केदारनाथ मंदिर में 11 सितंबर से शुरू होगी पूजा

  • 7 सितंबर 2013
केदारनाथ मंदिर
उत्तराखंड में प्रलयंकारी बाढ़ और भूस्खलन से हुई विभीषिका में 6000 लोग मारे गये थे

प्रलयंकारी बाढ़ से हुई तबाही के बाद वीरान पड़े केदारनाथ मंदिर में 11 सितंबर से दोबारा पूजा शुरू होने जा रही है.

हालांकि केदारनाथ का सड़क संपर्क अभी भी कटा हुआ है और वहां सामान्य स्थिति बहाल नहीं हो पाई है. इसलिए फिलहाल वहां सिर्फ मंदिर में पूजा शुरू होगी श्रद्धालुओं के लिए यात्रा नहीं होगी .

11 सितंबर को सर्वार्थ सिद्धि अमृत योग है जिसे हिंदू धर्म में पवित्र दिन माना जाता है. इसी दिन वैदिक रीति से शुद्धिकरण के बाद केदारनाथ में सुबह 7 बजे से पूजा शुरू होगी. उत्तराखण्ड सरकार, मंदिर समिति और धर्माचार्यों की बैठक में ये सामूहिक निर्णय लिया गया.

16 और 17 जून को शिव की नगरी केदारनाथ में मौत का जो तांडव हुआ था, उसके बाद इतने दिनों तक वहां एक तरह से मरघट सा सन्नाटा रहा.

पुलिस और एनडीआरएफ के जवान लगातार वहां मिल रहे शवों का दाह संस्कार करते रहे और किसी तरह वहां सामान्य स्थिति बहाल करने की कोशिश की जाती रही लेकिन स्थिति ये है कि अभी भी केदारनाथ का सड़क संपर्क बहाल नहीं हो पाया है और न ही वहां के लिये कोई वैकल्पिक पैदल मार्ग ही बन पाया है.

महज़ बुनियादी सुविधा

उत्तराखंड में बाढ़ की तबाही से पीड़ित व्यक्ति
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सरकार का दावा है कि केदारनाथ में अब कोई शव नहीं है और वहां बुनियादी सुविधाएं भी बहाल कर दी गई हैं.

मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने कहा कि, “केदारनाथ में फिर से बिजली और पानी की व्यवस्था हो गई है और हैलीपैड से मंदिर तक के लिए सड़क बना दी गई है.

अभी वहां जानेवाले लोगों के लिए सैटेलाइट फोन की सुविधा रहेगी.”

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“हम देखेंगे कि 11 तारीख को क्या स्थिति बनती है उसके बाद ही देखा जाएगा. यात्रा आरंभ करने के लिये फिर से 30 सितंबर को बैठक होगी और उसके बाद ही कोई निर्णय लिया जाएगा.”

'जीवन पटरी पर नहीं'

केदारनाथ मंदिर
अभी भी प्रभावित इलाकों में जीवन पटरी पर नहीं लौट पाया

शुरूआत में केदारनाथ में सिर्फ 24-25 लोग ही रहेंगे और हर 10 दिन बाद नये लोग उनकी जगह ले लेंगे.

चार धाम विकास परिषद् के उपाध्यक्ष सुबुधानंद ने कहा कि, “ मंदिर में सरकार की अनुमति के बिना कोई नहीं जा सकेगा और अभी श्रद्धालु यात्रा नहीं कर सकेंगे. जैसे ही पैदल मार्ग बनेगा मंदिर सबके लिये खोल दिया जाएगा.”

उत्तराखंड में प्रलयंकारी बाढ़ और भूस्खलन से हुई विभीषिका में 6000 लोग मारे गये थे और अभी भी प्रभावित इलाकों में जीवन पटरी पर नहीं लौट पाया है.

राहत कार्यों में देरी और पुनर्निर्माण में अनियमितता की शिकायतों के बीच इस बात पर सवाल भी उठाए जा रहे हैं कि इसपर ध्यान देने की बजाय आखिर सरकार केदारनाथ में पूजा को लेकर इतनी हड़बड़ी क्यों दिखा रही है.

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