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आसाराम इंदौर से ही क्यों पकड़े गए?

 रविवार, 1 सितंबर, 2013 को 16:57 IST तक के समाचार

भोपाल से पुलिस को चकमा दे कर शुक्रवार को भागने के बाद आसाराम बापू इंदौर में शाम 8.30 देखे गए और रात 11 बजे आश्रम पहुंचे.

क्लिक करें आसाराम के आश्रम पहुँचने की खबर मिलते ही पुलिस और उनके समर्थकों, दोनों का जमावड़ा वहां लगना शुरू हो गया.

हालांकि आसाराम बापू के समर्थकों ने इस बात से इनकार किया कि आसाराम आश्रम में मौजूद हैं. इस सबके के बावजूद आश्रम के बाहर मीडिया वालों का हुजूम बढ़ता गया.

शनिवार सुबह करीब 11 बजे इंदौर पुलिस के एक अधिकारी ने पत्रकारों से कहा कि "आसाराम बापू के आश्रम में होने की कोई सूचना नहीं है."

उसके बाद 12.30 बजे मध्य प्रदेश पुलिस के एक डीएसपी गोविन्द रावत ने कहा कि आसराम ना ही आश्रम में हैं और ना ही इंदौर में.

लेकिन बावजूद इन दोनों बयानों के, ना ही आश्रम के बाहर से पत्रकार हटे ना आसाराम के समर्थक और ना ही पुलिस वाले .

क्लिक करें इससे पहले भी आसाराम पर लगे हैं कई गंभीर आरोप.

आसाराम का ठिकाना

इस बीच राजस्थान पुलिस ने जोर दे कर कहा कि आसाराम इंदौर में हैं और आश्रम में ही हैं.

राजस्थान पुलिस के इस बयान के बाद इंदौर पुलिस सकपकाई और करीब 4.30 बजे इंदौर के कलेक्टर आकाश त्रिपाठी ने कहा कि आसाराम आश्रम में हैं और दस मिनट के बाद मीडिया से बात करेंगे. लेकिन बापू नहीं आए.

पांच बजे आसाराम के बेटे नारायण साईं ने आकर पहली बार स्वीकार किया कि उनके पिता आश्रम में ही हैं.

आश्रम के अंदर बापू ने बार बार कहा, "मध्य प्रदेश सरकार दबाव में है" और क्लिक करें "मध्य प्रदेश पुलिस की भी कोई गलती नहीं है."

इससे पहले 27 अगस्त को जब आसाराम बापू इंदौर में आश्रम के बाहर पुलिस वाले घंटों इंतज़ार कर रहे थे तो आसाराम स्थानीय भाजपा विधायक रमेश मेंदोला के साथ बैठे थे.

विधानसभा में प्रवचन

वैसे मेंदोला अकेले नहीं है. इससे पहले साल 2004 में मध्य प्रदेश की तत्कालीन मुख्यमंत्री उमा भारती ने विधानसभा के अंदर आसाराम का एक प्रवचन कराया गया. इस प्रवचन में मध्य प्रदेश भाजपा के सभी विधायक और पूरा मंत्रिमंडल भक्तिभाव से उपस्थित था.

मध्य प्रदेश सरकार की तरफ से पत्रकारों को आमंत्रित किया गया था और मध्य प्रदेश शासन के जनसंपर्क महकमे ने बाकायदा उनके प्रवचन के प्रेस नोट छाप कर हिंदी और अंग्रेजी अख़बारों में बांटे थे.

वैसे उमा भारती अकेली भाजपा नेता नहीं हैं जो क्लिक करें आसाराम की करीबी मानी जाती थीं.

साल 2004 में जब तमिलनाडु की तत्कालीन मुख्यमंत्री जे जयललिता के कार्यकाल में कांची कामकोटी के शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती को गिरफ्तार कर लिया गया था तब भाजपा ने दिल्ली के संसद मार्ग पर एक प्रदर्शन किया था.

दिल्ली में दैनिक जागरण अख़बार ने राष्ट्रीय ब्यूरो चीफ़ राजकिशोर कहते हैं, "मुझे याद है मैंने ख़बर लिखी थी कि बापू के सहारे भीड़ जुटाने की कोशिश कर रही है भाजपा."

राजकिशोर याद करते हैं कि उस प्रदर्शन में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी से लेकर लाल कृष्ण आडवाणी तक सब जुटे थे. "मंच पर आसाराम के लिए भव्य सिंहासन लगा था और अगल बग़ल भाजपा नेता बैठे थे."

यही कारण है कि अब कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह आसाराम के मुद्दे पर भाजपा को घेर रहे हैं. उन्होंने क्लिक करें ट्विटर पर लिखा है कि लोकसभा विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज महिलाओं के मुद्दे पर खूब बोलती हैं तो इस मामले पर उन्होंने चुप्पी क्यों साध रखी है.

साल 2000 में मध्य प्रदेश के रतलाम शहर में आसाराम बापू के संगठन योग वेदान्त समिति के एक कार्यक्रम के लिए 250 हेक्टेयर ज़मीन 11 दिन के लिए दी गई थी.

रतलाम से स्थानीय पत्रकार विजय मीणा बताते हैं कि उस कार्यक्रम के सालों बाद भी उनके संगठन ने ये ज़मीन आज तक खाली नहीं की और अब आसाराम बापू उस ज़मीन पर दवा की एक फैक्ट्री चलाते हैं और खेती भी करते हैं.

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