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विदेशी साज पर गुनगुनाता भारतीय संगीत

 रविवार, 8 सितंबर, 2013 को 11:00 IST तक के समाचार
ज़ुबिन मेहता, कश्मीर, संगीत कंसर्ट, भारत

जाने-माने ऑर्केस्ट्रा कंडक्टर ज़ुबिन मेहता की भारत प्रशासित कश्मीर में प्रस्तुति के बाद इतना शोर-शराबा हुआ कि उनके संगीत से ज़्यादा विवादों और राजनीति की चर्चा देखने को मिली है.

बावेरियन स्टेट ऑर्केस्ट्रा की तरफ़ से और भारत में जर्मन दूतावास की मदद से भारत प्रशासित कश्मीर के श्रीनगर में इस संगीत कंसर्ट का आयोजन किया गया था. इसमें 98 संगीतकारों ने हिस्सा लिया.इसे नाम दिया गया था – अहसास-ए-कश्मीर.

श्रीनगर के मुग़ल गार्डन में हुए इस कंसर्ट में क़रीब दो हज़ार मेहमान मौजूद थे. ज़ुबिन मेहता ने इस मौक़े पर कहा कि उन्हें इस क्षण का बरसों से इंतज़ार रहा है कि वह संगीत के ज़रिए ‘शांति का संदेश’ फैला सकें.विवादों से अलग ज़ुबिन मेहता की ज़िंदगी पूरी तरह संगीत को समर्पित रही है.

मेडिसिन की पढ़ाई छोड़ी

1936 में मुंबई में जन्मे ज़ुबिन मेहता की संगीत शिक्षा उनके पिता मेहली मेहता की देखरेख में शुरू हुई जो एक मशहूर वायलनिस्ट और बॉम्बे सिंफ़नी ऑर्केस्ट्रा के संस्थापक थे.

मुंबई के सेंट मेरी स्कूल और सेंट ज़ेवियर स्कूल के छात्र रहे ज़ुबिन मेहता जब स्कूल में ही थे तो उन्हें उनके पहले पियानो शिक्षक मिले – जोसेफ़ डि लीमा.

मुंबई में कुछ वक़्त मेडिकल की पढ़ाई करने के बाद वह 1954 में ऑस्ट्रिया की राजधानी वियेना पहुंचे, जहां उन्होंने हान्ज़ स्वारोवस्की के निर्देशन में अकेडमी फ़ॉर म्यूज़िक में कंडक्शन की शुरुआत की.

मेहता ने 1958 में लिवरपूल इंटरनेशनल कंडक्टिंग कॉम्पिटीशन जीता. टैंगलवुड की ग्रीष्मकालीन अकेडमी में भी वह पुरस्कृत हुए. 1961 तक वह वियेना, बर्लिन और इसरायल फ़िलहार्मोनिक ऑर्केस्ट्रा में अपनी प्रस्तुति दे चुके थे. तीनों जगहों पर अपनी प्रस्तुतियों के वे 50 साल पूरे कर चुके हैं.

ज़ुबिन मेहता, कश्मीर, संगीत कंसर्ट, भारत

ज़ुबिन मेहता 1961 से 1967 तक मॉन्ट्रियल सिंफ़नी ऑर्केस्ट्रा के संगीत निर्देशक भी रहे और उन्होंने लॉस एंजिल्स फ़िलहार्मोनिक ऑर्केस्ट्रा में भी संगीत निर्देशन किया. 1969 में उन्हें इसरायल फ़िलहार्मोनिक ऑर्केस्ट्रा का संगीत सलाहकार बनाया गया और 1977 में वह उसके संगीत निर्देशक बन गए. इसरायल फ़िलहार्मोनिक ऑर्केस्ट्रा ने उन्हें 1981 में जीवन भर के लिए संगीत निर्देशक से सम्मानित किया.

मेहता की पहली शादी कनाडियन सोपरानो कार्मेन लास्की के साथ 1958 में हुई, जिनसे उन्हें एक बेटा मर्वॉन और एक बेटी ज़रीना हैं. 1964 में दोनों का तलाक हो गया. तलाक के दो साल बाद कार्मेन ने मेहता के भाई ज़रीन मेहता से शादी की जो न्यूयॉर्क फ़िलहार्मोनिक के एक्ज़ीक्यूटिव डायरेक्टर रह चुके थे.

जुलाई 1969 में मेहता ने एक पूर्व अमरीकी अभिनेत्री नैंसी कोवाक से शादी की. मेहता हालांकि अमरीका के स्थायी नागरिक हैं लेकिन उन्होंने भारत की नागरिकता भी नहीं छोड़ी है.

