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ज़रदारी पर लग रही हैं करोड़ों की शर्तें

 रविवार, 15 सितंबर, 2013 को 06:48 IST तक के समाचार
नरेंद्र मोदी

प्रधानमंत्री पद के लिए मोदी की उम्मीदवार को मिली हरी झंडी, दिल्ली सामूहिक बलात्कार मामला और इसमें आए अदालती फैसले की गूंज भारतीय के ऊर्दू अखबारों मे रही, वहीं पाकिस्तानी अखबारों में तालिबान से बातचीत की तैयारी और कराची के हालात लगातार सुर्खियों में बने हुए हैं.

दिल्ली सामूहिक बलात्कार मामले पर दैनिक 'इंकलाब' ने लिखा है कि चारों दोषियों को सज़ा-ए-मौत देकर विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट ने न सिर्फ इंसाफ के तकाजों को पूरा किया है, बल्कि अपने फैसले से ये भी संदेश दिया है कि बलात्कार जैसे घिनौने जुर्म को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. अखबार लिखता है कि ये फैसला जितना संतोषजनक है, मौजूदा हालात में उतना ही ज़रूरी भी है.

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'राष्ट्रीय सहारा' ने लिखा है कि पुलिस की सख़्त निगरानी, समाज के तीव्र दबाव और मीडिया की मुहिम के बावजूद यौन अपराध थमने का नाम नहीं ले रहे हैं. आए दिन इस तरह की ख़बरों से अखबार भरे होते हैं. ऐसे में अदलत के फैसले ने लोगों को राहत की सांस लेने पर मजबूर किया है.

प्रधानमंत्री पद के लिए भाजपा की तरफ से नरेंद्र मोदी की उम्मीदवार की सभी अखबारों में चर्चा है. दैनिक 'सहाफत' ने अपने संपादकीय में लिखा है कि आम चुनाव अगले साल होना है. किसकी सरकार बनेगी, ये तो नतीजों से तय होगा. इसलिए अभी से ये बात करना समय की बर्बादी है कि प्रधानमंत्री कौन बनेगा.

अखबार कहता है कि इस मुद्दे पर कांग्रेस से ज़्यादापरेशान नरेंद्र मोदी और उनके समर्थन नजर आ रहे हैं. उन्हें लग रहा है कि मोदी के नाम पर फैसला होने से वो आधे प्रधानमंत्री अभी से हो जाएंगे.

'हिंदुस्तान एक्स्प्रेस' ने अपने संपादकीय में लिखा है, "आरएसएस की कोशिशों के बावजूद बीजेपी में मोदी के मुद्दे पर आम सहमित नहीं हो पाई है. बीजेपी के महारथी लाल कृष्ण आडवाणी मोदी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार मानने को तैयार नहीं हैं."

मुज़फ़्फ़रनगर में कर्फ्यू

मुजफ्फरनगर में कर्फ्यू

मुज़फ़्फ़रनगर में हुई हालिया सांप्रदायिक हिंसा पर 'राष्ट्रीय सहारा' ने अपने संपादकीय में गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे की इस आशंका का हवाला दिया कि इसके पीछे राजनीतिक पार्टियों का हाथ हो सकता है.

अखबार ने आरोप लगाया है कि इस बात से कौन इनकार कर सकता कि भगवा ताकतों ने सत्ता हासिल करने के लिए हमेशा नफरत फैलाने वाले मुद्दों का सहारा लिया है. हालांकि बीजेपी जैसी पार्टियां ऐसे आरोपों से इनकार करती हैं और दावा करती हैं कि वो विकास के एजेंडे पर चुनाव लड़ती हैं.

रुख पाकिस्तान अखबारों का करें तो कराची से छपने वाले दैनिक 'इंसाफ' में मुज़फ़्फ़रनगर से जुड़ी एक तस्वीर छपी जिसमें कर्फ्यू के दौरान कुछ लोग सुरक्षाकर्मियो से उलझ रहे हैं. इसी के साथ खबर है कि तनाव तेजी मुज्ज्फरनगर के आसपास के अन्य जिलों तक भी फैल गया जिसके बाद वहां कर्फ्यू लगाया गया.

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"पूर्व राष्ट्रपति ज़रदारी पद छोड़ने के बाद देश में ही रहेंगे या विदेश चले जाएंगे, इस बारे में करोड़ों रुपये की शर्तें लग रही हैं."

