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तेलंगाना निर्णयः क्या है नेताओं की भूमिका?

 बुधवार, 31 जुलाई, 2013 को 01:04 IST तक के समाचार
तेलंगाना

मुख्य मंत्री किरण कुमार रेड्डी तेलंगाना के कड़े विरोधी और संयुक्त आंध्रप्रदेश के पक्षधर हैं.

तेलंगाना राज्य की निर्माण प्रक्रिया अब निर्णायक दौर में है. इस पूरी प्रक्रिया में विभिन्न मुख्य राजनेता अलग-अलग भूमिका में नजर आए. आइए, उन राजनेताओं पर एक नज़र डालें.

नल्लारी किरण कुमार रेड्डी

क्लिक करें आंध्र प्रदेश के मुख्य मंत्री किरण कुमार रेड्डी तेलंगाना के कड़े विरोधी और संयुक्त आंध्र प्रदेश के पक्षधर रहे हैं.

राजनीतिक रूप से ज्यादा ताकतवर नहीं होने के बावजूद कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने रायलसीमा क्षेत्र के चितूर ज़िले के किरण कुमार रेड्डी यह जिम्मेदारी सौंपी थी.

सालों सत्ता में रहने के बाद किरण कुमार रेड्डी ने तेलंगाना राज्य की स्थापना के संदर्भ में कांग्रेस नेतृत्व से इनकार करके सबको हैरान कर दिया है.

रेड्डी की स्थिति पहले ही काफी कमज़ोर है. पंचायत चुनाव में उनके जिले चितूर में कांग्रेस को तीसरा स्थान मिला है.

दामोदर राजा नरसिम्हा

आंध्र प्रदेश के उपमुख्य मंत्री और दलित नेता राजा नरसिम्हा तेलंगाना से ताल्लुक रखते हैं. वे तेलंगाना राज्य के प्रबल समर्थक हैं.

उन्होंने मुख्य मंत्री और दूसरे आंध्र नेताओं के इस प्रचार का साहसपूर्वक सामना किया की तेलंगाना राज्य की स्थापना आम लोगों के हित में नहीं होगी.

राजा नरसिम्हा उन नेताओं में से एक हैं जिनके नए राज्य के मुख्य मंत्री बनने की मजबूत संभावनाएं हैं.

के चंद्रशेखर राव

तेलंगाना

आंध्र नेताओं ने प्रचार किया कि तेलंगाना राज्य की स्थापना आम लोगों के हित में नहीं होगी.

क्लिक करें तेलंगाना राज्य के मसले को निर्णायक मोड़ पर लाने का श्रेय अगर किसी एक व्यक्ति को दिया जा सकता है तो वे हैं के चंद्रशेखर राव. उन्होंने 2001 में तब तेलंगाना राज्य की मांग फिर से उठाई जब लोग इसके बनने की उम्मीद छोड़ चुके थे.

जब तेलुगूदेसम से निकल कर उन्होंने अपनी अलग पार्टी बनाई तब सभी ने उनका यह कह कर मजाक उड़ाया था कि कुछ महीने के बाद इसका नामोनिशां नहीं बचेगा.

मगर चंद्रशेखर राव ने सबको गलत साबित कर दिया. 2009 में उन्होंने आमरण अनशन कर कांग्रेस पार्टी को तेलंगाना मसले पर एक स्पष्ट रुख अख्तियार करने पर मजबूर कर दिया.

वे तेलंगाना के इतिहास में अपनी जगह बना चुके हैं. लेकिन अब उनसे सवाल किया जा रहा है कि क्या वे एक दलित को तेलंगाना का पहला मुख्या मंत्री बनाने का अपना वादा पूरा करेंगे? और यदि किया, तो क्या वे अपनी पार्टी का कांग्रेस में विलय करेंगे?

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