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दतिया हादसा: मृतकों की संख्या 111 हुई, नेताओं का दंगल शुरू

 सोमवार, 14 अक्तूबर, 2013 को 15:13 IST तक के समाचार
दतिया हादसा, रतनगढ़, मंदिर

मध्य प्रदेश के दतिया ज़िले के रतनगढ़ मंदिर के पास पुल पर हुए हादसे में मरने वालों की संख्या बढ़कर 111 हो गई है. चंबल परिक्षेत्र के पुलिस महानिरीक्षक एसएम अफ़ज़ल ने बीबीसी को ये जानकारी दी है. उन्होंने बताया कि बाईस लोग घायल हैं जिन्हें आस-पास के अस्पतालों में भर्ती कराया गया है.

इस बीच दतिया ज़िले में हुए हादसे पर राजनीतिक दंगल भी शुरू हो गया है.

कांग्रेस नेता और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने इस हादसे के लिए पुलिस को ज़िम्मेदार ठहराया है.

आरोप-प्रत्यारोप

दिग्विजय सिंह ने अपने ट्विटर हैंडलक्लिक करें @digvijaya_28 पर कहा, "रतनगढ़ माता मंदिर में हादसे की वजह? पुलिस हर ट्रैक्टर से दो सौ रुपये लेकर उसे 'नो ट्रैफ़िक ज़ोन' यानी यातायात निषेध क्षेत्र में जाने दे रही थी. एमपी में सुशासन है?"

लेकिन राज्य के गृह मंत्री उमाशंकर गुप्ता ने दिग्विजय सिंह के आरोपों को खारिज कर दिया. उन्होंने कहा, "दिग्विजय सिंह के बयान को गंभीरता से न लें. स्थिति अब सामान्य है. तलाश अभी जारी है क्योंकि कई लोग नदी में गिर गए थे."

गृह मंत्री ने कहा कि हादसे की न्यायिक जाँच के आदेश दे दिए गए हैं और ऐसे मामलों में राजनीति नहीं होनी चाहिए.

उमाशंकर गुप्ता ने कहा, "दिग्विजय सिंह जब मध्य प्रदेश के मुख्य मंत्री थे तब भी कई हादसे हुए हैं. लेकिन इसमें राजनीति नहीं करनी चाहिए. जो हादसा हुआ है, उससे प्रभावित लोगों के प्रति हमारी सहानुभूति होनी चाहिए. अगर कहीं भी गलतियां हुई हैं वो जाँच में सामने आएंगी और सख़्त कार्रवाई की जाएगी."

"रतनगढ़ माता मंदिर में हादसे की वजह? पुलिस हर ट्रैक्टर से दो सौ रुपये लेकर उसे 'नो ट्रैफ़िक ज़ोन' यानी यातायात निषेध क्षेत्र में जाने दे रही थी. एमपी में सुशासन है?"

दिग्विजय सिंह, महासचिव, कांग्रेस

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के नेता तारिक़ अनवर ने भी हादसे के लिए राज्य सरकार और ज़िला प्रशासन को ज़िम्मेदार बताया है.

कांग्रेस नेता अजय माकन ने कहा कि ख़राब प्रशासन और पुलिस में भ्रष्टाचार इस त्रासदी की वजह है. सोमवार को नई दिल्ली में पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा, "इस हादसे के लिए राज्य सरकार को नैतिक ज़िम्मेदारी लेनी चाहिए और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को इस्तीफ़ा दे देना चाहिए."

इस बीच शिवराज सिंह चौहान मामले का जायज़ा लेने रतनगढ़ पहुंच चुके हैं.

सोमवार सुबह शिवराज सिंह चौहानक्लिक करें @ChouhanShivraj ने ट्वीट किया, "ऐसी किसी त्रासदी पर राजनीति सही नहीं है. हमारा ध्यान घायलों के इलाज और भविष्य में ऐसे हादसों को रोकने पर होना चाहिए."

इससे पहले मुख्यमंत्री ने ट्विटर पर रतनगढ़ जाने की सूचना भी दी थी.

क्लिक करें देखिए: भगदड़ के बाद अपनों की तलाश

न्यायिक जांच के आदेश

राज्य के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मृतकों के परिजनों को डेढ़ लाख और घायलों को 25 हज़ार का मुआवज़ा देने की बात की है.

"ऐसी किसी त्रासदी पर राजनीति सही नहीं है. हमारा ध्यान घायलों के इलाज और भविष्य में ऐसे हादसों को रोकने पर होना चाहिए."

शिवराज सिंह चौहान, मुख्यमंत्री, मध्य प्रदेश

क्लिक करें पढ़िए: अब तक भगदड़ की वजह से हुए हादसे

पत्रकार ऋषि पांडे के अनुसार इस मंदिर में हर साल नवमीं के दिन लाखों श्रद्धालु आते हैं, लेकिन भीड़ के अनुपात में पुलिस व्यवस्था नहीं रखी गई थी.

रविवार सुबह 7 से 8 बजे के बीच दतिया से 55 किलोमीटर दूर स्थित रतनगढ़ माता मंदिर मंदिर जाने के दौरान पुल पर श्रद्धालुओं की भीड़ में पुल टूटने की अफवाह फैली, जिसके बाद स्थिति ने भगदड़ का रूप ले लिया. कई लोग भगदड़ में कुचल दिए गए जबकि कई लोग जान बचाने के लिए नदी में कूद गए.

मंदिर पुल के एक छोर पर है और दूसरे छोर से मंदिर की तरफ आने के लिए श्रद्धालु इस पुल का इस्तेमाल करते हैं.

नवरात्रि के कारण रतनगढ़ माता मंदिर में हज़ारों की संख्या में श्रद्धालु मौजूद थे. हादसे के वक्त करीब आधा किलोमीटर लंबे इस पुल पर भी सैकड़ों लोग मौजूद थे.

साल 2006 में भी इस मंदिर के पास एक पुल पर ऐसा ही हादसा हुआ था जिसमें कई लोग मारे गए थे. इस हादसे के बाद ही पक्का पुल बनाया गया था.

घटनास्थल पर मौजूद स्थानीय पत्रकार अजय मिश्रा के अनुसार मारे गए लोगों में महिलाएं और बच्चे भी बड़ी संख्या में शामिल हैं.

हादसे के चश्मदीद अतुल चौधरी ने बीबीसी को फोन पर बताया, "पुल पर हज़ारों लोग अचानक चीखते हुए छोर की तरफ भागने लगे, जिससे भगदड़ की स्थिति बन गई. भगदड़ के दौरान कुछ लोग कुचले गए और कुछ जान बचाते हुए नदी में कूद गए. मैं और मेरे कुछ दोस्त पुल के छोर के पास थे इसलिए बच निकले, अफसोस है कि सभी लोग इतने सौभाग्यशाली नहीं थे."

पत्रकार ऋषि पांडे के अनुसार घायलों को दतिया, भिंड और ग्वालियर के अस्पतालों में भर्ती कराया जा रहा है, लेकिन घटनास्थल काफ़ी दूर होने की वजह से राहत कार्य में देरी आ रही है.

ऋषि पांडे के मुताबिक भगदड़ के बाद कानून-व्यवस्था से नाराज़ श्रद्धालुओं ने वहां मौजूद पुलिस पर पथराव भी किया जिसमें कई पुलिस वाले घायल हुए हैं.

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