कारगिल जैसे हालात नहीं: बिक्रम सिंह

  • 4 अक्तूबर 2013
बिक्रम सिंह ने कहा है कि केरन सेक्टर में कारगिल जैसे हालात नहीं हैं.

भारत के सेना प्रमुख जनरल बिक्रम सिंह ने जम्मू और कश्मीर के केरन सेक्टर में करगिल जैसे हालात होने की आशंकाओं को सिरे से खारिज किया है.

खबरों के मुताबिक भारत प्रशासित कश्मीर में नियंत्रण रेखा से करीब 40 चरमपंथियों ने घुसपैठ की है और भारतीय सेना पिछले नौ दिनों से उन चरमपंथियों के ख़िलाफ़ ऑपरेशन कर रही है.

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक जनरल बिक्रम सिंह ने यह भी साफ़ किया है कि चरमपंथियों ने नियंत्रण रेखा के पास किसी भी भारतीय गांव पर कब्ज़ा नहीं किया है.

पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक जब संवाददाताओं ने बिक्रम सिंह ने पूछा कि क्या केरन सेक्टर में कारगिल जैसे हालात बन गए हैं, उन्होंने कहा कि, "ये वैसा नहीं है. ये 30-40 चरमपंथियों की घुसपैठ की कोशिश है."

लंबा अभियान

सेना प्रमुख ने कहा कि चरमपंथियों ने चार या पांच स्थानों से घुसपैठ की कोशिश की और सुरक्षा बलों को उस सभी स्थानों के बारे में जानकारी है.

उन्होंने कहा कि, "उन्हें रोक दिया गया है. उनमें से कुछ निष्प्रभावी हो गए है. अभियान उन्हें खदेड़ने के लिए है. इसमें समय लगेगा."

यह पूछने पर कि क्या इन चरमपंथियों ने किसी गांव को कब्ज़े में लिया है, उन्होंने कहा कि "ऐसा नहीं है. आपने कोर कमांडर को सुना. उन्होंने साफ़ किया है. किसी गांव पर कब्ज़ा नहीं किया गया है."

सेना प्रमुख ने इस बात से भी इनकार किया कि चरमपंथियों या उनके संदिग्ध पाकिस्तानी सहयोगियों ने सेना के किसी बंकर या चौकी पर कब्ज़ा किया गया है.

मुश्किल हालात

कश्मीर में इस साल चरमपंथी घुसपैठ काफी बढ़ गई है.

उन्होंने कहा कि,"ऐसा नहीं है. हम उन पर चारों तरफ से दबाव बना रहे हैं और चरमपंथी घिर गए हैं. यह एक उबड़-खाबड़ जमीन है. वहां का इलाका काफी दुर्गम है. वो अंदर आ गए हैं और हम उन्हें खदेड़ देंने. इसमें समय लग सकता है."

सेना प्रमुख ने कहा कि इस तरह के अभियान में समय लगता है क्योंकि घटना सीमा पर हुई है और पाकिस्तानी सेना की चौकियां बेहद करीब हैं.

राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के एक कार्यक्रम के मौके पर उन्होंने बताया कि, "इस तरह के अभियान में समय लगता है और हम नहीं चाहते हैं कि हमारी तरफ किसी को जान गवांनी पड़े. साथ ही पाकिस्तान की चौकी भी बेहद नज़दीक है. वो हमारी चौकियों पर गोलीबारी भी कर सकते हैं. इसलिए हमें खुद को बचाते हुए ऐसे अभियान को अंजाम देना पड़ता है."

भारतीय जनरल ने बताया कि पिछले एक साल के दौरान घुसपैठ की घटनाएँ काफी बढ़ गईं हैं.

उन्होंने बताया कि, "घुसपैठ के लिहाज से यह काफी मुश्किल वक्त है. अतीत में भी घुसपैठ होती रही है. लेकिन निश्चित रूप से अब अधिक घुसपैठ हो रही है."

जारी है गोलीबारी

इस साल चरमपंथी हमलों में कई भारतीय जवानों की मौत हुई है.

इससे पहले खबर आई थी कि जम्मू क्षेत्र में 26 अक्टूबर को तीन चरमपंथियों ने एक पुलिस स्टेशन और एक सेना के कैंप पर हमला किया. उन्होंने एक आर्मी स्कूल पर भी धावा बोला.

इस बारे में पूछे जाने पर बिक्रम सिंह ने कहा कि, "नहीं. मैंने इस घटना के बारे में नहीं सुना."

खब़रो के मुताबिक कि चरमपंथियों के साथ मुठभेड़ को 11 दिन हो गए हैं. इस दौरान दोनों तरफ से गोलीबारी जारी है, लेकिन ताजा घटना में किसी के मारे जाने की खबर नहीं है.

यह घुसपैठ उस समय हुई जब केरन सेक्टर में सेना की 20 कुमायूं बटालियन की जगह 3/3 गोरखा राइफल्स ले रही थी.

दिल्ली स्थित सेना मुख्यालय ने कहा है कि चरमपंथियों के दल को सेना ने तीन तरफ से घेर रखा है.

समाचार एजेंसी पीटीआई ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि नीलम घाटी के पास चरमपंथी घुसपैठियों को मदद पहुंचाने के इरादे से पाकिस्तानी सैनिक ने 26 सितंबर की रात गोलीबारी की थी.

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