मनमोहन सिंह पर भी आरोप तय हों: पूर्व कोयला सचिव

  • 16 अक्तूबर 2013

कोयला ब्लॉक आवंटन मामले में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की भूमिका पर विपक्ष पहले से ही सवाल खड़े करता रहा है. अब सीबीआई की ओर षड्यंत्र और भ्रष्टाचार के मामलों में आरोपित पूर्व कोयला मामलों के सचिव पीसी पारेख ने कहा कहा है कि कोयला ब्लॉक के आवंटन के मामले में अंतिम फ़ैसला प्रधानमंत्री का था, लिहाज़ा उनका नाम भी षड्यंत्रकारियों में होना चाहिए.

पीसी पारेख के आरोपों के बाद भारतीय जनता पार्टी ने एक बार फिर से प्रधानमंत्री के ख़िलाफ़ जांच की मांग की है.

आठ साल पहले ओडिशा में हुए दो कोयला ब्लॉक आवंटन के मामले में अनियमितता बरतने के आरोप में एक दिन पहले ही सीबीआई ने उद्योगपति कुमार मंगलम बिरला और पीसी पारेख के ख़िलाफ़ सीबीआई ने मामला दर्जकिया है.

सीबीआई की जांच

मामला दर्ज होने के बाद सीबीआई की जांच टीम ने हिंडालको के दफ़्तर सहित मुंबई, दिल्ली, हैदराबाद और भुवनेश्वर में छह ठिकानों की जांच पड़ताल की है. इसमें हैदराबाद के सिकंदराबाद स्थित पारेख का घर भी शामिल है.

पीसी पारेख ने ये भी कहा कि उनके ख़िलाफ़ लगाए सभी आरोप निराधार हैं. उन्होंने ये भी कहा कि सरकार के फ़ैसले में कुछ भी ग़लत नहीं था.

पीसी पारेख ने निजी टीवी चैनलों से कहा, ''सरकार के फ़ैसले में कुछ भी ग़लत नहीं था. हमने काफी पारदर्शी और सही फ़ैसला लिया था. मैं ये नहीं जानता कि सीबीआई को इसमें क्या षडयंत्र दिखा है."

पारेख ने ये भी कहा कि अगर कुछ षड्यंत्र है तो भी इसमें कई सदस्य शामिल हैं. पारेख ने कहा, "अगर कोई षड्यंत्र है भी, तो इसमें कई सदस्य शामिल है. केएम बिरला ने रिप्रेजेंटशन पेश किया था, तो वे एक षड्यंत्रकारी हुए. मैंने उनके दावे को देखा और संस्तुति की तो मैं दूसरा षड्यंत्रकारी. ऐसे में प्रधानमंत्री जो तब कोयला मामलों के मंत्री भी थे, उन्होंने अंतिम फ़ैसला लिया तो उन्हें तीसरा षड्यंत्रकारी होना चाहिए."

प्रधानमंत्री पर सवाल

कैग के मुताबिक कोयला ब्लॉक आवंटन में हुए गड़बड़ियों से देश को एक लाख छिहत्तर हज़ार करोड़ रुपये का अनुमानित घाटा हुआ.

पारेख ने सवाल उठाते हुए कहा कि अगर सीबीआई को कोयला ब्लॉक आवंटन मामले में कोई षड्यंत्र लगता है तो एजेंसी ने केवल बिरला और उन्हें ही क्यों आरोपित बनाया है.

पीसी पारेख के बयानों के बाद भारतीय जनता पार्टी ने प्रधानमंत्री को फिर से निशाना बनाया है. राज्य सभा में पार्टी के उपनेता रवि शंकर प्रसाद ने कहा किप्रधानमंत्री और प्रधानमंत्री कार्यालय की ज़िम्मेदारी बनती है इसलिए हम नई जांच की मांग कर रहे हैं.

वहीं भारतीय जनता पार्टी के नेता यशवंत सिन्हा ने कहा कि समय आ गया है जब पारेख को इस मामले में विस्तार से जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए.

दूसरी ओर, कांग्रेस ने कहा कि मामले की जांच चल रही है और जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में चल रही है.

केंद्रीय सूचना प्रसारण मंत्री मनीष तिवारी ने कहा कि इस मसले पर अनावश्यक कयासबाजी नहीं होनी चाहिए, क्योंकि सरकार जांच में पूरी तरह से मदद कर रही है.

वहीं कांग्रेस के महासचिव दिग्विजय सिंह ने कहा कि पारेख स्वतंत्र व्यक्ति हैं, लेकिन उन्हें अपनी बात सीबीआई के सामने रखनी चाहिए थी.

हज़ारों करोड़ का घोटाला

भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (कैग) की एक रिपोर्ट के मुताबिक़ कोयला घोटाला एक लाख 86 हज़ार करोड़ रुपए का अनुमानित घोटाला है.

कैग ने कहा था कि निजी कंपनियों को कोयले की खानें मिलने से सरकार को 1.86 लाख करोड़ का नुक़सान हुआ. इन कंपिनयों को कोयला की खाने बिना कोई बोली लगाए दी गई थीं.

विश्लेषकों का कहना था कि अगर इन कोयला खानों की नीलामी की गई होती तो सरकार को इतना घाटा नहीं उठानापड़ा होता.

कैग की रिपोर्ट के मुताबिक एसार पावर, हिंडाल्को, टाटा स्टील, टाटा पावर, जिंदल स्टील एंड पावर सहित 25 कंपनियों को विभिन्न राज्यों में कोयले की खानें दी गईं.

कैग की यह रिपोर्ट संसद में पेश की गई थी.

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