पाकिस्तानी अखबार इंसाफ

पाकिस्तान में नई सरकार इन दिनों तालिबान चमरपंथियों से बातचीत की दिशा में आगे बढ़ रही है. इस पर 'नवाए वक्त' ने संपादकीय लिखा है कि सरकार ये साफ करे कि अगर ये बातचीत नाकाम रहती है तो उसकी रणनीति क्या होगी.

अखबार लिखता है कि हर कोई दहशतगर्दी से निजात पाना चाहता है क्योंकि इस नासूर ने पाकिस्तानी सुरक्षा बलों के अफसरों, जवानों और देश के राजनीतिक नेतृत्व समेत सबको निशाना बनाया है और अब तक इसमें 40 हज़ार से ज़्यादा लोग मारे जा चुके हैं. इसलिए इससे निपटना किसी भी सरकार के लिए प्राथमिकता होगी. लेकिन अखबार कहता है कि अब तक की स्थिति का जायज़ा लें तो बातचीत से दहशतदर्गी खत्म होती नहीं नजर नहीं आती है.

कराची के हालात लगातार चिंतानजक बनाए हुए हैं. अब भी वहां से खून खराबे की खबरें आ रही हैं. हिंसा से निपटने के लिए सैन्य ऑपरेशन की तैयारियों के बीच अखबारों में मुत्तेहिदा कौमी मूवमेंट के लिए मुखिया अल्ताफ हुसैन का ये बयान है कि ऑपरेशन उनकी पार्टी के ख़िलाफ़ है.

कराची का हाल

आसिफ अली ज़रदारी और बिलावल भुट्टो

इस पर दैनिक 'उम्मत' ने संपादकीय लिखा है, "मुत्तेहिदा अपनी ताकत का सकारात्मक इस्तेमाल करे." अखबार का कहना है कि इस हकीकत को स्वीकार किए बिना कराची में कभी शांति कायम नहीं हो सकती कि इस शहर से राष्ट्रीय और प्रांतीय असेंबली की सबसे ज़्यादासीटें मुत्तेहिदा जीतती है इसलिए उसी पर अशांति फैलाने की सबसे ज़्यादाजिम्मेदारी डाली जाती है.

अखबार के मुताबिक अपने एक कार्यकर्ता की गिरफ्तारी पर कराची समेत कई शहरों में आम जनजीवन को ठप कर सड़कों पर आग लगाने और कई गाडियों को जलाने की कार्रवाई को कोई कैसे उचित ठहराया जा सकता है.

'आजकल' में छपे एक कार्टून में एमक्यूएम पर कटाक्ष किया गया है जिसमें कराची के मुद्दे पर सर्वदलीय बैठ रहे प्रधानमंत्री नवाज शरीफ और अऩ्य नेताओं के ऊपर से हवा में अल्ताफ हुसैन को अपने मुंह से उनके ऊपर मिसाइल दागते दिखाया गया है.

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"आम चुनाव अगले साल होना है. किसकी सरकार बनेगी, ये तो नतीजों से तय होगा. इसलिए अभी से ये बात करना समय की बर्बादी है कि प्रधानमंत्री कौन बनेगा."

ऊर्दू अखबार सहाफत

पिछले दिनों पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना की पुण्यतिथि पर वहां 'कायद दिवस' मनाया गया. दैनिक 'खबरें' ने इस मौके पर पाकिस्तान के मौजूदा हालात पर एक कार्टून के जरिए कटाक्ष किया, जिसमें दीवार पर जिन्ना की तस्वीर लगी है उसके पास ही कचरे की टोकरी रखी है जो एकजुटता, ईमान और संगठन संस्थाएं जैसे चीजों से भरी पड़ी है.

दैनिक 'इंसाफ' की खबर है ज़रदारी पर शर्तें लग गईं. अखबार लिखता है कि पूर्व राष्ट्रपति पद छोड़ने के बाद देश में ही रहेंगे या विदेश चले जाएंगे, इस बारे में करोड़ों रुपये की शर्तें लग रही हैं.

अखबार के अनुसार ज़्यादातर लोगों का कहना है कि ज़रदारी अपने ख़िलाफ़ दर्ज मुकदमों के मद्देनजर देश छोड़ देंगे, जबकि कुछ लोगों का कहना है कि अपनी पार्टी में नई जान फूंकने और उसका भविष्य चमकाने के लिए ज़रदारी पाकिस्तान में ही रहेंगे. इस मसले पर लोगों ने करोड़ों की शर्तें लगा ली है.

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