दिल्ली गैंगरेपः नाबालिग़ अभियुक्त पर आज आ सकता है फ़ैसला

  • 31 अगस्त 2013
दिल्ली गैंगरेप
दिल्ली में हुए इस गैंगरेप के बाद देश भर में प्रदर्शन हुए थे

पिछले साल दिसंबर में हुए दिल्ली गैंगरेप की घटना के नाबालिग अभियुक्त के बारे में जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड का फ़ैसला शनिवार को आ सकता है.

बोर्ड बता सकता है कि नाबालिग पर लगाए गए आरोप किस हद तक सही हैं और गैंगरेप मामले में इस अभियुक्त की क्या भूमिका रही.

भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी की याचिका के कारण जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड अपना फ़ैसला नहीं दे पा रहा था. इस याचिका के कारण जस्टिस बोर्ड को तीन बार अपना फ़ैसला टालना पड़ा. लेकिन याचिका पर हुई पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया था कि जुवेनाइल बोर्ड अपना फ़ैसला दे सकता है.

दिल्ली गैंगरेप के बाद हुए व्यापक प्रदर्शनों के दौरान इस नाबालिग अभियुक्त को कठोर सजा देने की माँग की गई लेकिन मानवाधिकार संगठन ह्यूमन राइट्स लॉ नेटवर्क से जुड़े अधिवक्ता अनंत अस्थाना इस तरह की माँगों को उचित नहीं मानते.

अस्थाना कहते हैं, "अभी तक यह फ़ैसला नहीं आया है कि इस नाबालिग का दोष है भी या नहीं है. मैं मानता हूँ कि इस नाबालिग को कठोर सजा देने की माँग समय से पहले ही कर दी गई."

कठोर सजा

अस्थाना कहते हैं, "बड़ी बहस ये है कि कठोर सजा क्यों दी जाए. लोगों का मानना है कि ऐसा करने से अपराध कम हो जाएंगे. लेकिन फिर सवाल यह उठता है कि क्या व्यस्कों ने अपराध करना बंद कर दिया है. दंड दिए जाने की कितनी प्रभावी भूमिका अपराध को रोकने में होती है इसको लेकर बड़ी बहस है. दंड का अपराध के ऊपर कोई असर नहीं पड़ता है. क्योंकि अपराध सजा को ध्यान में रखकर अपराध नहीं करता. पहले अपराध हो जाते हैं उसके बाद सजा मिलती है."

क्या गंभीर सजा से बाल अपराध कम हो जाते हैं? इस सवाल के जबाव में अस्थाना कहते हैं, "कई शोधों से यह पता चला है कि बच्चों को गंभीर सजाएं देने का बाल अपराध की रोकथाम से कोई संबंध नहीं है. अमरीका में कई मामलों में बच्चों को व्यस्कों की तरह सजा दी गई है लेकिन उसका अपराध की रोकथाम पर कोई असर नहीं हुआ."

दिल्ली में बीते साल 16 दिसंबर को हुए गैंगरेप के मामले में एक अभियुक्त नाबालिग है जिसकी संभावित सजा को लेकर मीडिया और समाज में गंभीर बहस होती रही है. एक वर्ग की माँग है कि उसे भी कठोर सजा दी जाए जबकि बाल अधिकार कार्यकर्ता इसके ख़िलाफ़ हैं.

बाल अपराध

मुंबई गैंगरेप
हाल ही में मुंबई में हुए एक गैंगरेप ने महिलाओं की सुरक्षा पर फिर सवाल खड़े किए हैं

बाल अधिकार कार्यकर्ता मानते रहे हैं कि इस मामले के फ़ैसले का असर अन्य बाल अपराधों के मामले पर भी पड़ सकता है. इस पर अस्थाना कहते हैं, "इस मामले का किसी अन्य केस पर कोई असर नहीं होगा क्योंकि यह निचली अदालत का फ़ैसला है और निचली अदालत के फ़ैसले का असर सिर्फ संबंधित अभियुक्त पर होता है."

अस्थाना बताते हैं कि भारत में बाल अपराध की दर बाकी देशों के मुकाबले कम है. नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के आँकड़ों के मुताबिक भारत में होने वाले कुल अपराधों में से मात्र 1.1 प्रतिशत में ही बाल अपराधी लिप्त है.

अस्थाना यह भी मानता है कि भारत में बाल अपराधों की रोकथाम के लिए सरकार की ओर से गंभीर प्रयास नहीं किए जा रहे हैं. अस्थाना के मुताबिक़ भारत में बाल अपराधों का सबसे मुख्य कारण नशाख़ोरी है.

वे कहते हैं, "कुल बाल अपराधियों में से क़रीब 60 प्रतिशत नशाखोरी के कारण अपराध करते हैं लेकिन बच्चों को नशे से निज़ात दिलाने के लिए सरकार ने ट्रीटमेंट सेंटर नहीं खोले हैं. यदि सरकार इस दिशा में गंभीर प्रयास करे तो बाल अपराधों पर रोकथाम संभव है."

शनिवार को अदालत इस नाबालिग़ अभियुक्त के विषय में फ़ैसला सुनाएगी और गैंगरेप के मामले में उसकी भूमिका तय करेगी.

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