दिल्ली गैंगरेप: दोषियों की सज़ा पर बहस शुरू

  • 11 सितंबर 2013
 दिल्ली, गैंगरेप, फांसी, सज़ा, दिल्ली गैंगरेप, अदालत, फ़ैसला, अभियुक्त, 16 दिसंबर

चलती बस में सामूहिक बलात्कार के चार दोषियों की सज़ा को लेकर दिल्ली की अदालत में बहस शुरू हो चुकी है और सरकारी वकील ने इन सभी के लिए मौत की सज़ा की मांग की है.

मंगलवार को अदालत ने चारों को सामूहिक बलात्कार, हत्या, हत्या के प्रयास, अप्राकृतिक कृत्य और सुबूत मिटाने जैसे अपराधों का दोषी पाया था.

एपी संवाददाता के मुताबिक़ जैसे ही बुधवार को गैंगरेप के दोषी को पुलिस अदालत के कमरे में लाई, वो खुद को निर्दोष बताते हुए चिल्लाने लगा.

सज़ा पर सुनवाई के दौरान बलात्कार पीड़ित लड़की के पिता भी अदालत में मौजूद है, जिन्होंने अपनी आंखें आधी बंद कर रखी हैं. हरी साड़ी में आईं पीड़ित लड़की की मां अपने पति के साथ बैठी देखी गईं. वो पूरे ध्यान से कोर्ट की कार्रवाई सुन रही हैं.

'चरम बर्बरता'

सरकारी वकील ने अदालत के सामने कहा , ''इससे ज़्यादा ख़ौफ़नाक कुछ नहीं हो सकता, जिसमें एक असहाय लड़की पर ज़ुल्म ढाया गया.'' उनका कहना था कि मौत की सज़ा इसलिए न्यायोचित है क्योंकि इस वारदात में अभियुक्तों ने 'चरम स्तर की बर्बरता' का परिचय दिया.

एपी संवाददाता के मुताबिक़ विशेष सरकारी वकील दया कृष्ण ने कोर्ट से कहा कि इन चारों दोषियों ने युवती के शरीर में लोहे की रॉड घुसाई थी और उसके अंगों को बाहर खींच लिया था. उन्होंने कहा, ''यह दुष्टता की चरम स्थिति का मामला है.''

उनका कहना था कि इस मामले ने पूरे देश की ‘सामूहिक चेतना’ को हिलाकर रख दिया है. उन्होंने 2004 में एक हत्यारे और बलात्कारी को फांसी दिए जाने का भी उल्लेख किया.

इस पर बचाव वकील विवेक शर्मा ने तर्क दिया कि दोषियों के लिए उम्रक़ैद काफ़ी है. उनका कहना था, "अदालत को यह ध्यान में रखना चाहिए कि उम्रक़ैद ही नियम है जबकि फांसी अपवाद."

दिल्ली सामूहिक बलात्कार कांड: तारीखों की नज़र से

नौ महीने पुरानी वारदात

यह मामला पिछले साल 16 दिसंबर का है, जब राजधानी दिल्ली में 23 साल की फ़िज़ियोथिरेपी छात्रा और उसके साथी पर चलती बस में हमला किया गया था. युवती से कुछ लोगों ने सामूहिक बलात्कार कर दोनों को सड़क पर फेंक दिया था.

पुलिस ने इसके बाद बस ड्राइवर समेत पांच अभियुक्तों को गिरफ़्तार किया. इसके अलावा एक नाबालिग़ अभियुक्त को भी पकड़ा गया, जिस पर सबसे ज़्यादा क्रूरता बरतने के आरोप थे.

युवती को दिल्ली के अस्पताल में भर्ती कराया गया, पर उसकी हालत बिगड़ती गई. इसके बाद उसे सिंगापुर के अस्पताल में इलाज के लिए ले जाया गया.

वहां भी उसकी हालत में सुधार नहीं हुआ और 29 दिसंबर को गैंगरेप की शिकार इस छात्रा की मौत हो गई थी.

फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट

इसके बाद दिल्ली समेत पूरे देश में ज़बर्दस्त प्रदर्शन हुए और बलात्कार के ख़िलाफ़ कड़े क़ानून बनाने की मांग उठी थी.

23 दिसंबर को दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश के बाद इस मामले की सुनवाई और जल्द निपटारे के लिए फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट बना. इस साल तीन जनवरी को पांच अभियुक्तों के ख़िलाफ़ पुलिस ने 33 पेज की चार्जशीट दायर की. 21 जनवरी 2013 को कैमरे की निगरानी में पांच अभियुक्तों के ख़िलाफ़ केस की सुनवाई शुरू हुई.

नाबालिग़ अभियुक्त की सुनवाई कर रहे जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड ने 28 जनवरी को अपने अहम फ़ैसले में उसे नाबालिग़ घोषित कर दिया. दो फ़रवरी को फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट ने पांच अभियुक्तों के ख़िलाफ़ आरोप तय कर दिए.

केस की कार्यवाही के दौरान 11 मार्च को एक अभियुक्त राम सिंह तिहाड़ जेल की बैरक में मृत मिले थे.

इस मामले में 31 अगस्त को जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड ने नाबालिग़ अभियुक्त को छात्रा से बलात्कार और हत्या का दोषी पाते हुए तीन साल की सज़ा सुनाई थी. तीन सितंबर को फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट में बाकी चार अभियुक्तों के ख़िलाफ़ सुनवाई ख़त्म हो गई थी जिसमें कुल 130 बैठकें हुईं और सौ से ज़्यादा गवाहियां दर्ज की गईं.

वर्मा कमेटी

सरकार ने लोगों की पुरज़ोर मांग के बाद बलात्कार के क़ानूनों में बदलाव के लिए भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस जेएस वर्मा की अध्यक्षता में एक कमेटी का गठन किया. जस्टिस वर्मा कमेटी को देश भर से 80 हज़ार सिफारिशें मिली.

कमेटी ने दुनिया भर के उदाहरणों को ध्यान में रखते हुए इस पर गहराई से विचार किया. जस्टिस वर्मा ने 29 दिनों में सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंपी.

इस रिपोर्ट में बलात्कार के लिए फ़ांसी की सज़ा की मांग को ठुकरा दिया गया था.

हालांकि कमेटी ने बलात्कार और महिलाओं के ख़िलाफ़ हिंसा के दायरे और उसके पैमाने को लेकर कड़े क़ानून बनाने की अनुशंसा की.

इसके बाद संसद ने बलात्कारियों के लिए मृत्यु दंड सहित कड़ी से कड़ी सज़ा के प्रावधान वाले नया विधेयक पास किया.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां क्लिक करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर भी फ़ॉलो कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार