डिजिटल इंडियंस: आखिरी हैंगआउट आज

  • 25 सितंबर 2013
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बीबीसी डिजिटल इंडियंस

बीबीसी की ख़ास सिरीज़ डिजिटल इंडियंस का अंतिम सप्ताह चल रहा है. हमने भारत में ऑनलाइन की शुरुआत और उसकी बढ़त की कहानी आप तक पहुँचाई और साथ ही बताया उन पाँच भारतीयों के बारे में जिन्होंने इंटरनेट की दुनिया में कुछ अलग किया है.

इसी कड़ी में बुधवार 25 सितंबर को भारतीय समयानुसार रात 8.15 बजे हम इस सिरीज़ का अंतिम गूगल हैंगआउट आयोजित करने जा रहे हैं. 45 मिनट तक चलने वाले इस हैंगआउट में डिजिटल इनोवेटर्स से आपकी मुलाक़ात होगी.

आपके पास ये मौक़ा है उन विशेषज्ञों से सवाल पूछने का.

तो अगर आप एक सफल सॉफ़्टवेयर इंजीनियर बना चाहते हैं या अपना ऑनलाइन मीडिया बिज़नेस चलाना चाहते हैं, आप नीचे दिए फ़ॉर्म पर अपने सवाल लिखकर भेज सकते हैं.

आप अपने सवाल @BBCHindi या @BBCIndia पर ट्वीट कर सकते हैं या फिर बीबीसी हिंदी के फ़ेसबुक पेज पर आकर सवाल पोस्ट कर सकते हैं. अगर आप चाहें तो अपने संपर्क की जानकारी भी यहाँ दे सकते हैं.

आप बीबीसी इंडिया के गूगल प्लस पेज और यूट्यूब पर ये हैंगआउट लाइव देख सकेंगे.

इस हैंगआउट में शरीक़ हो रहे डिजिटल इंडियंस:

बेन गोम्स- सर्च की दुनिया में एक इनोवेटर हैं. गूगल में सर्च के वाइस प्रेसिडेंट हैं. गूगल में हर महीने लगभग 100 अरब सर्च होते हैं, यानी हर दिन तीन अरब से भी ज़्यादा. जब लोग सर्च में कुछ टाइप कर रहे होते हैं तो गूगल जो सुझाव के तौर पर ड्रॉपडाउन में जो चीज़ें दिखा रहा होता है उसके लिए भी वही ज़िम्मेदार हैं.

मरियम एम मैथ्यू- मनोरमा ऑनलाइन की मुख्य ऑपरेटिंग अधिकारी हैं. मनोरमा ऑनलाइन केरल के मलयाला मनोरमा ग्रुप का डिजिटल हिस्सा है. वह इस समूह के अख़बार की वेबसाइट देखती हैं. मलयाला मनोरमा भारत का सबसे बड़ा क्षेत्रीय भाषा का अख़बार है.

राजू नारिसेट्टी- न्यूज़ कॉर्प के वरिष्ठ उपाध्यक्ष और स्ट्रैटेजी उप प्रमुख हैं. वे वॉल स्ट्रीट जर्नल डॉटकॉम पर उपलब्ध डिजिटल सामग्री के लिए ज़िम्मेदार हैं. इससे पहले वे वॉशिंगटन पोस्ट के मैनेजिंग एडिटर रह चुके हैं जहाँ उन्होंने पूरे न्यूज़रूम के काम-काज का तरीक़ा बदल दिया. वह भारतीय अख़बार मिंट के संस्थापक संपादक भी थे.

रुचि सांघवी- इस समय फ़ाइल शेयर करने वाली वेबसाइट ड्रॉपबॉक्स की वाइस प्रेसिडेंट हैं. वह फ़ेसबुक की पहली महिला इंजीनियर थीं. उन्होंने फ़ेसबुक की न्यूज़ फ़ीड पर काम किया. 2010 में उन्होंने फ़ेसबुक छोड़ा और एक साल बाद अपनी कंपनी शुरू की. फिर 2012 में ड्रॉपबॉक्स में काम शुरू किया.

संजीव बिखचंदानी- भारत में नौकरी खोजने वाली वेबसाइट नौकरी डॉ़टकॉम के संस्थापक. इसके साथ ही उन्होंने शादी की वेबसाइट और ज़मीन या मकान खोजने की वेबसाइट भी बनाई. अब वह अपना अधिकतर समय इंटरनेट की दुनिया में कुछ नया काम करने वालों के साथ बिताते हैं.

रिकिन गाँधी- उन्होंने डिजिटल ग्रीन नाम की वेबसाइट बनाई है, जो एक ग़ैर सरकारी संस्था है. वे किसानों के साथ काम करके उनके छोटे-छोटे वीडियो बनाते हैं. उन वीडियो में किसान खेती से जुड़ी अपनी समस्याएँ और उसे दूर करने के अपने अनुभव लोगों के साथ बाँटते हैं.

आपके हिसाब से भावी भारत के डिजिटल इंडियंस कौन हैं? क्या आपके पास इन विशेषज्ञों से जुड़ा कोई सवाल है? आप अपने सुझाव, टिप्पणियाँ या सवाल नीचे दिए फ़ॉर्म में भेज सकते हैं-