'लिकर किंग' पॉन्टी चड्ढा मर्डर केस का हुआ क्या?

  • 2 सितंबर 2013
पॉन्टी चड्ढा, सुखदेव सिंह नामधारी

जाने-माने कारोबारी गुरदीप सिंह चड्ढा उर्फ पॉन्टी चड्ढा की पिछले साल दक्षिण दिल्ली के एक फ़ार्महाउस में हुई गोलीबारी के दौरान हत्या कर दी गई थी.

यह गोलीबारी पॉन्टी और उनके भाई के बीच हुई थी. इस वारदात में दोनों मौके पर ही मारे गए. दिल्ली पुलिस इस मामले की जाँच कर रही है और अब तक 22 लोगों को गिरफ़्तार कर चुकी है. इस मामले में पॉन्टी के करीबी सुखदेव सिंह नामधारी को मुख्य षड्यंत्रकारी के बतौर नामज़द किया गया है.

नामधारी को कैसे मिले हथियार

पॉन्टी चड्ढा की कहानी तिनके के पहाड़ में बदल जाने की दास्तान कही जा सकती है. एक वक़्त था, जब पॉन्टी का परिवार उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद शहर की एक सड़क किनारे ढाबा चलाया करता था. एक वक्त ऐसा भी आया जब 'मेसर्स वेव कॉरपोरेशन' के नाम से वे करोड़ों के कारोबार के मालिक बन गए.

बीबीसी ने पॉन्टी चड्ढा के उभरने और उनकी हत्या के बाद उनके कारोबारी साम्राज्य के भविष्य की पड़ताल करने की कोशिश की है.

'झगड़े की जड़'

दक्षिण दिल्ली स्थित चड्ढा परिवार का फॉर्म हाउस

पॉन्टी हत्याकांड में दक्षिण दिल्ली स्थित फ़ार्महाउस, चड्ढा परिवार के बीच संपत्ति को लेकर कथित विवाद, मामले के मुख्य आरोपी सुखदेव सिंह नामधारी की भूमिका जैसे कई पहलू हैं, जिनके जवाब खोजे जा रहे हैं. दक्षिण दिल्ली वाले फ़ार्महाउस से जुड़े कथित विवाद के सवाल पर पॉन्टी परिवार के वकील ने बीबीसी को बताया कि फ़ार्महाउस को लेकर कोई विवाद नहीं है.

उधर पॉन्टी चड्ढा के कत्ल की जाँच को लेकर पुलिस की आलोचना की जा रही है. पॉन्टी के परिवार ने ही दिल्ली पुलिस की तफ़्तीश को लेकर सवाल खड़े किए हैं और कहा है कि 'कोई ताकतवर' शख्स जाँच को प्रभावित कर रहा है. हालांकि दिल्ली पुलिस इन आरोपों से इनकार करती है.

एक रहस्यमयी कारोबारी

चड्ढा परिवार के वकील केके मन्नन ने बीबीसी को बताया कि तफ़्तीश की ज़िम्मेदारी स्पेशल टास्क फोर्स से लेकर क्राइम ब्रांच को देने की कोई ज़रूरत नहीं थी. मन्नन कहते हैं, "हम जानना चाहते हैं कि केस किसके इशारे पर ट्रांसफ़र किया गया. ऐसा क्यों किया गया. चार्जशीट में कई कमियाँ हैं."

वे पुलिस पर मामले की तफ़्तीश को अलग-अलग दिशाओं में भटकाने का आरोप लगाते हैं. उन्होंने कहा, "पुलिस की जाँच केवल एक शख्स सुखदेव सिंह नामधारी को मुख्य षड्यंत्रकारी क़रार देकर खत्म हो गई है. हमें अब भी यह लगता है कि कोई बहुत रसूख़दार आदमी इस पूरे मामले के पीछे है."

जाँच से जुड़े पुलिस अधिकारियों का कहना है कि दक्षिण दिल्ली के एक फ़ार्महाउस को लेकर पैदा हुए विवाद ही पॉन्टी और उनके भाई हरदीप के बीच "झगड़े की एकमात्र जड़" था. पिछले साल नवंबर में रहस्यमयी परिस्थितियों में चड्ढा परिवार के फ़ार्महाउस पर हुई गोलीबारी में दोनो भाईयों की मौत हो गई थी.

