'मोदी की उम्मीदवारी' पर बयानबाज़ी, आडवाणी पर कटाक्ष

  • 12 सितंबर 2013
सुशील मोदी-नरेन्द्र मोदी (फ़ाइल)
मोदी मामले में एलके आडवाणी के खिलाफ़ सीधे तौर पर बोलने सुशील कुमार पहले बड़े बीजेपी नेता हैं.

भारतीय जनता पार्टी में एक समय लालकृष्ण आडवाणी के क़रीबी समझे जाने वाले बिहार के पूर्व उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहा है कि नरेंद्र मोदी मामले में आडवाणी जनता के मूड को पढ़ पाने में असक्षम रहे हैं.

बुधवार को अपने ट्विटर संदेश में सुशील कुमार मोदी ने कहा, “आडवाणी जी आम लोगों की भावनाओं को समझने में नाकाम रहे हैं. आडवाणीजी ने खुद ही अटल बिहारी वाजपेयी का नाम प्रधानमंत्री पद की उम्मीदवारी के लिए सुझाया था. अब उन्हें ऐसा ही नमो (नरेंद्र मोदी) के लिए करना चाहिए.”

बिहार बीजेपी विधायक दल के नेता सुशील मोदी ने गुरूवार को टेलीविज़न चैनल सीएनएन-आईबीएन को दिए गए एक इंटरव्यू में कहा कि उन्होंने अपने चार दशक के राजनीतिक सफ़र में किसी नेता के लिए इस तरह का अपार समर्थन नहीं देखा है और लोग चाहते हैं कि मोदी की उम्मीदवारी की घोषणा जल्द से जल्द की जाए .

अंतरकलह

पिछले दिनों ऐसी ख़बरें आती रही हैं कि भारतीय जनता पार्टी में प्रधानमंत्री पद की उम्मीदवारी पर भारी अंतर कलह है और लालकृष्ण आडवाणी और उनके गुट के माने जाने वाले कुछ नेता गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की उम्मीदवारी की घोषणा का विरोध कर रहे हैं.

इस गुट का ये कहना है कि नरेंद्र मोदी के नाम की घोषणा नवंबर में होने वाले विधानसभा चुनावों के बाद किए जाए.

जबकि समाचार है कि बीजेपी के पैतृक संगठन राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ भी चाहता है कि प्रधानमंत्री पद की उम्मीदवारी के लिए नरेंद्र मोदी के नाम की घोषणा जल्द से जल्द की जाए.

बुधवार को बीजेपी अध्यक्ष राजनाथ सिंह और लालकृष्ण की दिल्ली में हुई एक भेंट के बारे में भी यही कहा गया कि ये प्रधानमंत्री पद की उम्मीदवारी पर उलझ गई गुत्थी को सुलझाने की एक और कोशिश थी.

बयान

समचार एजेंसियों ने सूत्रों के हवाले से ये भी दावा किया है कि आडवाणी का ये तर्क है कि विधानसभा चुनावों से पहले नरेंद्र मोदी के नाम की घोषणा से पार्टी को नुकसान होगा.

उनका कहना है कि गुजरात के मुख्यमंत्री के नाम की घोषणा से वोटरों में सीधा बंटवारा हो जाएगा जो पार्टी के लिए ठीक नहीं होगा.

आडवाणी के विरोधी धड़े और कुछ राजनीतिक समीक्षकों का कहना है कि आडवाणी के विरोध के पीछे उनकी अपनी महत्वकांज्ञा है. उन लोगों का कहना है कि वो ख़ुद प्रधानमंत्री पद पाने का सपना रखते हैं इसलिए पार्टी के जरिए किसी और के नाम का एलान किए जाने का विरोध कर रहे हैं.

हालांकि बीजेपी के वरिष्ठ नेता सुब्रह्मण्यम स्वामी का कहना है कि एलके आडवाणी पर इस तरह का आरोप लगाना ग़लत है.

अपने ट्वीट में सुब्रह्मण्यम स्वामी ने लिखा है, "साल 1996 में आडवाणी प्रधानमंत्री पद के लिए सबसे पसंदीदा उम्मीदवार थे. लेकिन तब उन्होंने एक बलिदान दिया था. ये कहना ग़लत होगा कि इस मामले में उनकी प्रधानमंत्री पद पाने की इच्छा है."

हालांकि पार्टी के प्रवक्ता मुख्तार अब्बास नक़वी ने कहा कि पार्टी में इस बात को लेकर किसी तरह का मतभेद नहीं है और उम्मीदवार के नाम की घोषणा जल्द की जाएगी.

फिलहाल कहा जा रहा है कि इस मामले पर एलान शुक्रवार को हो सकता है.

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