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'दागी' अध्यादेश संकट से कैसे उबरेगी कांग्रेस?

 शुक्रवार, 27 सितंबर, 2013 को 22:40 IST तक के समाचार
राहुल गाँधी

कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गाँधी ने 'दाग़ी सांसदों और विधायकों' पर यूपीए सरकार के अध्यादेश को बकवास करार दिया है और इसे फाड़ देने की बात कही है.

दरअसल इस अध्यादेश के ख़िलाफ़ ज़मीन पर एक उबाल था और कांग्रेस पार्टी को इसका एहसास होना शुरू हो गया था.

भारतीय जनता पार्टी, पहले अध्यादेश के समर्थन में थी. उसने इस बात को समझ लिया लेकिन जब कैबिनेट ने अध्यादेश पारित कर दिया तो उसने अपना पैंतरा बदल लिया.

राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को इस बारे में चिंता थी. इसीलिए उन्होंने तीन संबंधित मंत्रियो को बुलाया उनसे इस बारे में चर्चा की और अपना पक्ष रखा.

उन्होंने अपना पक्ष पार्टी की लीडरशिप को बताया.

कांग्रेस को फ़ायदा

दूसरा ये कि राहुल गाँधी ने प्रेस वार्ता में जो कहा उससे निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि यह अध्यादेश अब नहीं आएगा.

लेकिन जिस भाषा का इस्तेमाल हुआ है. उसे प्रधानमंत्री की शान में गुस्ताखी समझा जा सकती है.

मनमोहन सिंह

यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ है जब प्रधानमंत्री विदेश में हैं

इसलिए राहुल गाँधी को दोबारा इस मुद्दे पर चर्चा करनी पड़ेगी और शायद यह स्पष्टीकरण देना पड़ेगा कि उनकी जो टिप्पणियां थीं वो प्रधानमंत्री या किसी मंत्री के ख़िलाफ़ नहीं थीं, ये सिर्फ़ अध्यादेश के विरोध में थीं.

क्लिक करें राहुल गाँधी ने जिस तरह की भाषा का इस्तेमाल किया है. उसके बारे में कहा जा सकता है कि कभी-कभी राजनीति जीवन में ऐसी बातें हो जाती हैं.

इस निष्कर्ष से बहुत ज़्यादा लोग संतुष्ट होंगे कि अध्यादेश नहीं आ रहा है.

इस अध्यादेश से लोगों में संदेश चला जाता कि कांग्रेस पार्टी बहुत भ्रष्ट है और राजनीति में अपराधी तत्वों का संरक्षण करना चाहती है.

तो एक हद तक कांग्रेस पार्टी को जो नुकसान होना था, उसकी कुछ हद तक भरपाई होगी.

लेकिन इसका जो दूसरा नुकसान है, वह यह है कि 'दाग़ी सांसदों और विधायकों' वाले अध्यादेश को कैबिनेट ने पास किया था. उसमें प्रधानमंत्री, क़ानून मंत्री और अन्य मंत्रियों की सहमति थी.

यह देखना होगा कि वे इस हस्तक्षेप को किस तरीके से लेते हैं? अगर मन में कोई रोष और खटास है तो पार्टी उसका क्या उपाय निकालती है?

अभी तो सबसे महत्वपूर्ण बिंदु यही है. इसके चलते मेरा यह मानना है कि अभी भी हमने विवाद के अंतिम शब्द नहीं सुने हैं.

प्रणव मुखर्जी

राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने अभी इस अध्यादेश को रोक रखा है

राहुल गाँधी की प्रेस वार्ता के नाटकीय घटनाक्रम के फ़ायदे-नुकसान की अगर बात करें तो जनता की नज़र में कांग्रेस फायदे में रहेगी.

संकट

मैंने सीपीआई के जे गुरुदास दास गुप्ता को कहते हुए सुना कि "देर से बोले लेकिन बोले तो ठीक हैं".

बीजेपी इसके विरोध का पूरा श्रेय लेना चाहती थी. प्रधानमंत्री का नाम लिए बिना बीजेपी ने कहा कि ये उनकी शान में गुस्ताखी है.

इसे पूरी सरकार और उसकी कैबिनेट पर कटाक्ष माना जा सकता है.

एक मुश्किल ये है कि सारा घटनाक्रम उस वक़्त हुआ है, जब प्रधानमंत्री देश में नहीं हैं.अपनी विदेश यात्रा पर वो संयुक्त राष्ट्र की आम सभा को संबोधित करने वाले हैं.

उनकी अन्य देशों के प्रमुखों के साथ बातचीत होने वाली है- बराक ओबामा के साथ, नवाज़ शरीफ़ के साथ और बांग्लादेश की प्रधानमंत्री के साथ.

अब यह देखना है कि कांग्रेस पार्टी इस संकट से कैसे निजात पाती है? सरकार कैसे निजात पाएगी? क्योंकि कांग्रेस के लिए यह क्लिक करें संकट वाली स्थिति है.

(बीबीसी संवाददाता रूपा झा से बातचीत पर आधारित)

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