तटीय आंध्र और ओडीशा से लोगों को निकालने का काम शुरू

  • 11 अक्तूबर 2013

समुद्री तूफ़ान पायलिन के और मज़बूत होने के कारण तटीय आंध्र प्रदेश और ओडीशा के 23 ज़िलों में ख़तरा बढ़ गया है. इस कारण इलाक़े में शुक्रवार से लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने का काम शुरू कर दिया गया है.

सरकारी समाचार चैनल डीडी न्यूज़ के मुताबिक रक्षा मंत्री ने सेना को ओडीशा और आंध्र प्रदेश जाने के लिए तैयार रहने के लिए कहा है.

भारतीय मौसम विभाग ने बताया कि शुक्रवार तड़के भारतीय समयानुसार 2.30 बजे तूफ़ान का केंद्र पारादीप तट से दक्षिण-दक्षिण पूर्व में क़रीब 590 किमी की दूरी पर बना हुआ था. शनिवार शाम तक फ़ैलिन के कलिंगापट्टनम और पारादीप तट को पार करने की संभावना है.

मौसम विभाग ने तटीय इलाक़ों से लोगों को पूरी तरह से निकालने का सुझाव दिया है.

तूफ़ान के कारण तटीय इलाक़ों में 205 से 215 किमी की गति से हवाएं चल सकती हैं, जिसके कारण ओडीशा और तटीय आंध्र प्रदेश में भारी तबाही मच सकती है.

दोनों राज्यों में आपातकालीन स्थित से निपटने और राहत कार्य के लिए सेना को तैयार रहने के लिेए कहा गया है.

विभाग ने कहा है कि कच्चे और पुराने मकान क्षतिग्रस्त हो सकते हैं और बिज़ली व संचार व्यवस्था पूरी तरह ठप्प हो सकती है. तूफ़ान की चपेट में आने वाले इलाकों में राहत कार्य चलाने के लिए हेलीकॉप्टर और भोजन के पैकेट तैयार रखे गए हैं.

विभाग ने शुक्रवार से समुद्र में मछली पकड़ने पर पूरी तरह से रोक लगाने और मछुवारों को समुद्र में न जाने की सलाह के साथ रेल और सड़क परिवहन के संचालन में सावधानी बरतने का भी सुझाव दिया.

मौसम विभाग के मुताबिक़ तूफ़ान के कारण शनिवार की सुबह से तटीय ओडीशा और आंध्र प्रदेश के साथ-साथ पश्चिम बंगाल में बेहद भारी बारिश होगी. इन राज्यों के आसपास के इलाक़ों में भी बारिश होगी.

राज्य के अधिकारियों के मुताबिक यह तूफ़ान 1999 में ओडीशा में आए तूफ़ान से भी भयानक हो सकता है. उस वक्त राज्य में 15 हज़ार के करीब लोग मारे गए थे.

इन इलाक़ों में शुक्रवार की सुबह से 45 से 55 किमी प्रति घंटे की रफ़्तार से हवाएं चल रही है. पायलिन के क़रीब आने के साथ ही हवाओं की गति बढ़ेगी और शनिवार की शाम तक इनकी गति 215 किमी प्रति घंटे तक पहुंच सकती है.

मौसम विभाग के मुताबिक़ तूफ़ान के कारण समुद्र में दो से ढाई मीटर ऊंची लहरें उठेंगी. इस कारण ओडीशा के गंजाम, खुर्दा, पुरी और जगतसिंहपुर और आंध्र प्रदेश के श्रीकाकुलम ज़िले के निचले इलाक़ों में बाढ़ की आशंका है.

पिछले साल नवंबर में आए नीलम तूफ़ान के कारण तटीय इलाक़ों में भारी तबाही मची थी. लेकिन माना जा रहा है कि पायलिन तूफ़ान नीलम से ज्यादा ताक़तवर है. इस कारण भारी तबाही की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता.

समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक़ उपग्रह से ली गई तस्वीर में बंगाल की खाड़ी में बने तूफ़ान का आकार भारत के आकार का क़रीब आधा है.

एजेंसी ने लंदन स्थित तूफ़ान पर नज़र रखने वाली एजेंसी ट्रोपिकल स्टॉर्म रिस्क के हवाले से बताया है कि पायलिन कैटेगरी-4 का तूफ़ान है जबकि सबसे ताक़तवर तूफ़ान को कैटेगरी-5 में रखा जाता है.

इसी से यह अनुमान लगाया जा सकता है कि पायलिन कितना ताक़तवर है.

इस बीच प्रभावित इलाक़ों में सरकार ने अपने कर्मचारियों की छुट्टियां रद्द कर दी है और आपदा प्रबंधन दल को तैयार रहने के लिए कहा गया है.

गुरुवार को ओडीशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने कहा था कि तूफ़ान से जीवन और संपत्ति को नुक़सान पहुंचने की आशंका है.

उन्होंने कहा कि पायलिन से प्रभावित होने वाले ज़िलों में लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने के साथ प्रशासन को सभी ज़रूरी उपाय करने को कहा गया है.

पटनायक ने रक्षा मंत्री को पत्र लिखकर आपदा से निपटने के लिए सेना को तैयार रखने को कहा है.

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