दिल्ली गैंगरेप: छिन सकता है एपी सिंह का लाइसेंस

  • 16 सितंबर 2013
दिल्ली गैंगरेप, delhi gangrape
उनके बयान को दिल्ली गैंगरेप मामले में 23 वर्षीया पीड़िता से जोड़कर देखा जा रहा है.

दिल्ली बार काउंसिल के उपाध्यक्ष राकेश शेरावत ने बीबीसी को बताया है कि दिल्ली गैंगरेप मामले में बचाव पक्ष के वकील एपी सिंह का बयान 'पेशेवर के तौर पर अनुचित आचरण' को दर्शाता है.

शेरावत का कहना है कि अगर एपी सिंह दोषी साबित होते हैं, तो उन्हें अपना बार लाइसेंस उम्र भर के लिए गंवाना पड़ सकता है.

एपी सिंह के उस बयान से काफ़ी विवाद हुआ मचा जिसमें उन्होंने कहा था कि, “अगर मेरी बेटी शादी से पहले किसी के साथ सेक्स करती या देर रात तक अपने ब्वॉयफ्रेंड के साथ घूमती तो मैं उसे ज़िंदा जला देता.”

उन्होंने बीबीसी को सोमवार को बताया कि उनके निजी विचारों को संदर्भ से हटकर पेश किया जा रहा है.

एपी सिंह ने कहा, “एक निजी मामले में मेरी राय मांगी गई थी और घर का मुखिया होने के नाते मैंने निजी तौर पर उसका जवाब दिया था.”

उन्होंने कहा, “मेरा बयान गैंगरेप मामले के संदर्भ में नहीं था और इसे तोड़-मरोड़ के पेश किया गया था.”

एपी सिंह ने पिछले साल हुए दिल्ली सामूहिक बलात्कार मामले दो अभियुक्तों की पैरवी की. इस मामले के कुल छह में से चार दोषियों को हाल में मौत की सज़ा सुनाई गई.

विवादित बयान

दिल्ली गैंगरेप मामले में दोषी पाए गए अक्षय ठाकुर और विनय शर्मा के वकील रहे एपी सिंह ने ये विवादास्पद बयान शुक्रवार को इसी मामले पर फ़ैसले के बाद अदालत के बाहर दिए.

उनके बयान को दिल्ली गैंगरेप मामले में 23 वर्षीया पीड़िता से जोड़कर देखा जा रहा है.

दिल्ली बार काउंसिल के उपाध्यक्ष राकेश शेरावत ने बीबीसी को बताया, “एपी सिंह की टिप्पणियां बेहद आपत्तिजनक है. ये एक पेशेवर के तौर पर अनुचित आचरण दर्शाती हैं.”

उन्होंने कहा, “एक वकील होने के नाते उन्हें अपने पद की गरिमा बनाए रखनी चाहिए थी. हमें इस तरह के मामलों पर बयान देने से पहले काफी सावधानी बरतनी चाहिए. खासकर तब, जब पूरी दुनिया हमें देख रही हो.”

शेरावत का कहना है कि एपी सिंह के बयान से अन्य वकीलों में भी रोष है.

25 सदस्यों वाली दिल्ली बार काउंसिल शुक्रवार को बैठक कर इस मामले पर चर्चा करेगी. शेरावत का कहना है कि एपी सिंह के दोषी पाए जाने पर उनका बार लाइसेंस निरस्त कर दिया जाएगा.

गुस्सा और प्रदर्शन

पिछले साल दिसंबर को दिल्ली में हुए गैंगरेप के मामले ने देशभर में महिलाओं के खिलाफ अपराधों को चर्चा में ला दिया था. भारत के कई हिस्सों में जबरदस्त विरोध प्रदर्शन हुए थे.

इसी मामले के बाद मार्च में ऐसे अपराधों के लिए विशेष कानून भी लागू किए गए जिसमें दोषी पाए गए लोगों को मौत की सज़ा का प्रावधान भी है.

दिल्ली की फास्ट ट्रैक कोर्ट ने अक्षय ठाकुर, मुकेश सिंह, पवन गुप्ता और विनय शर्मा को दिल्ली गैंगरेप मामले में दोषी पाया था और फिर मौत की सज़ा भी सुनाई.

इसी मामले में एक अभियुक्त राम सिंह तिहाड़ जेल में मृत पाए गए थे. जेल अधिकारियों ने राम सिंह की मौत को आत्महत्या बताया था, लेकिन राम सिंह का परिवार इसे हत्या बताता है.

इसी मामले में एक नाबालिग दोषी को तीन साल की सज़ा सुनाई गई थी. भारतीय कानून के तहत तीन साल की क़ैद नाबालिगों को दी जाने वाली सबसे कड़ी सज़ा है.

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