पीपी पांडेय को सुप्रीम कोर्ट से भी राहत नहीं

  • 8 अगस्त 2013
अदालत जाते आईपीएस पीपी पांडेय

सुप्रीम कोर्ट ने इशरत जहाँ मुठभेड़ मामले में आरोपी बनाए गए आरपीएस अधिकारी पीपी पांडेय को गिरफ्तारी के खिलाफ अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया.

गुजरात पुलिस के गुजरात के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक पीपी पांडेय के खिलाफ़ अहमदाबाद की एक विशेष सीबीआई अदालत ने बुधवार को ग़ैर जमानती वारंट जारी किया था. इसके बाद पांडेय ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर अंतरिम राहत की मांग की थी.

सीबीआई की विशेष अदालत में पांडेय ने खुद अदालत में हाज़िर होने से छूट देने की मांग की थी. वे अदालत में हाजडिर भी नहीं हुए थे.

पांडेय ने अदालत से माँग की थी कि वह सीबीआई की उनके खिलाफ दायर चार्जशीट की ग़ैर क़ानूनी घोषित करने की भी मांग की थी. उनका कहना है कि इसके लिए सरकार से मंजूरी नहीं ली गई थी. लेकिन अदालत ने उनकी यह मांग भी बुधवार को खारिज कर दी थी.

पीपी पांडेय 1982 बैच के पुलिस सेवा के अधिकारी है. उन्हें केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने 2004 के इशरत जहाँ मुठभेड मामले में अभियुक्त बनाया है.

मुठभेड़ कांड

इशरत जहाँ मुठेभेड़ कांड जब 2004 में जब हुआ था तब पीपी पांडेय अहमदाबाद में संयुक्त पुलिस आयुक्त के पद पर तैनात थे और अपराध शाखा की अगुआई कर रहे थे.

कॉलेज की छात्रा 19 साल की इशरत जहाँ की 2004 में अहमदाबाद के बाहरी इलाके में पुलिस के साथ एक कथित मुठभेड़ में मौत हो गई थी.

गुजरात पुलिस दावा करती है कि इशरत और उसके तीन दोस्त गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की हत्या करने के इरादे से अहमदाबाद आए थे, जहाँ पुलिस के साथ हुई मुठभेड़ में उनकी मौत हो गई थी.

मानवाधिकार कार्यकर्ता इस मुठभेड़ की सच्चाई पर सवाल उठाते रहे हैं. मुठभेड़ अहमदाबाद से सटे नरोल में हुई थी. इशरत के अलावा उसके साथ जावेद शेख, अमजदाली अकबराली राना और जीशान जोहर भी इस मुठभेड़ में मारे गए थे.

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