज कितनी जायज़?

  • 19 अक्तूबर 2013
उन्नाव का मंदिर

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (एएसआई) ने उत्तर प्रदेश में उन्नाव जिले में 1,000 टन सोना ढूंढने के लिए शुक्रवार से खुदाई का काम शुरु कर दिया.

ये खुदाई डौंडिया खेड़ा गाँव में कंटीले जंगलों के बीच एक खंडहरनुमा किले में की जा रही है.

दरअसल शोभन सरकार नाम के एक साधु ने किले में 1000 टन सोना दबे होने का सपना देखा था.

शोभन सरकार कानपुर के शिवली स्थित आश्रम में रहते हैं और उनका वास्तविक नाम विरक्ता महाराज है.

उनका कहना था कि ये सोना 156 साल पहले रहे एक राजा राव रामबक्श सिंह का था.

शोभन का दावा है कि करीब तीन माह पूर्व राम बक्श सिंह उन्हें सपने में दिखे और उन्होंने बाबा को किले के नीचे सोना दबे होने के बारे में बताया.

स्थानीय लोगों का कहना है कि 1857 में हुए गदर के दौरान राम बक्श सिंह ने अंग्रजों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था लेकिन आखिरकार उनकी हार हुई और उन्हें फांसी दे दी गई.

एएसआई के अतिरिक्त महानिदेशक बीआर मणि का कहना है कि विभाग ने खुदाई का निर्णय नहीं लिया बल्कि ये फ़ैसला सरकार ने लिया था.

उनका कहना था सरकार के निर्णय का आधार जियोलोजिकल सर्वे ऑफ इंडिया की रिपोर्ट थी जिसमें कहा गया कि वहां धातु का भंडार हो सकता है और इसी को देखते हुए एएसआई खुदाई कर रही है.

लेकिन सवाल ये कि एक साधु के कहने के बाद ही ये खुदाई क्यों शुरु हुई. क्या ये अंधविश्वास को बढ़ावा देना नहीं हुआ?

एक तरफ़ भारत मंगल ग्रह पर मिशन भेजने की तैयारी कर रहा, और दूसरी ओर सरकार का ये कदम कितना जायज़ है?

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