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'भारत की सुरक्षा है सबसे बड़ी चुनौती'

 बुधवार, 7 अगस्त, 2013 को 16:00 IST तक के समाचार
सैनिकों को श्रद्धांजलि देते सेना प्रमुख जनरल विक्रम सिंह और अन्य अधिकारी

जहाँ तक भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्ष विराम के उल्लंघन और पाकिस्तान की ओर से कथित तौर पर भारत में दहशतगर्दी फैलाने की कोशिश का सवाल है, मेरा मानना है कि यह पाकिस्तान की सेना की एक ख़ास तरह की रणनीति है.

पाकिस्तान की सेना ने मई 1990 से इसकी शुरुआत की थी. ऐसा करके उसने भारत की क्लिक करें आंतरिक सुरक्षा की चुनौतियों को बढ़ाने की कोशिश की है.

जिस समय इस रणनीति की शुरुआत हुई उस समय अफ़गानिस्तान की अंदरूनी स्थिति की वजह से क्लिक करें भारत और पाकिस्तान के रिश्ते प्रभावित हो रहे थे.

अब क़रीब 23 साल बाद अमरीका अफ़गानिस्तान से बाहर निकलने की कोशिश कर रहा है, हम इसी तरह की लहर देख रहे हैं. अभी दो-चार दिन पहले ही अफ़गानिस्तान में भारतीय वाणिज्य दूतावास पर हमला हुआ था.

दहशतगर्दी

पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय का बयान

पाकिस्तान भारतीय मीडिया के कुछ वर्गों में लगाए जा रहे इन आरोपों को खारिज करता है जिनके मुताबिक पुंछ सेक्टर में नियंत्रण रेखा पार कर हुए हमले में पांच भारतीय सैनिकों के मारे जाने का दावा किया गया है.
ये निराधार और बेबुनियाद आरोप हैं. हमारी सेना के अधिकारियों ने पुष्टि की है कि ऐसी किसी तरह की कोई गोलीबारी नहीं हुई है जिससे ऐसी घटना होती.
पाकिस्तान 2003 में हुए संघर्षविराम को लेकर बराबर वचनबद्ध है जो आपसी विश्वास को बढ़ाने वाला अहम कदम है और उसका पूरी तरह पालन किया जाना चाहिए. पाकिस्तान इसके पालन और मौजूदा सैन्य तंत्र को मजबूत करने की भी अपील करता है ताकि माहौल को खराब करने वाली इस तरह की निराधार रिपोर्टों से बचा जा सके.
पाकिस्तान भारत के साथ रचनात्मक, सतत और परिणाम आधारित संवाद को लेकर वचनबद्ध है और जल्द जल्द से बातचीत की प्रक्रिया बहाल करने की उम्मीद करता है. ये महत्वपूर्ण है कि दोनों ही पक्ष सकारात्मक माहौल बनाए रखने और नकारात्मक दुष्प्रचार से बचने के लिए गंभीरत प्रयास करें.

क्लिक करें पाकिस्तान की सेना की इस रणनीति के अलावा हम देख रहे हैं कि पूरे इलाके में दहशतगर्दी का माहौल है. अल क़ायदा के प्रमुख अल जवाहिरी जैसे नेता अपने काडर को कार्रवाई के लिए ललकार रहे हैं. यह भारत की सुरक्षा के लिए एक बहुत ही जटिल चुनौती है.

अब देखना यह है कि भारत और पाकिस्तान के बीच वार्ता बहाली और शांति कायम करने के प्रयासों के बीच भारतीय क्लिक करें प्रधानमंत्री किस तरह का क़दम उठाते हैं.

एक बार फिर भारत उसी मोड़ पर पहुँच गया है, जब जनवरी 2004 में भारतीय प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और जनरल परवेज मुशर्रफ़ के बीच एक समझौता हुआ था.

इस समझौते का मुख्य बिंदु यह था कि पाकिस्तान इस बात का आश्वासन देगा की वह किसी भी तरह की दहशतगर्दी को समर्थन नहीं देगा. लेकिन पिछले नौ साल से हम एक ही तरह की कार्रवाई का सामना कर रहे हैं.

मुझे लगता है कि 2014 तक दक्षिण एशिया में काफी उथल-पुथल होगी, क्योंकि अफ़ग़ानिस्तान और पाकिस्तान में गंभीर मंथन चल रहा है.

भारत और चीन भी अफ़ग़ानिस्तान और पाकिस्तान पर अपनी रणनीति की समीक्षा कर रहे हैं. यह उनकी सामरिक रणनीति का हिस्सा है, क्योंकि इस तरह की दहशतगर्दी चीन की भी समस्या है. वहीं भारत पिछले 23 साल से इस तरह की समस्या का सामना कर रहा है.

इसलिए मुझे लगता है कि इन चारों देशों के लिए अगले दो साल काफी उथल-पुथल भरे होंगे.

कैसे होंगे रिश्ते

भारतीय सेना

पुंछ में हुए हमले में पांच भारतीय में सैनिकों की मौत पर भारत में खासा गुस्सा देखने को मिल रहा है

भारत में चुनाव होने हैं, इसलिए देखना यह भी होगा कि राजनीतिक पार्टियां इसे किस रूप में लेती हैं.

अभी पाकिस्तान से जिस तरह के संकेत मिल रहे हैं उनसे यह साफ नहीं हो पा रहा है कि वहाँ की सेना और नई सरकार के बीच तालमेल है या नहीं. सेना ने नवाज शरीफ सरकार को स्वीकार किया है या नहीं.

पाकिस्तान में रोज हमले हो रहे हैं इसमें देखना यह होगा कि पाकिस्तान के अंदरूनी गुटों पर वहाँ की सेना और खुफिया एजेंसियां काबू पा पाती है या नहीं.

ऐसे हालात में भारत सरकार के सामने जो समस्या है, वह यह कि वह नवाज़ शरीफ़ सरकार के साथ किसी तरह के और कहाँ तक संबंध रखे.

भारत को यह भी स्वीकार करना होगा कि अल क़ायदा जैसे संगठन पाकिस्तान की सेना और सरकार की पकड़ से बाहर हैं, क्योंकि यह विचारधारा किसी राजनीतिक दायरे को नहीं मानती है.

(बीबीसी संवाददाता अजय शर्मा से बातचीत पर आधारित)

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