मीडिया के ख़िलाफ़ आसाराम समर्थकों ने छेड़ी मुहिम

  • 4 सितंबर 2013
आसाराम बापू

एक नाबालिग युवती से कथित तौर पर बलात्कार के आरोपों में घिरे आसाराम बापू के समर्थकों ने समाचार चैनलों का बहिष्कार करने की अपील की है.

वो इस मामले की कवरेज को आसाराम का 'मीडिया ट्रायल' करार देते हुए अपने समर्थकों से समाचार चैनलों और उनके सोशल मीडिया पेजों का बहिष्कार करने की अपील कर रहे हैं.

ये अपील ऐसे समय में जारी की गई हैं जब आसारम 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जोधपुर की जेल में बंद हैं. बुधवार को अदालत ने उनकी जमानत याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया.

आसाराम के खिलाफ बलात्कार का मामला दर्ज होने के दस दिन बाद उन्हें इंदौर से गिरफ़्तार किया गया. गिरफ्तारी में देरी को मीडिया में जोर शोर से उठाया गया था.

'सच'

ऐसे में आसाराम टीवी चैनलों पर छाए रहे, लेकिन उनके समर्थकों का कहना है कि इस कवरेज से आसारम की छवि खराब हो रही है. गुस्साए समर्थकों ने जोधपुर और भोपाल में पत्रकारों पर हमला भी किया.

आसाराम बापू
अख़बार के साथ वितरित किए गए इस पर्चे में न्यूज़ चैनल न देखने की अपील की गई.

मंगलवार को फरीदाबाद में लोगों को अपने अख़बारों में एक पर्चा मिला जिसमें लोगों से न्यूज़ चैनल न देखने की अपील की गई.

साथ यह भी कहा गया कि सिर्फ दो न्यूज़ 'ए2ज़ेड न्यूज़' और हिंदू राष्ट्रवादी विचारधारा का 'सुदर्शन न्यूज़' ही 'सच' दिखा रहे हैं इसलिए लोग सिर्फ इन दो चैनलों को ही देखें. इनमें एक चैनल आसाराम बापू का अपना है जबकि दूसरा हिंदू राष्ट्रवादी विचारधारा का समर्थक है.

यही नहीं, अख़बारों के साथ आए इस पर्चे में हिंदू संतों की ओर से आसाराम को साज़िश के तहत फँसाए जाने संबंधी बयान भी थे. पर्चे में हिंदू समाज से आसाराम के समर्थन में खड़े होने की अपील भी कई गई.

टीआरपी

आसाराम बापू
पर्चे में हिंदू सन्तों की ओर आसाराम के समर्थन में दिए बयान भी प्रकाशित किए गए

यही नहीं, आसाराम बापू के यूट्यूब चैनल 'संत अमृतवाणी' पर पोस्ट किए गए वीडियो में भी समाचार चैनल न देखने की अपील गी गई है.

आसाराम के समर्थन में आयोजित एक कार्यक्रम में मीडिया पर हमला करते हुए सुदर्शन न्यूज़ के चैयरमैन सुरेश के चव्हाणके ने कहा, "चैनल दो कारणों से आसाराम बापू के ख़िलाफ़ ख़बरें दिखा रहे हैं. पहला कारण है विदेशी कंपनियों की स्पॉन्सरशिप और दूसरा है टीआरपी. बापू के ख़िलाफ़ मसालेदार ख़बरें दिखाकर टीवी चैनल टीआरपी बटोरते हैं. इसलिए बापू के समर्थक बापू के ख़िलाफ़ खबर आते ही ऐसे चैनलों को स्विच ऑफ कर दें."

सुरेश चव्हाणके ने बापू के समर्थकों से सोशल मीडिया में भी समाचार चैनलों के सोशल मीडिया पेजों से दूर रहने की अपील की.

गलत नहीं बहिष्कार

वहीं ब्रॉडकास्ट एडिटर्स एसोशिएसन के महासचिव एनके सिंह बापू समर्थकों द्वारा मीडिया के बहिष्कार की अपील को गलत नहीं मानते हैं.

आसाराम बापू
आसाराम के यूट्यूब वीडियो में भी टीवी चैनलों को न देखने की अपील की गई है

वे कहते हैं, "भारत में सभी के पास अभिव्यक्ति का अधिकार है, यह सिर्फ मीडिया तक ही सीमित नहीं है. यदि वे मीडिया का बहिष्कार करने की बात करते हैं तो इसमें कोई गलत बात नहीं है. यह उनका अपना अधिकार है."

आसाराम के मामले में हुई मीडिया कवरेज को ज़रूरी बताते हुए वे कहते हैं कि इस मामले में मीडिया ने अपनी मौलिक ज़िम्मेदारी निभाई है.

सिंह मानते हैं कि मीडिया ने आसाराम का पक्ष भी रखा और आम जनता के विचार भी रखे. मीडिया ने ये बताया कि इस मामले में प्रशासन कहाँ-कहाँ नाकाम रहा.

सिंह के कहा, "मीडिया ने देश को बताया कि यदि एक आम आदमी अपराध करता है तो क़ानून कैसे काम करता है और जब प्रभावशाली लोगों पर अपराध के आरोप लगते हैं तब प्रशासन कैसे काम करता है."

हालाँकि एनके सिंह इस बात पर भी ज़ोर देते हैं कि मीडिया को देश में वैज्ञानिक विचारधारा के निर्माण की दिशा में और काम करना चाहिए. इससे कथित धर्मगुरुओं का प्रभाव कम होगा और लोग वैज्ञानिक सोच से अपनी आस्था को तय करेंगे, न कि अंधविश्वास से.

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