सोशल मीडिया राजनेताओं के लिए अच्छा ज़रिया है: मिलिंद देवड़ा

  • 21 सितंबर 2013
सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री मिलिंद देवड़ा

सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री मिलिंद देवड़ा ने कहा है कि एक ऐसा फ़ाइबर ऑप्टिक नेटवर्क बनाया जाएगा जो कि 2.5 लाख पंचायतों को कनेक्ट कर सकता है. यह नेटवर्क किसी से भेदभाव नहीं करेगा. इससे ग्रामीण इलाकों के लोग ब्राडबैंड नेटवर्क से जुड़ सकेंगे.

बीबीसी हिंदी के फ़ेसबुक पन्ने पर लाइव चैट के दौरान उन्होंने ये बात कही.

सेंट्रल मॉनिटरिंग सिस्टम और अवैध निगरानी से किसी की प्राइवेसी को बचाने के सवाल पर मिलिंद देवड़ा ने कहा, "मैं सभी को आश्वस्त कर दूं कि भारत में दुनिया की सबसे अच्छी निगरानी व्यवस्था है अपने नागरिकों के लिए. निश्चिंत रहें. सिक्योरिटी भी बेहद महत्वपूर्ण है और लोगों की प्राइवेसी भी."

डिजिटल इंडियन्स

छात्रों के लिए विकसित किए गए बहुचर्चित टैबलेट आकाश से जुड़े बीबीसी के पाठक दीपक शुक्ला के एक सवाल पर मिलिंद ने कहा, "आकाश का कार्यक्रम मानव संसाधन मंत्रालय के अंदर आता है लेकिन हम भी कोशिश कर रहे हैं कि एक देसी व्यवस्था बन सके. हार्डवेयर प्रोग्राम छात्रों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें. हालांकि ये मेरे मंत्रालय के काम में शामिल नहीं है."

ग्रामीण इलाकों में इंटरनेट की सुविधा को लेकर चिंताएँ जताई जाती रही हैं. बीबीसी पाठक आलोक कुमार भारती के इसी से जुड़े सवाल पर मिलिंद देवड़ा का जवाब था, "हम कोशिश कर रहे हैं कि एक ऐसा फ़ाइबर ऑप्टिक नेटवर्क बना सकें जो कि 2.5 लाख पंचायतों को कनेक्ट कर सकता है. यह नेटवर्क किसी से भेदभाव नहीं करेगा. इससे ग्रामीण इलाकों के लोग ब्रॉडबैंड नेटवर्क से जुड़ सकेंगे. उनको ऑनलाइन एजुकेशन मिलेगा. यह काम चालू है और हमने कई पंचायतों की पहचान की है जहां ये नेटवर्क काम कर सकेगा. यह नेटवर्क किसी से भेदभाव नहीं करेगा. चूंकि बीएसएनल, गेल आदि के पास कितना फ़ाइबर नेटवर्क है ये देखना एक लंबी प्रक्रिया का हिस्सा था इसलिए इसमें थोड़ा समय लगा है. हमें उम्मीद है कि अगले साल तक यह उद्देश्य पूरा हो जाएगा."

स्पीड और सर्विस

कम्प्यूटर, इंटरनेट

"जहां तक इंटरनेट की स्पीड और कॉस्ट का सवाल है तो हम कोशिश कर रहे हैं कि बाकी कंपनियों की तुलना में सर्विस सस्ती हो."

बीबीसी पाठक अश्विनी के आपत्तिजनक वेबसाइट्स से जुड़े सवाल पर उन्होंने कहा, "देखिए जो कटेंट है, वो अच्छा है या बुरा, यह मंत्रालय नहीं तय करती है. ये अलग अलग मंत्रायल तय करती है. हम तो टेक्नॉलॉजी मुहैया करते हैं."

जहाँ अखबार नहीं वहाँ मोबाइल

लाइव चैट में बीबीसी के पाठक ओम नारायण ने मुंबई में फ़ेसबुक पोस्ट की वजह से दो लड़कियों की हुई गिरफ्तारी की घटना का जिक्र करते हुए कानून की भूमिका पर सवाल उठाया.

इस पर मिलिंद देवड़ा ने कहा, "इन दोनों मामलों में आईटी एक्ट के सेक्शन 66 A का गलत उपयोग किया गया. मुबंई वाली घटना के बाद हमने इसमें बदलाव किया और अब एक बड़ा अधिकारी ही इस मामले में कोई फ़ैसला ले सकता है. इसमें काफी बदलाव हुआ है. हमने इसमें काफी इम्प्रूवमेंट किया है."

लाइव चैट में एक सवाल यह भी उठा कि सरकारी अधिकारी असुरक्षा की आशंकाओं के बावजूद ई-मेल सर्विस देने वाली निजी कंपनियों की सेवाएँ क्यों इस्तेमाल करते हैं.

मिलिंद ने कहा, "हां, ये अच्छा सवाल है. कई सरकारी अधिकारी इन सेवाओं का इस्तेमाल करते हैं. हमने नई नीति बनाई है कि सरकारी अधिकारी अपने जो सरकारी ईमेल करें वो एनआईसी वाले ईमेल के ज़रिए ही बातचीत करें और सरकारी कार्यों के लिए दूसरे ईमेल आईडी का प्रयोग न करें."

ई-गवर्नेंस और डाटा की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े किए जाते रहे हैं. इसी से जुड़े एक सवाल पर उनका कहना था, "भारत के पास 'मेघराज' नाम से अपना क्लाउड सिस्टम है जिसे बाहर की कंपनियां एक्सेस नहीं कर सकती हैं. इससे हमारी सुरक्षा सुनिश्चित होती है. मंत्रालय ने ये क्लाउड सिस्टम बनाया है. ई-गवर्नेंस प्लान के तहत ये तैयार हुआ है. नागरिकों के डाटा, सरकार के डाटा सब इसमें होंगे जिसे कोई एक्सेस नहीं कर सकेगा."

