जब लालू को सुनाई गई सज़ा

  • 4 अक्तूबर 2013

चारा घोटाले के एक मामले में तीन दिन के भीतर लालू प्रसाद के तीन रंग दिखे. तीस सितंबर को दोषी ठहराए जाने के बाद सबसे पहले लालू प्रसाद को जेल भेजा गया था.

ठीक तीन दिन बाद लालू प्रसाद समेत 37 अभियुक्तों को सज़ा सुनाई गई. लालू प्रसाद को सबसे आख़िरी में सज़ा सुनाई गई.

रांची में बनाए गए ई-कोर्ट में वीडियो काफ्रेंसिंग के ज़रिए उन्हें सज़ा सुनाई गई. इधर सीबीआई कोर्ट के विशेष न्यायाधीश प्रवास कुमार सिंह थे. उधर बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा में लालू प्रसाद.

सीबीआई कोर्ट से ई-कोर्ट क़रीब पचास फर्लांग दूर है. ई-कोर्ट का हॉल वकीलों से खचाखच भरा था. पूरे कोर्ट परिसर में सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम किए गए थे. ई-कोर्ट में ठीक 2.10 बजे न्यायाधीश आए. उन्होंने गाउन पहनी. फिर अभियुक्तों की एक-एक कर पेशी कराई गई.

फ़ैसले से ख़ुश नहीं दिखे लालू

लालू प्रसाद सफ़ेद पायजामा-कुर्ता पहने थे. कोर्ट ने उन्हें सज़ा सुनाई. इस पर लालू ने अपनी प्रतिक्रिया भी व्यक्त की. उन्होंने कहा इसकी तो उन्हें पहले से आशंका थी. लालू प्रसाद ने कहा, ''मुद्दई को ही मुद्दालय बना दिया.''

टीवी के स्क्रीन पर लालू के चेहरे पर असंतोष के भाव साफ़ झलक रहे थे. वे फ़ैसले से ख़ुश नहीं दिखे. बमुश्किल पांच मिनट में उन्हें फ़ैसला सुना दिया गया. कोर्ट ने लालू की बातों को ग़ौर से सुना और कहा कि वे उच्च न्यायालय में अपील कर सकते हैं.

इससे पहले 29 सितंबर को लालू प्रसाद पटना से पूजा-पाठ कर रांची आए थे. उस दिन शांत और इत्मीनान से थे. राजद के नेताओं से ज्यादा बातें भी नहीं की थी. मीडिया से भी कम ही बोले थे.

30 सितंबर को कोर्ट में पेशी से पहले भी पूजा-ध्यान करके निकले थे. उस दिन भी वह सफ़ेद कुर्ता-पाजामा और ब्लैक स्लीपर पहने थे.

जगदीश शर्मा भी मायूस थे

जगन्नाथ मिश्रा को जिस दिन जेल भेजा गया था उसी दिन उन्हे अस्पताल में भर्ती करना पड़ा.उन्हे चार साल की सज़ा मिली है.

लालू प्रसाद से पहले आर के राणा, डॉ. जगन्नाथ मिश्र, बिहार के जहानाबाद से जदयू के सांसद जगदीश शर्मा को सज़ा सुनाई गई. डॉ जगन्नाथ मिश्र वीडियो कांफ्रेंसिंग में उपस्थित नहीं थे. दरअसल जिस दिन वह जेल भेजे गए थे, उसी दिन उनकी तबीयत ख़राब हो गई थी. तब उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया. आरके राणा सज़ा सुनने के बाद चुपचाप चले गए.

सांसद जगदीश शर्मा ने पहले हाथ जोड़कर न्यायाधीश का अभिवादन किया. उन्हें सज़ा सुनाई गई. तब शर्मा ने कोर्ट से गुज़ारिश की कि उनका कोई क़ुसूर नहीं है.

