गुजरात कम विकसित राज्य: रघुराम राजन समिति

  • 26 सितंबर 2013
रघुराम राजन समिति ने राज्यों को विशेष दर्जा देने के चलन को ख़त्म करने का सुझाव दिया है.

रघुराम राजन समिति ने ग़रीब राज्यों को अतिरिक्त सहायता देने के लिए उन्हें विशेष दर्जा देने वाले मापदंडों को ख़त्म करने और देश के 28 राज्यों को सबसे कम विकसित, कम विकसित और अपेक्षाकृत विकसित राज्यों की श्रेणी में बांटने का सुझाव दिया है.

इस रिपोर्ट के मुताबिक गोवा और केरल अपेक्षाकृत विकसित और ओडिशा और बिहार सबसे कम विकसित राज्य हैं. गुजरात कम विकसित राज्यों की श्रेणी में शामिल है.

बिहार के विशेष दर्जे की मांग के मद्देनज़र सरकार ने इस समिति का गठन किया था. अगर सरकार इस समिति के सुझावों को मंज़ूरी दे देती है तो इसका मतलब होगा कि केंद्रीय राशि का ज़्यादा हिस्सा सबसे कम विकसित राज्यों को मिलेगा.

समिति के अध्यक्ष तत्कालीन मुख्य आर्थिक सलाहकार और मौजूदा रिज़र्व बैंक गवर्नर रघुराम राजन थे.

समिति से विभिन्न मानदंडों का इस्तेमाल कर पिछड़े राज्यों की पहचान के लिए तरीके सुझाने को कहा गया था.

'ज़रूरत और प्रदर्शन हो आधार'

रघुराम राजन
राजन समिति ने कहा है कि राज्यों को पैसा विकास ज़रूरतों और उनके प्रदर्शन के आधार पर दिया जाना चाहिए.

समिति ने राज्यों को धन देने के लिए एक नई प्रणाली सुझाई है जो बहुआयामी सूचकांक प्रणाली यानी मल्टीडाइमेंशनल इंडेक्स, एमडीआई पर आधारित है. इस सूचकांक के आधार पर ही राज्यों को तीनों श्रेणियों में बांटा गया है.

रिपोर्ट के बारे ज़्यादा जानकारी वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने गुरुवार को एक बयान जारी कर दी.

उन्होंने बताया कि रघुराम राजन समिति ने केंद्र द्वारा राज्यों को धन देने का जो तरीका सुझाया है वो राज्यों की विकास ज़रूरतों और विकास के क्षेत्र में उनके प्रदर्शन पर निर्भर करेगा.

समिति का प्रस्ताव है कि हर राज्य को राज्यों के लिए तय की गई कुल राशि का 0.3 प्रतिशत फिक्स्ड फंड मिलना चाहिए.

इसके अलावा राज्य की ज़रूरत और प्रदर्शन के हिसाब से और धन दिया जाएगा.

पी चिदंबरम का कहना था कि राज्यों के पिछड़ेपन को तय करने वाला सूचकांक एनएसएसओ की मापी गई प्रति व्यक्ति खपत और ग़रीबी अनुपात जैसे मापदंडों पर आधारित है.

तीन श्रेणियों में बंटवारा

समिति का प्रस्ताव है कि इस सूचकांक पर जिन राज्यों के अंक 0.6 या उससे ज़्यादा हों उन्हें सबसे कम विकसित, 0.6 से कम लेकिन 0.4 से ज़्यादा अंक वाले राज्यों को कम विकसित और 0.4 से कम अंक वाले राज्यों को अपेक्षाकृत अधिक विकसित वर्ग में डाला जाना चाहिए.

समिति का मानना है कि विभिन्न राज्यों की धन और विशेष दर्जे की मांग, 0.3 प्रतिशत फ़िक्सड फंड और सबसे कम विकसित राज्यों की श्रेणी में वर्गीकरण के दोहरे सुझाव से पूरी हो जाएगी.

एमडीआई के आधार पर समिति ने अरुणाचल प्रदेश, असम, बिहार, छत्तीसगढ़, झारखंड, मध्य प्रदेश, मेघालय, ओडिशा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश को सबसे कम विकसित राज्यों की श्रेणी में डाला है.

गोवा, केरल, तमिलनाडु, पंजाब, महाराष्ट्र, उत्तराखंड और हरियाणा सबसे ज़्यादा विकसित राज्य हैं.

वित्त मंत्री ने ये भी कहा है कि प्रधानमंत्री ने आर्थिक मामलों के विभाग से समिति के सुझावों पर विचार करने और ज़रूरी कदम उठाने का आदेश दिया है.

प्रतिक्रिया

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने रघुराम राजन समिति की रिपोर्ट का स्वागत किया है.

उन्होंने कहा, "बिहार सबसे कम विकसित राज्यों की सूची में है तो अब हमारे साथ कोई अन्याय नहीं हो सकेगा. जो कुछ भी किया गया है उससे हम लोगों को लाभ मिलेगा. बिहार विकास के मामले में ज़्यादा सहायता प्राप्त कर सकेगा. आज के बाद भी हम चैन से नहीं बैठेंगे. आगे भी हम अपनी बात रखेंगे."

नीतीश कुमार ने ये भी कहा, "सबसे बड़ी बात ये है कि सिद्धांत के रूप में इस नीति को स्वीकार कर लिया गया कि देश के जो सबसे पिछड़े इलाके हैं उनको ऊपर उठाने के लिए विशेष पहल की जाएगी."

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्य को विशेष दर्जे का दर्जा दिलाने के लिए इसी साल मार्च में दिल्ली में रैली की थी.

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