मोबाइल पर मतदान

भारत में चुनाव

रोमिंग शुल्क को लेकर मोबाइल उपभोक्ताओं के मन में कई तरह के सवाल रहते हैं. बीबीसी पाठक रवि मानसी ने इसी से जुड़ा सवाल पूछा.

मंत्री ने कहा, "हमने कोशिश की है रोमिंग को खत्म करने की लेकिन इस पर टीआरएआई की राय है कि इसमें कई तकनीकी समस्याएं हैं. हम इस दिशा में काम कर रहे हैं. कुछ महीने पहले टीआईएआई ने रोमिंग चार्ज बहुत कम किए हैं."

सुदीप्त शर्मा ने मोबाइल फोन की कीमतों के कम होने की बाबत अपना सवाल रखा.

कैसी ही भारत की डिजिटल तस्वीर

इस पर मिलिंद देवड़ा का जवाब था, "मोबाईल वगैरह के दाम तभी कम होंगे जब यहां उत्पादन होगी. इस दिशा में भी हमने कुछ काम किया है."

भारत में कॉल रेट तो गिरे हैं लेकिन ब्रॉडबैंड की दरें उस अनुपात में कम नहीं हुई हैं.

इस बारे में मंत्री जी कहते हैं, "इसका कारण ये है कि जो कोई भी ब्राडबैंड दे रहा है, उसने बहुत ज्यादा पैसा दिया है नीलामी के दौरान. हम भारत ब्राडबैंड सेवाएं ला रहे हैं जिसके ज़रिए इसकी कीमतें काफी कम हो सकेंगी."

राहुल की मंशा

राहुल गाँधी

बीबीसी पाठक कमलेश कुमार ने गाँवों में थ्री जी सुविधा का सवाल उठाया.

मंत्री जी का जवाब था, "कुछ गांवों में थ्री जी सेवाएं इस समय हैं. वायरलैस ब्राडबैंड एक्सेस भी है कुछ गांवों में. फ़ाइबर ऑप्टिक व्यवस्था आते ही हर गांव में ब्रॉडबैंड होगा और बहुत तेज़ होगा."

अभिनव आलोक ने मिलिंद देवड़ा से राजनीति में परिवारवाद और राहुल के बारे में पूछा.

किसानों की जिंदगी सँवारने की कोशिश

इस पर उनका जवाब था, "राजनीति में कई बातें होती हैं अच्छा नेता बनने के लिए. उसमें कम्युनिकेशन ही एक बात नहीं है. राहुल का फैमिली बैकग्राउंड है मेरा भी है लेकिन उनकी मंशा अच्छी है. वो कुछ करना चाहते हैं इसलिए हैं. वो चाहते तो नहीं आ सकते थे राजनीति में. वो एक भली भावना से आए हैं राजनीति में. मेरे ख्याल से ये बहुत बड़ी बात है."

लाइव चैट के दौरान एक सवाल यह भी उठा कि निजता और सुरक्षा में सामंजस्य किस तरह से बिठाया जाएगा.

मिलिंद कहते हैं, "मुझे लगता है कि ये संभव है. प्राइवेसी से जुडा क़ानून है जिसका पालन होना चाहिए और सिक्योरिटी से जुड़े जो क़ानून है उसी के तहत रहकर निगरानी भी हो तो दोनों एक साथ चल सकते हैं. अभी भी इस मामले में लोगों से बातचीत हो रही है. कैबिनेट में भी चर्चा होगी. संसद में भी चर्चा होगी और फिर स्थायी समिति में भी तो क़ानून बनने से पहले इस पर बहुत चर्चा होगी."

सियासत और सरकार

फेसबुक

सोशल मीडिया और सियासत के रिश्ते के सवाल पर मिलिंद ने कहा, "मुझे लगता है ऐसा हो रहा है. सोशल मीडिया एक डॉयलॉग है मोनोलॉग नहीं. डेमोक्रेसी में ये तो बहुत ही अच्छा है कि लोगों की पूरी ज़िम्मेदारी तय हो रही है. डायलॉग बढ़ा है इसमें कोई शक नहीं."

"कुछ लोग ये भी कहते हैं कि राजनेता मार्केटिंग करते हैं सोशल मीडिया के ज़रिए. ये अच्छा है. राजनेता अपनी बात पहुंचा सकते हैं. राजनीति और सरकार में कम्युनिकेशन बहुत ज़रुरी है और सोशल मीडिया इसका एक अच्छा ज़रिया है."

'इंटरनेट ने बुरे वक्त में साथ दिया'

बीबीसी के पाठक गौरव माने ने स्कूलों को मुफ़्त ब्रॉडबैंड दिए जाने के बारे में पूछा.

मंत्री जी ने कहा, "स्कूलों को मुफ़्त ब्रॉडबैंड मिलेगा या नहीं, ये मार्केट डायनैमिक्स पर निर्भर करेगा. मैं मानता हूं कि इसके लिए अच्छे चांस है. हम कोशिश करेंगे कि स्कूलों को मुफ़्त मिल सके या सस्ता इंटरनेट मिल सके लेकिन ये डिपेंड करेगा कि उस स्कूल में कौन देता है इंटरनेट."

आखिरी टिप्पणी में मिलिंद देवड़ा ने कहा, "मैं बस इतना कहना चाहूंगा कि अगले कुछ समय में भारत के किसी भी कोने में कोई रहता हो, इंटरनेट उसे ज़रुर प्रभावित करेगा."

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