कोर्ट ने सबसे पहले आपूर्तिकर्ताओं को एक-एक कर सज़ा सुनाई. इसके बाद पशुपालन विभाग के अफ़सरों की बारी आई. इस मामले में दोषी ठहराए गए एक आपूर्तिकर्ता मो सईद और उनके चार बेटे एक साथ उपस्थित हुए. सभी को सज़ा सुनाई गई. इसके बाद कोर्ट ने सभी तत्कालीन आइएएस को बुलाने को कहा.

हर किसी की नज़र लालू पर

जब फ़ैसला सुनाया जा रहा था, तो हर किसी की नज़र लालू प्रसाद पर थी. फ़ैसला आने के बाद कोर्ट परिसर में लालू की ही चर्चा होती रही. अधिकतर जुबान पर यही था- पांच साल, 25 लाख. कोई पूछता कि जगदीश शर्मा, डॉ जगन्नाथ का क्या हुआ, जवाब दिया जाता: अरे भई, जगदीश-जगन्नाथ का जो होना था हुआ, यहां तो मामला लालू का है.

भागवद् गीता की भी चर्चा

लोग इसकी भी चर्चा कर रहे थे कि रघुवंश बाबू (डॉ रघुवंश प्रसाद सिंह, राजद सांसद) ने लालू जी को जेल में भागवद् गीता पहुंचा दिया है, अब वे इत्मीनान से पढ़ें. सज़ा को लेकर वकीलों के बीच भी चर्चा होती रही. कोई पांच साल तो कोई चार साल का दावा करता. तमाम अटकलों-क़यासों के बीच घड़ी की सुई आगे बढ़ती गई. क़रीब ढाई बजे फ़ैसला सरे आम हो गया.

राजद नेताओं में गहमागहमी

रांची की सीबीआई अदालत ने लालू प्रसाद समेत 44 आरोपियों को सज़ा सुनाई है.

कोर्ट परिसर में सुबह से ही गहमागहमी थी. हालांकि राजद के बड़े नेता कोर्ट में नहीं आए थे. बिहार से राजद के विधायक भाई दिनेश और झारखंड के राजद विधायक संजय कुमार सिंह यादव ज़रूर दिखे.

विधायकों ने कहा कि फ़ैसला जो भी आए, राजद उसका डटकर मुक़ालबा करेगा. संजय कुमार सिंह यादव के मुताबिक़ लालू प्रसाद पर जब-जब संकट आता है, वह मज़बूत होकर उभरते हैं. उन्होंने कहा कि राजद का पूरा कुनबा लालू जी के साथ है.

संजय ने कहा कि उनकी पार्टी विरोधियों की साज़िश का चुनाव में जवाब देगी. हालांकि कोर्ट परिसर में कार्यकर्ताओं ने विरोध-समर्थन में किसी प्रकार की नारेबाज़ी नहीं की. जिस दिन लालू प्रसाद को जेल भेजा जा रहा था, तो कार्यकर्ता उनकी गाड़ी के सामने लेट गए थे.

उनके समर्थन में नारे भी खूब लगाए थे. राजद के सेकेंड लाइन के स्थीनाय नेता आख़िरी तक जमे थे. फ़ैसला सुनने के बाद वे निराश थे. लेकिन उनका कहना था कि लालू विपरीत परिस्थितियों में संघर्ष करके ही आगे बढ़े हैं.

मीडिया वालों का भी जमावड़ा लगा था. राजद के सांसद रहे अधिवक्ता राजनीति प्रसाद भी आए थे. उन्होंने कहा कि लालू प्रसाद ने ही चारा घोटाले के मामलों में जांच के आदेश दिये थे, और उन्हीं को फंसा दिया गया.

लालू प्रसाद के वकील सुरेंद्र सिंह सीबीआई कोर्ट में अपना पक्ष रखने आए, तो कोर्ट के सामने भारी भीड़ जुट गई. सुरेंद्र सिंह ने मीडिया को कोर्ट में रखे गए पक्ष से अवगत कराया. इसके बाद सीबीआइ के वरीय लोक अभियोजक बीएमसिंह कोर्ट से निकले. उन्होंने सीबीआइ का पक्ष बताया.

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