चुनावी मौसम में फिर याद आए राम लला

  • 25 अगस्त 2013

विश्व हिंदू परिषद ने राम मंदिर के निर्माण का सवाल उठाते हुए एक बार फिर अयोध्या की परिक्रमा का एलान किया है.

उत्तर प्रदेश की सरकार ने विश्व हिंदू परिषद के इस कार्यक्रम पर पाबंदी लगा दी है और सुरक्षा व्यवस्था बिगड़ने की आशंका के मद्देनज़र विश्व हिंदू परिषद के नेताओं को एहतियाती तौर पर हिरासत में लेने का आदेश दिया है.

वीएचपी के बड़े-बड़े नेताओं ने घोषणा की कि वे प्रतिबंध के बावजूद रविवार से अपनी घोषित तक़रीबन 300 किलोमीटर लंबी परिक्रमा अयोध्या से शुरू करेंगे.

राम मंदिर आंदोलन हालाँकि धर्म के नाम पर शुरू हुआ लेकिन इसकी धुरी हमेशा राजनीतिक रही. पिछले 30 बरस से देश में जब भी चुनाव क़रीब आए हैं, राम मंदिर के निर्माण का मामला किसी न किसी रूप में सामने आ जाता है.

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कम होता वजूद

बाबरी मस्जिद को गिराए जाने के बाद हालाँकि इस विवाद में लोगों की वो दिलचस्पी नहीं रह गई है जो मस्जिद गिरने से पहले थी. लेकिन अब भी ये विवाद कुछ दिनों के लिए माहौल गर्म कर देता है.

कोसी परिक्रमा
कोसी परिक्रमा के लिए अयोध्या पहुँचे अशोक सिंघल को रोक दिया गया है

भारत के बदलते हुए आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक परिवेश में अपने खोते वजूद की तलाश में सक्रिय कुछ कट्टरपंथी तत्व कुछ क्षणों के लिए देश की राजनीति में अपना महत्व महसूस करा लेते हैं.

उन्हें भी अब ये महसूस होने लगा है कि मस्जिद के गिरने के साथ ही इनकी राजनीतिक अहमियत ख़त्म हो गई है.

ऐसा इसलिए नहीं है कि भारत में धर्म की सियासत और विचारधारा कमज़ोर पड़ गए हैं, बल्कि इसलिए है कि असहिष्णुता और घृणा वाली विचारधारा अब ज़्यादा प्रभावी, व्यापक और नए रूप अख्तियार कर रही है.

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धार्मिक विवाद

और इस नए रूप में विश्व हिंदू परिषद जैसे पुराने तौर तरीक़े वाले संगठन अपने मायने खो चुके हैं और अप्रासंगिक से हो गए हैं.

अयोध्या की बाबरी मस्जिद की मिल्कियत का फैसला इलाहाबाद हाई कोर्ट कर चुका है. अदालत ने इस दलील को स्वीकार किया है कि बाबरी मस्जिद की विवादित ज़मीन ही भगवान राम की जन्मभूमि है और इस ज़मीन का फ़ैसला राम जन्मभूमि के हक़ में किया है.

इसके ख़िलाफ़ दोनों ही पक्षों ने सुप्रीम कोर्ट में अपील कर रखी है. मामले की सुनवाई शुरू होनी है.

1949 में बाबरी मस्जिद परिसर में मूर्ति रखे जाने से लेकर मस्जिद गिराए जाने तक किसी भी समय ये विवाद एक धार्मिक विवाद नहीं था.

गहरा ज़ख्म

राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद का विवाद सरकार के प्रभाव, सत्ता में बैठे राजनेताओं और अराजकता के बीच था.

कोसी परिक्रमा
राम मंदिर पर हो रही राजनीति के कारण अयोध्या तनाव का केंद्र बन गया है

लेकिन मुसलमानों के कट्टरपंथी संगठनों ने इस विवाद में कूद कर इसे राज्य बनाम अराजकता से हिंदू और मुसलमानों का मसला बना दिया.

भारत के कई राज्यों में हज़ारों मुसलमान इस आंदोलन की भेंट चढ़ चुके हैं. इस आंदोलन ने मुसलमानों को स्वतंत्र भारत के इतिहास में सबसे गहरा ज़ख्म दिया है.

लेकिन मुसलमानों की नई पीढ़ी अतीत के खंडहरों से निकलकर अब भविष्य में एक नई मंज़िल तलाश करने की कोशिश कर रही है.

वो जानते हैं कि उन्हें बीजेपी से लेकर कांग्रेस और मुलायम व लालू तक हर तरह की मरीचिकाओं और रुकावटों का सामना करना होगा, लेकिन भविष्य की इबारत के लिए अतीत के खंडहरों और बाबरी मस्जिद का मलबा पार्टियों और संगठनों के लिए छोड़कर आगे बढ़ जाना ही वक्त का तकाज़ा है.

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