निजी रेडियो स्टेशन पर समाचार क्यों नहीं?: सुप्रीम कोर्ट

  • 17 अक्तूबर 2013

सर्वोच्च न्यायालय ने एक स्वयंसेवी संगठन की निजी एफ़एम रेडियो चैनलों पर समाचार प्रसारण की मांग करने वाली जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए गुरुवार को केंद्र सरकार को नोटिस भेजा है.

कॉमन कॉज़ संस्था द्वारा दायर का गई जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश पी सदाशिवम की खंडपीठ ने सवाल उठाया कि जब टेलीविज़न पर समाचारों को प्रसारित करने की अनुमति पहले ही दी जा चुकी है, तो फिर सरकार को निजी रेडियो स्टेशन पर समाचारों के प्रसारण की अनुमति देने में क्या समस्या है.

अदालत ने कहा कि सरकार एफ़एम रेडियो चैनल्स पर समाचार प्रसारण पर रोक कैसे लगा लकती है, जबकि सामुदायिक रेडियो चैनल्स की पहुंच आसान है.

अदालत ने सवाल पूछा कि सरकार निजी रेडियो स्टेशनों को समाचार प्रसारित करने की अनुमति क्यों नहीं दे रही.

दिक्कत कहाँ

स्वयंसेवी संस्था की ओर से अदालत में पेश वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने तर्क दिया," टीवी चैनलों की तर्ज़ पर निजी रेडियो पर भी समाचारों के प्रसारण की अनुमति होनी चाहिए, क्योंकि इसकी पहुंच आम जनता तक कहीं ज़्यादा है, साथ ही बिना ज़्यादा निवेश किए नए रेडियो स्टेशन लाए जा सकते हैं."

इन तर्कों को सुनने के बाद अदालत ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया.

उल्लेखनीय है कि भारत में बड़ी संख्या में प्राइवेट एफ़एम रेडियो स्टेशन सक्रिय हैं, लेकिन सिर्फ़ आकाशवाणी के एफ़एम स्टेशनों से ही समाचार प्रसारित होते हैं.

अभी एफ़एम पर सिर्फ़ मनोरंजन कार्यक्रम प्रसारित करने की अनुमति है.

जब से भारत में निजी एफ़एम रेडियो शुरू हुए हैं तभी से इस तरह की बातें सुनी जा रही हैं कि सरकार निजी स्टेशनों को समाचार और सामयिक विषयों के प्रसारण की अनुमति दे सकती हैं. लेकिन सरकार इस मामले में बातों से आगे कुछ ठोस क़दम उठाने में हमेशा से टालमटोल करती रही हैं.

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