तीन हज़ार प्रस्तुतियां

ज़ुबिन मेहता ने तीन हज़ार से ज़्यादा संगीत सम्मेलनों का संचालन किया है और यह कंसर्ट दुनिया के पांचों महाद्वीपों में होते रहे हैं. 1978 में उन्होंने न्यूयॉर्क फ़िलहार्मोनिक ऑर्केस्ट्रा के संगीत निर्देशक का कार्यभार संभाला और 13 साल तक इसी पद पर रहे, जो ऑर्केस्ट्रा के इतिहास में सबसे लंबा संगीत निर्देशक का रिकॉर्ड है.

ज़ुबिन मेहता ने अपनी शुरुआत एक ऑपेरा कंडक्टर के बतौर मॉन्ट्रियल के टोस्का में 1963 में की थी. इसके बाद से उन्होंने मेट्रोपॉलिटन ऑपेरा न्यूयॉर्क, वियेना स्टेट ऑपेरा, रॉयल ऑपेरा हाउस, कॉवेंट गार्डन, ला स्काला मिलान और शिकागो और फ़्लोरेंस के ऑपेरा हाउसों और साल्ज़बर्ग फ़ेस्टिवल में कंडक्शन किया है.

संगीत प्रतिभाओं की तलाश

ज़ुबिन मेहता, कश्मीर, संगीत कंसर्ट, भारत

ज़ुबिन अपने भाई ज़रीन मेहता के साथ मुंबई में मेहली मेहता म्यूज़िक फ़ाउंडेशन के सह चेयरमैन भी हैं जहां 200 से ज़्यादा छात्र पश्चिमी शास्त्रीय संगीत की शिक्षा ले रहे हैं. जबकि इसरायल में मौजूद बुकमैन-मेहता स्कूल ऑफ़ म्यूज़िक में इसरायली प्रतिभाओं को प्रशिक्षित किया जाता है.

मेहता के जीवन के बारे में टैरी सांडर्स ने एक डॉक्यूमेंट्री फ़िल्म बनाई है जिसका नाम है पोर्ट्रेट ऑफ़ ज़ुबिन मेहता. ज़ुबिन पर दूसरी डॉक्यूमेंट्री ‘ज़ुबिन एंड आय’ को एक इसरायली हार्पिस्ट के नाती ने तैयार किया है. ज़ुबिन ने 1969 में शूबर्ट की ट्राउट क्विंटे पर बनी एक डॉक्यूमेंट्री ‘द ट्राउट’ में डबल बास की प्रस्तुति दी है.

ज़ुबिन मेहता फ़्लोरेंस (इटली) और तेल अवीव (इसरायल) के सम्मानित नागरिक हैं और ढेरों पुरस्कार और सम्मान उनके नाम हैं. भारत सरकार ने मेहता को 1966 में पद्मभूषण और 2001 में दूसरे सबसे बड़े नागरिक सम्मान पद्मविभूषण से सम्मानित किया.

इसी साल 6 सितंबर को भारत के राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने उन्हें 2013 के टैगोर सम्मान से नवाज़ा है. आज भी वह दुनिया भर में संगीत प्रतिभाओं की खोज और उन्हें आगे बढ़ने में मदद देने का काम कर रहे हैं.

ऑर्केस्ट्रा संगीत में रुचि ले भारत'

म्यूज़िक कंडक्टर ज़ुबिन मेहता इससे पहले 2011 में भारत आए थे तो उन्होंने भारतीयों से अनुरोध किया था कि देशवासी ऑर्केस्ट्रा संगीत में रुचि लें.

ज़ुबिन मेहता का कहना है कि शास्त्रीय संगीत 1930 और 1940 के दशक के बाद काफ़ी बदल गया है जब उनके पिता ने उन्हें बॉम्बे सिंफ़नी ऑर्केस्ट्रा की स्थापना में मदद की थी.

भारत में पहली बार ज़ुबिन मेहता ने 26 दिसंबर 2005 को संगीत कंसर्ट में प्रस्तुति दी. यह कंसर्ट भारत में एक साल पहले आई सुनामी की याद में आयोजित किया गया था. बावेरियन ऑर्केस्ट्रा के साथ मिलकर ज़ुबिन ने चेन्नई की मद्रास म्यूज़िक अकेडमी में इस कंसर्ट में हिस्सा लिया. इसे मद्रास जर्मन कॉन्सुलेट के मैक्समूलर भवन के साथ मिलकर आयोजित किया गया था.

इसके बाद इस साल भारत प्रशासित कश्मीर में उनकी यह पहली प्रस्तुति थी.

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