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‘राहुल गांधी ने बनाया वेदांता को सियासी मुद्दा’

 रविवार, 4 अगस्त, 2013 को 19:15 IST तक के समाचार
वेदांता

राज्य सरकार और वेदांता कंपनी के बीच हुए समझौते के तहत वेदांता को 15 लाख टन बॉक्साइट खनन की इजाज़त दी गई है.

ओडिशा की सरकार का कहना है कि कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने वेदांता के मामले का राजनीतिकरण किया है.

राज्य की नवीन पटनायक सरकार के पंचायती राज्य और संसदीय कार्य मंत्री कल्पतरू दास का कहना है कि, ''वेदांत की खनन परियोजना को पर्यावरण मंत्रालय से मंज़ूरी मिल गई थी लेकिन राहुल गांधी के आने के बाद से फिर से विवाद बढ़ गया.''

उनके मुताबिक़ ये पूरा विवाद कांग्रेस और कुछ स्वंयसेवी संस्थाओं की देन है जो सांठ गांठ से मामले को तूल दे रहे हैं.

वो कहते हैं कि वैसे कांग्रेस को इसका कुछ ख़ास फ़ायदा नहीं हुआ, है क्योंकि नियमगिरि में वोटर हैं ही कितने?

उन्होंने कहा कि कुछ गांव में तो बस दो-चार वोटर हैं.

'कुछ गांव में दो-चार वोटर'

जब उनसे ये पूछा गया कि गांवों जिनमें वोटर कम है उसका चुनाव तो राज्य सरकार ने किया है तो उनका कहना था कि हमने सुरक्षा कारणों से कम गांवो को चुना.

उड़ीसा के मंत्री का कहना था कि क्षेत्र में माओवादियों का प्रभाव है इसलिए ग्राम सभा को दी जाने वाली सुरक्षा को लेकर किसी तरह की कोई चूक नहीं की जा सकती थी.

नियमगिरि में सिर्फ 12 ग्राम सभा को चुने जाने को लेकर बड़ा विवाद है जबकि वहां कुल 112 आदिवासी गांव हैं.

कल्पतरू दास का कहना है कि ये वही इलाक़ा है जहां कुछ सालों पहले तक लोग पेट भरने के लिए बच्चों को बेच देते थे लेकिन वेदांत की रिफ़ायनरी वहां खुलने के बाद स्थिति बदली है.

उनका दावा है कि नवीन पटनायक सरकार ने भूखमरी का पर्यायवाची बन गए कलाहांडी और पास के क्षेत्रों में भोजन मुहैया करवाना अपनी पहली प्राथमिकता बनाया था जो पूरी तरह सफ़ल रहा है.

'कबीले हमेशा ऐसे नहीं रह सकते'

खनन पर चर्चा के लिए आदिवासियों की ग्राम सभाओं में भी फ़ैसला खनन के विरोध में आया.

नवीन पटनायक के पिता बीजू पटनायक का ज़िक्र करते हुए वो कहते हैं कि उन्होंने कहा था कि ‘ट्रायबल का डी-ट्रायबलाईज़ेशन’ करना होगा क्योंकि वो हमेशा अभी की स्थिति में नहीं रह सकते हैं.

लेकिन ये पूछे जाने पर कि रायगढ़ा और कलाहांडी के क्षेत्रों में बसे आदिवासियों को तो मूल सुविधाएं भी नहीं मुहैया हैं, कल्पतरू दास ने सीधा जबाव न देते हुए मामले का ठीकरा केंद्र सरकार के सर फोड़ दिया.

उन्होंने कहा, “खनिज हमारी संपदा है लेकिन उसपर सारा फ़ैसला उसकी रॉयल्टी से लेकर वहां खुदाई हो सकती है या नहीं का फैसला करने का अधिकार केंद्र सरकार के पास है.”

उनसे बार बार ये सवाल पूछे जाने पर कि क्या उन्होंने वेदांत को किसी और जगह विकल्प के तौर पर खान देने की बात सोची है उन्होंने सीधे तौर पर इसका जवाब नहीं दिया.

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