ममता ने दिया गोरखालैंड बंद पर अल्टीमेटम

  • 11 अगस्त 2013
ममता बनर्जी
ममता बनर्जी ने कहा है कि बंद वापस लेने पर वार्ता शुरु हो सकती है

दार्जीलिंग के पहाड़ी इलाक़ों में सामान्य जनजीवन बहाल करने के कलकत्ता हाई कोर्ट के आदेश के बाद पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने गोरखा जनमुक्ति मोर्चा (जीजेएम) को 72 घंटे के भीतर बंद वापस लेने की समय-सीमा तय कर दी है.

गोरखा जनमुक्ति मोर्चा भारत के पूर्वी राज्य पश्चिम बंगाल से अलग गोरखालैंड के गठन की मांग कर रहा है.

ममता बनर्जी ने कहा कि जीजेएम अगर ऐसा नहीं करता तो उसे सख़्त कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है.

शनिवार को राज्य सचिवालय में हुए एक संवाददाता सम्मेलन में मुख्यमंत्री ने कहा, “मैंने आठ दिन तक सब बर्दाश्त किया है. मैं बंद वापस लेने के लिए 72 घंटे का वक्त देती हूं. मुझे सख़्त कार्रवाई के लिए मजबूर न करें.”

जब उनसे यह पूछा गया कि क्या सरकार जीजेएम से वार्ता करेगी तो उन्होंने कहा, “उन्होंने कहा कि अगर वे बंद वापस लेते हैं तो बात करने में कोई परेशानी नहीं है. वे मुख्य सचिव या गृह सचिव से इस बारे में संपर्क कर सकते हैं.”

संवैधानिक दायित्व

उन्होंने पश्चिम बंगाल के विभाजन की संभावना को सिरे से ख़ारिज़ करते हुए कहा, “दार्जीलिंग पश्चिम बंगाल का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है. दार्जीलिंग का मेरे दिल में एक अहम स्थान है. किसी विशेष नस्ल के आधार पर राज्य का बंटवारा नहीं हो सकता है.”

उन्होंने यह भी दावा किया कि जीजेएम पर्वतीय इलाके में उतना लोकप्रिय नहीं है और यह संगठन जबरदस्ती बंद कराने पर अड़ा है जिससे स्थानीय लोगों की मुश्किलें बढ़ रही हैं.

उन्होंने हाई कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए कहा कि दार्जीलिंग में सामान्य जनजीवन बहाल करना उनका संवैधानिक दायित्व है.

बनर्जी ने कहा कि उन्होंने 25 बार दार्जीलिंग का दौरा किया है और वह फिर वहां जाएंगी.

उन्होंने केंद्र सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि कुछ राजनीतिज्ञों को विभाजन कर शासन करने की नीति से बचना चाहिए और एकता की नीति पर अमल करना चाहिए.

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