चार्जशीट

दक्षिण दिल्ली

इस मामले में दिल्ली पुलिस ने अभी तक तीन अलग-अलग चार्जशीट दायर की हैं. चार्जशीट के मुताबिक विवाद का तात्कालिक कारण दक्षिण दिल्ली के फ़ार्महाउस का कब्ज़ा था. चार्जशीट में पॉन्टी के क़रीबी सुखदेव सिंह नामधारी को मुख्य षड्यंत्रकारी के बतौर नामज़द किया गया है.

नामधारी के नौ और साथियों को भी फ़ार्महाउस में हुई गोलीबारी में कथित तौर पर 'शामिल' होने के लिए चार्जशीट में नामज़द किया गया है. राजनीति से जुड़े सुखदेव सिंह नामधारी इस हत्याकांड के वक़्त उत्तराखंड राज्य के अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष थे. नामधारी शराब और कंस्ट्रक्शन के कारोबार में भी दख़ल रखते थे.

पॉन्टी की हत्या

पुलिस ने अवैध तरीके से किसी को क़ैद करने, जबरन किसी के परिसर में प्रवेश करने, हत्या, साज़िश रचने, हत्या की कोशिश, अपहरण और सुबूत नष्ट करने के आरोपों में आईपीसी और सीआरपीसी की अलग-अलग धाराओं के तहत 22 आरोपियों पर मामले दर्ज किए हैं.

शुरुआत में दिल्ली पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स मामले की जाँच कर रही थी, लेकिन बाद में तफ़्तीश का जिम्मा क्राइम ब्रांच को सौंप दिया गया. नामधारी पॉन्टी के क़रीबी सहयोगी थी और पुलिस चार्जशीट के मुताबिक नामधारी गोलीबारी के वक्त फ़ार्महाउस पर मौजूद थे.

हालांकि दोनों भाईयों के बीच फ़ार्महाउस को लेकर लंबे समय से विवाद जारी था लेकिन पुलिस अधिकारियों का कहना है कि चड्ढा परिवार के कारोबार में शेयरों के बँटवारे के मुद्दे पर भी झगड़ा चल रहा था. चड्ढा परिवार का कारोबार पॉन्टी के पिता कुलवंत ने शुरू किया था.

झगड़ा

चड्ढा परिवार का मुरादाबाद स्थित वेव मॉल

परिवार के बुज़ुर्गों ने दोनों भाईयों का झगड़ा सुलझाने की कोशिश की थी. पारिवारिक सूत्रों के दावे के मुताबिक यह झगड़ा सुलझ गया होता. यहाँ तक कि दिल्ली पुलिस ने भी अपनी चार्जशीट में कहा है कि हरदीप के ससुर ने भी दोनों भाईयों के बीच चल रहे झगड़े में मध्यस्थता करने की कोशिश की थी.

नामधारी के वकील ने क़त्ल के इस मामले में अपने मुवक्किल के शामिल होने की बात से इनकार किया है. उनका कहना है कि नामधारी ने दोनों भाईयों के बीच गोलीबारी की पुलिस को ख़बर दी थी. उनके वकील कहते हैं कि नामधारी के बॉडीगार्ड ने केवल आत्मरक्षा में गोली चलाई थी.

दिल्ली पुलिस की तरफ से कोर्ट के सामने पेश की गई चार्जशीट में कहा गया है, "17 नवंबर 2012 को दोपहर के क़रीब साढ़े बारह बजे सुखदेव सिंह नामधारी और पॉन्टी चड्ढा एक लैंडक्रूज़र गाड़ी से फ़ार्महाउस नंबर-42 के गेट नंबर तीन पर पहुँचते हैं. नामधारी के साथ उनका निजी सुरक्षा अधिकारी सचिन त्यागी भी था. गाड़ी ड्राइवर राजदेव चला रहा था."

चार्जशीट में यह भी कहा गया है कि हरदीप ने कथित तौर पर पहले गोली चलाई फिर नामधारी और त्यागी ने हरदीप पर फ़ायर किया.

अगली कड़ी में पढ़ें - पॉन्टी चड्ढा के कारोबारी साम्राज्य के बारे में...

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